बहस के बाद आज भी सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने वाले ‘नारी वंदन अधिनियम-2023’ को नोटिफाई कर दिया है। देर रात जारी इस अधिसूचना के साथ ही यह कानून प्रभावी हो गया है, भले ही परिसीमन से जुड़े बाकी बिलों पर अंतिम मुहर अभी बाकी हो।
सरकार का कहना है कि इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया चरणबद्ध होगी। इसके तहत सबसे पहले 2026 में होने वाली जनगणना के आंकड़े सामने आएंगे। इसके बाद नए सिरे से परिसीमन होगा, यानी लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाएंगी। इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ मिलना शुरू होगा।
लोकसभा में आज की कार्यवाही काफी अहम मानी जा रही है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi दोपहर 3 बजे इस मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे, जबकि इसके बाद गृह मंत्री Amit Shah सरकार की ओर से जवाब देंगे। शाम 4 बजे बिलों पर वोटिंग प्रस्तावित है, जिससे यह साफ हो जाएगा कि परिसीमन से जुड़े संशोधन कितनी आसानी से पारित होते हैं।
उधर विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। संसद परिसर में विपक्षी दलों की बैठक जारी है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण को लागू करने में अनावश्यक देरी कर रही है और इसे जनगणना व परिसीमन से जोड़कर आगे टालने की रणनीति अपना रही है। वहीं सरकार का तर्क है कि निष्पक्ष और प्रभावी आरक्षण के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण कानून को नोटिफाई करना सरकार का रणनीतिक कदम है। इससे एक ओर महिला सशक्तिकरण का संदेश जाता है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के आरोपों को भी जवाब मिलता है। हालांकि असली असर तब दिखेगा जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होगी और नई सीटों पर आरक्षण लागू होगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच देश की राजनीति में महिला भागीदारी को लेकर नई बहस छिड़ गई है। लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब ठोस प्रगति होती दिख रही है, लेकिन इसके लागू होने में अभी कुछ सालों का इंतजार बाकी है। 2029 का चुनाव इस लिहाज से ऐतिहासिक हो सकता है, जब पहली बार संसद में एक-तिहाई सीटों पर महिलाएं नजर आएंगी।

