देशभर में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) द्वारा संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर एक व्यापक और प्रभावशाली जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान न केवल किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक कर रहा है, बल्कि मिट्टी की सेहत सुधारने, फसल उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
29 अप्रैल 2026 तक इस अभियान के तहत देशभर में 3.53 लाख से अधिक किसानों तक सीधा संपर्क स्थापित किया जा चुका है। आईसीएआर द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों—जैसे जागरूकता शिविर, संगोष्ठियां, फील्ड डे, हार्वेस्ट डे और एक्सपोजर विजिट—के माध्यम से किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कुल 5600 से अधिक कार्यक्रमों के जरिए 2.79 लाख किसानों को सीधे जोड़ा गया, जो इस अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।
किसानों के वैज्ञानिक ज्ञान को और मजबूत करने के लिए 1716 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें संतुलित, वैकल्पिक और एकीकृत उर्वरक उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। इन प्रशिक्षणों से 51,625 प्रतिभागियों को लाभ मिला। इसके साथ ही 3860 प्रदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से हरी खाद, जैव उर्वरक और अन्य जैविक स्रोतों के उपयोग को व्यवहारिक रूप में प्रदर्शित किया गया, जिससे किसानों को पोषक तत्व प्रबंधन के बेहतर तरीके समझने में मदद मिली।
जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए देशभर में 6813 बैनर और होर्डिंग्स लगाए गए, जिससे अधिक से अधिक किसानों तक संदेश पहुंच सके। इसके अलावा 2978 इनपुट डीलरों को भी इस अभियान से जोड़ा गया, ताकि वे किसानों को जिम्मेदार और संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित कर सकें।
ग्राम स्तर पर भी इस अभियान को मजबूती दी गई है। 4166 पंचायती राज प्रतिनिधियों—जिनमें वर्तमान और पूर्व सरपंच, जिला परिषद सदस्य तथा एफपीओ, एसएचजी और एफआईजी से जुड़े सदस्य शामिल हैं—को ‘सरपंच सम्मेलनों’ के माध्यम से जागरूक किया गया। इन प्रतिनिधियों को उर्वरकों के साथ जैविक संसाधनों के समन्वित उपयोग की जानकारी दी गई, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को प्रेरित कर सकें।
इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने में जनप्रतिनिधियों की भी अहम भूमिका रही है। 33 से अधिक वीआईपी—जिनमें मंत्री, सांसद और विधायक शामिल हैं—ने अपने संदेशों के माध्यम से किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने के लिए प्रेरित किया। वहीं, 612 रेडियो और सामुदायिक रेडियो कार्यक्रमों तथा 129 टीवी और डिजिटल कार्यक्रमों के जरिए भी इस विषय पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी इस अभियान में प्रभावी उपयोग किया गया है। व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए आईसीएआर ने 85.33 लाख से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच बनाई है, जिससे यह अभियान तेजी से जन-जन तक पहुंच रहा है।
आईसीएआर का यह प्रयास देश में टिकाऊ और वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संतुलित उर्वरक उपयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में वृद्धि भी सुनिश्चित होती है। यह अभियान आने वाले समय में भारतीय कृषि को अधिक सशक्त और स्थायी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
