राजस्थान के Jodhpur जिले में गाजर बीज उत्पादन इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है। झोला रोग के प्रकोप और हाल ही में हुई ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि इस बार बीज उत्पादन में करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है, जिससे न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी बल्कि हजारों लोगों के रोजगार पर भी संकट गहरा गया है।
जोधपुर के मंडोर, तिंवरी और ओसियां जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर गाजर की खेती की जाती है। करीब 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस खेती से हर साल लगभग 450 मीट्रिक टन बीज का उत्पादन होता है। खास बात यह है कि यहां के किसान लंबे समय से स्वयं बीज तैयार करते रहे हैं, जिससे वे बाजार पर निर्भर नहीं रहते और लागत भी नियंत्रित रहती है। लेकिन इस बार बीमारी और मौसम की मार ने इस पूरी व्यवस्था को हिला कर रख दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, झोला रोग ने फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को प्रभावित किया है। इसके साथ ही ओलावृष्टि ने पौधों को भौतिक रूप से नुकसान पहुंचाया, जिससे बीज बनने की प्रक्रिया बाधित हो गई। खेतों में कई जगह फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है, जबकि कुछ क्षेत्रों में उत्पादन बहुत कम रहने की संभावना है।
इस संकट का सीधा असर रोजगार पर भी पड़ रहा है। गाजर बीज उत्पादन से जुड़े मजदूरों, छंटाई करने वाले कामगारों और अन्य सहायक गतिविधियों में लगे करीब 5 हजार लोगों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है। यदि उत्पादन आधा रह जाता है, तो इन लोगों के लिए काम के अवसर भी काफी कम हो जाएंगे।
बीज उत्पादन में कमी का असर बाजार पर भी साफ दिख सकता है। स्थानीय स्तर पर बीज की उपलब्धता घटने से कीमतों में उछाल आने की आशंका है। अब तक किसान खुद बीज तैयार कर लागत को कम रखते थे, लेकिन इस बार उन्हें बाहरी बाजार से महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ सकता है। इससे खेती की कुल लागत बढ़ेगी और मुनाफा घटेगा।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर अगले सीजन की बुवाई पर भी पड़ेगा। बीज की कमी के कारण गाजर की खेती का रकबा घट सकता है, जिससे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।
किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से मदद की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए, रोग नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय उपलब्ध कराए जाएं और सस्ते दरों पर बीज की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही, मौसम आधारित बीमा योजनाओं और फसल सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, जोधपुर का गाजर बीज संकट केवल एक फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय, रोजगार और पूरे कृषि तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो इस संकट को अवसर में बदला जा सकता है, अन्यथा इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

