जयपुर में आयोजित 23वें कैंसर उत्तरजीवी दिवस समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कैंसर से जंग जीतने वाले लोगों को “सच्चे योद्धा” बताते हुए उनके साहस, धैर्य और जिजीविषा को सलाम किया। भगवान महावीर कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अटूट आशा और मानवीय साहस का उत्सव है।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कैंसर के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में हर साल लगभग 15 लाख नए कैंसर मामले सामने आते हैं। उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों का उल्लेख किया और बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को दूर करने में अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत अब तक 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 68 लाख से ज्यादा कैंसर उपचार किए जा चुके हैं, जिनमें करीब 75 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना वंचित और दूरदराज़ आबादी तक गंभीर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में प्रभावी साबित हो रही है।
उन्होंने आगे बताया कि देशभर के जिला अस्पतालों में डे-केयर कैंसर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 450 से अधिक पहले ही कार्यरत हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्रारंभिक जांच और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे कैंसर के शीघ्र निदान और उपचार को बढ़ावा मिल रहा है।
निवारक स्वास्थ्य पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से लड़ने के लिए शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस पहल का लक्ष्य एक करोड़ से अधिक लड़कियों को कवर करना है और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राजस्थान सरकार के प्रयास सराहनीय हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि जागरूकता और समय पर जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से धूम्रपान, तंबाकू सेवन, नशीले पदार्थों और अस्वास्थ्यकर खानपान से दूर रहने की अपील की, क्योंकि जीवनशैली में सुधार से कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने कैंसर संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय और ज्ञान साझा करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका मानना है कि यदि देशभर के अस्पताल नवीनतम तकनीक और शोध को साझा करें, तो उपचार के परिणाम बेहतर होंगे और अधिक लोगों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंच सकेंगी।
कैंसर से बचे लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनकी कहानियां न केवल प्रेरणा देती हैं, बल्कि यह संदेश भी देती हैं कि इस बीमारी से लड़ाई जीती जा सकती है। उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों और देखभाल करने वालों के समर्पण और करुणा के लिए भी आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में अस्पताल द्वारा किए जा रहे जागरूकता अभियानों—जैसे स्क्रीनिंग कैंप, मोबाइल मेडिकल यूनिट, नुक्कड़ नाटक और शैक्षिक कार्यक्रमों—की भी सराहना की गई, जो लोगों को समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने समाज से अपील की कि कैंसर के खिलाफ यह लड़ाई सामूहिक होनी चाहिए और “कोई भी व्यक्ति इस बीमारी से अकेले न लड़े।” उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसा समाज बनाना होगा, जहां डर नहीं बल्कि उम्मीद की जीत हो।
इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसानराव बागडे, स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और कैंसर से जंग जीतने वाले लोगों को सम्मानित किया गया।

