देश में प्रस्तावित पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल 2025 (PMB 2025) को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग के प्रतिनिधि संगठन Pesticides Manufacturers and Formulators Association of India ने बिल में एग्रोकेमिकल्स के लिए 5 वर्षों के “रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन” प्रावधान को शामिल किए जाने का कड़ा विरोध किया है।
PMFAI का कहना है कि कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) और आयातक लॉबी पेटेंट अवधि समाप्त होने के बाद भी डेटा सुरक्षा (Data Protection) का लाभ लेने के लिए दबाव बना रही हैं, जो घरेलू उद्योग के हितों के खिलाफ है। संगठन ने इसे “अनुचित और असंतुलित” कदम बताते हुए सरकार से स्पष्ट रूप से इस प्रावधान को बिल से बाहर रखने की अपील की है।
इस संबंध में PMFAI ने 27 अप्रैल 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। अपने पत्र में संगठन ने कहा है कि यदि एग्रोकेमिकल्स के लिए डेटा एक्सक्लूसिविटी या डेटा प्रोटेक्शन लागू किया जाता है, तो इससे देश में जेनेरिक (Generic) उत्पादों के विकास और उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
PMFAI का तर्क है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में किसानों को सस्ती और प्रभावी फसल सुरक्षा उत्पादों की आवश्यकता होती है। यदि डेटा प्रोटेक्शन लागू किया जाता है, तो घरेलू कंपनियां नए उत्पादों को बाजार में लाने में बाधाओं का सामना करेंगी, जिससे प्रतिस्पर्धा कम होगी और उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर किसानों की लागत पर पड़ेगा।
संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि संसद की स्थायी समिति (कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण) पहले ही इस तरह के प्रावधानों के खिलाफ अपनी सिफारिश दे चुकी है। इसके बावजूद, कुछ लॉबी समूहों द्वारा इस मुद्दे पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जो नीति निर्माण की पारदर्शिता और संतुलन पर सवाल खड़े करता है।
PMFAI ने अपने प्रतिनिधित्व में यह भी स्पष्ट किया कि डेटा प्रोटेक्शन की व्यवस्था पेटेंट प्रणाली से अलग है और इसे लागू करने से “डबल प्रोटेक्शन” जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यानी, एक ही उत्पाद को पहले पेटेंट के माध्यम से और बाद में डेटा प्रोटेक्शन के जरिए अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा, जो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांत के खिलाफ है।
इस मुद्दे को लेकर संगठन ने केवल कृषि मंत्री ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री, वाणिज्य मंत्री, रसायन एवं उर्वरक मंत्री और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी अपने विचारों से अवगत कराया है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम विधेयक किसानों और घरेलू उद्योग दोनों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद भारत में कृषि नीति और उद्योग हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है। जहां एक ओर नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए किफायती समाधान उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल 2025 में डेटा प्रोटेक्शन का मुद्दा अब एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन चुका है। आने वाले समय में सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है, यह न केवल एग्रोकेमिकल उद्योग बल्कि देश के करोड़ों किसानों के भविष्य को भी प्रभावित करेगा।


