कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों के उपयोग, नियमन और सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावित पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025 को लेकर CropLife India ने एक विस्तृत मीडिया संवाद आयोजित किया। इस संवाद का उद्देश्य बिल के विभिन्न प्रावधानों पर उद्योग का दृष्टिकोण सामने रखना और यह बताना था कि किस तरह एक संतुलित, वैज्ञानिक और पारदर्शी नियामक ढांचा देश की कृषि व्यवस्था को मजबूत बना सकता है।
मीडिया संवाद के दौरान CropLife India ने अपने प्रस्तुतीकरण में कई अहम सिफारिशें रखीं, जिनमें नियामक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण, वैज्ञानिक मूल्यांकन, डेटा सुरक्षा और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कीटनाशकों की बिक्री के स्पष्ट नियम शामिल हैं। संस्था का मानना है कि यदि इन सुझावों को बिल में शामिल किया जाता है, तो इससे न केवल किसानों को सुरक्षित और प्रभावी उत्पाद मिलेंगे, बल्कि उद्योग में नवाचार और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
नियामक डेटा सुरक्षा पर जोर
CropLife India ने अपने प्रस्तुतिकरण में कहा कि नए कीटनाशकों के पंजीकरण के दौरान कंपनियां बड़े पैमाने पर सुरक्षा, प्रभावशीलता और पर्यावरणीय प्रभाव से जुड़ा डेटा तैयार करती हैं। ऐसे में इस डेटा की सुरक्षा बेहद जरूरी है। संस्था ने सुझाव दिया कि नए उत्पादों के लिए कम से कम पांच वर्षों का डेटा प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क लागू किया जाए, ताकि अन्य कंपनियां बिना अनुमति उस डेटा का उपयोग न कर सकें।
इस कदम से अनुसंधान और विकास (R&D) को प्रोत्साहन मिलेगा और कंपनियां नई तकनीकों में निवेश करने के लिए प्रेरित होंगी।
अस्थायी पंजीकरण और वैज्ञानिक मूल्यांकन
मीडिया संवाद में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन केवल वास्तविक आपात स्थितियों में ही सीमित समय के लिए दिया जाना चाहिए। CropLife India ने कहा कि यह पूर्ण वैज्ञानिक मूल्यांकन का विकल्प नहीं बनना चाहिए।
साथ ही संस्था ने जोर दिया कि किसी भी कीटनाशक के प्रतिबंध, समीक्षा या वापसी का निर्णय एक मजबूत वैज्ञानिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए, जिसमें विशेषज्ञों की राय और तय समयसीमा शामिल हो।
लैब मान्यता और थर्ड-पार्टी ऑडिट
CropLife India ने प्रमाणित प्रयोगशालाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि निजी और सरकारी दोनों तरह की लैब्स को मान्यता मिलनी चाहिए, लेकिन उनकी निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियमित थर्ड-पार्टी ऑडिट जरूरी है।
इससे परीक्षण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।
डिजिटल सिस्टम और पारदर्शिता
संस्था ने बिल में प्रस्तावित डिजिटलीकरण का स्वागत किया। पंजीकरण, लाइसेंसिंग, निरीक्षण और रिकॉर्ड-कीपिंग की प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने से पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ेगी।
हालांकि, CropLife India ने यह भी सुझाव दिया कि इन प्रक्रियाओं में स्पष्ट समयसीमा और एकरूपता होनी चाहिए, ताकि उद्योग और नियामकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
ई-कॉमर्स पर स्पष्ट नियमों की जरूरत
मीडिया संवाद में एक महत्वपूर्ण मुद्दा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीटनाशकों की बिक्री का भी रहा। CropLife India ने कहा कि वर्तमान ड्राफ्ट बिल में इस विषय पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है।
संस्था ने सिफारिश की कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लाइसेंसधारी विक्रेताओं का सत्यापन, उत्पाद ट्रेसबिलिटी, डिजिटल लेनदेन का रिकॉर्ड और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
इसके लिए बिल में एक अलग अध्याय जोड़ने का सुझाव भी दिया गया।
आपातकालीन प्रावधानों में सुधार
CropLife India ने बिल के आपातकालीन प्रतिबंध प्रावधानों पर भी अपने सुझाव दिए। संस्था ने कहा कि किसी कीटनाशक पर अस्थायी प्रतिबंध अधिकतम 60 से 120 दिनों के भीतर वैज्ञानिक समीक्षा के साथ तय होना चाहिए।
लंबे समय तक अनिश्चितता बनाए रखना न तो किसानों के हित में है और न ही उद्योग के लिए उचित है।
जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने की मांग
संस्था ने यह भी सुझाव दिया कि कीटनाशक निरीक्षकों और विश्लेषकों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए। इसके लिए अन्य कानूनों जैसे फूड सेफ्टी और ड्रग्स एक्ट की तर्ज पर प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।
इसके अलावा, कंपनियों में जिम्मेदार व्यक्तियों की स्पष्ट पहचान तय करने की भी जरूरत बताई गई, ताकि किसी उल्लंघन की स्थिति में जवाबदेही तय की जा सके।
वैज्ञानिक और समान मानक जरूरी
CropLife India ने जोर देकर कहा कि सभी प्रकार के कीटनाशक—चाहे वे रासायनिक हों या जैविक—एक समान वैज्ञानिक मानकों के तहत मूल्यांकित होने चाहिए। इससे गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित होगी।
संस्था ने यह भी कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की भूमिका को मजबूत किया जाना चाहिए।
किसानों और कृषि क्षेत्र पर असर
CropLife India के अनुसार, यदि इन सिफारिशों को अपनाया जाता है, तो इसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। उन्हें सुरक्षित, प्रभावी और उच्च गुणवत्ता वाले कीटनाशक मिल सकेंगे, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और जोखिम कम होगा।
इसके अलावा, बेहतर नियामक ढांचे से कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और भारत वैश्विक स्तर पर एग्रीटेक और कृषि नवाचार में मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगा।
CropLife India का दृष्टिकोण
संस्था ने अपने बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह 17 अनुसंधान-आधारित फसल संरक्षण कंपनियों का एक संघ है, जो भारत के लगभग 70% कीटनाशक बाजार का प्रतिनिधित्व करता है।
CropLife India का लक्ष्य टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना और किसानों को सुरक्षित व प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना है।
कुल मिलाकर, पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025 पर आयोजित यह मीडिया संवाद कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CropLife India की सिफारिशें यह संकेत देती हैं कि उद्योग एक संतुलित, पारदर्शी और वैज्ञानिक नियामक ढांचे की मांग कर रहा है।
यदि सरकार इन सुझावों पर विचार करती है, तो यह न केवल किसानों और उद्योग के लिए लाभकारी होगा, बल्कि भारत की कृषि व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

