देश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है. सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 13,000 करोड़ रुपये तक का ब्याज-मुक्त कैपेक्स कर्ज देने जा रही है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी AgriStack का तेजी से विस्तार किया जा सके. इस पहल का उद्देश्य किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से पहुंचाना, पारदर्शिता बढ़ाना और सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है.
नई व्यवस्था के तहत किसान रजिस्ट्र्री (Farmer ID) और डिजिटल क्रॉप सर्वे को लागू करने पर विशेष जोर दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि जब किसानों का एक यूनिक डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा, तो योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचेगा और बीच में होने वाली गड़बड़ियों या लीकेज को काफी हद तक रोका जा सकेगा. इससे न सिर्फ किसानों को फायदा होगा, बल्कि कृषि प्रशासन भी ज्यादा सटीक और जवाबदेह बनेगा.
रिपोर्ट के अनुसार, यह फंडिंग वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को दिए जाने वाले कुल 2 लाख करोड़ रुपये के कैपेक्स कर्ज का हिस्सा है. खास बात यह है कि यह राशि राज्यों को तभी मिलेगी, जब वे तय सुधारों को लागू करेंगे और उनकी प्रगति का सत्यापन होगा. यानी अब फंडिंग पूरी तरह प्रदर्शन आधारित होगी, जिससे राज्यों को डिजिटल सुधारों को तेजी से लागू करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.
इस योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये खास तौर पर AgriStack के प्रमुख उपयोगों पर खर्च किए जाएंगे. इसमें 5,000 करोड़ रुपये उर्वरक वितरण प्रणाली को डिजिटल बनाने के लिए निर्धारित किए गए हैं, ताकि खाद की सप्लाई पारदर्शी और समय पर हो सके. वहीं, 4,000 करोड़ रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत खरीद प्रक्रिया को सुधारने में लगाए जाएंगे, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य आसानी से मिल सके.
इसके अलावा 500 करोड़ रुपये उत्पादन आकलन के लिए और 500 करोड़ रुपये फसल बीमा योजनाओं के एकीकरण पर खर्च किए जाएंगे. इससे फसल बीमा दावों की प्रक्रिया सरल और तेज होगी. खासकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के साथ डिजिटल इंटीग्रेशन से दावों का निपटान पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा.
सरकार ने राज्यों को Farmer ID के आधार पर चार श्रेणियों में बांटने की भी योजना बनाई है. इससे राज्यों के प्रदर्शन के अनुसार उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा और बेहतर काम करने वाले राज्यों को अधिक लाभ मिल सकेगा. साथ ही, जो राज्य अभी पीछे हैं, उन्हें भी इस डिजिटल ढांचे से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा.
कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय कृषि को डिजिटल युग में ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि पूरे कृषि तंत्र को आधुनिक, पारदर्शी और अधिक भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।

