C. P. Radhakrishnan ने IIMT University Meerut के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवाओं से अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को राष्ट्र निर्माण के साथ जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने की नई शुरुआत है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि का भारत तेज़ी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और यह समय अवसरों से भरा हुआ है। उन्होंने इसे देश के इतिहास का एक निर्णायक चरण बताते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे और विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व पहलें हो रही हैं, जो युवाओं के लिए नए रास्ते खोल रही हैं।
इस संदर्भ में उन्होंने Narendra Modi द्वारा हाल ही में उद्घाटित नमो भारत ट्रेन और मेरठ मेट्रो का उल्लेख किया और कहा कि ये आधुनिक, कुशल और टिकाऊ कनेक्टिविटी के प्रतीक हैं। इससे शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का मिशन है। इसे साकार करने में युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के विजन को इस परिवर्तनकारी यात्रा का आधार बताया।
स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें केवल नौकरी पाने तक सीमित न रहने, बल्कि रोजगार सृजनकर्ता बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवा नवाचार को अपनाएं, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा दें और स्वदेशी समाधानों के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करें।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समावेशी होना चाहिए, जो हर गांव और हर व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सत्यनिष्ठा, अनुशासन और सेवा के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें।
समारोह में उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि शैक्षणिक उत्कृष्टता में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने इसे सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संकेत बताते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति आने वाले समय में एक अधिक समावेशी और प्रगतिशील भारत के निर्माण में सहायक होगी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री Dharampal Singh, राज्यसभा सांसद Laxmikant Bajpai, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार क्षमता का उपयोग राष्ट्र की प्रगति में करें, ताकि 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार हो सके।

