भारत की कृषि व्यवस्था में बीज सिर्फ एक शुरुआत भर नहीं, बल्कि पूरी फसल की सफलता की बुनियाद होता है। समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है, जहाँ अब परंपरागत ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक नवाचार भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी बदलते परिदृश्य को समझने के लिए ‘फसल क्रांति’ की पत्रकार फिजा काज़मी ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत पूसा स्थित बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संभाग के प्रधान वैज्ञानिक और विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्रा से खास बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस संवाद के प्रमुख अंश…
प्रश्न 1: बीज विज्ञान और प्रौद्योगिकी डिविजन, आईसीएआर पूसा किस प्रकार कार्य कर रहा है?
बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संभाग का कार्य तीन प्रमुख आयामों—अनुसंधान, विस्तार और शिक्षा—पर आधारित है। अनुसंधान के अंतर्गत वैज्ञानिक किसानों की आवश्यकताओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों का विकास करते हैं। विस्तार गतिविधियों के माध्यम से इन तकनीकों को खेत स्तर तक पहुंचाया जाता है, ताकि किसान सीधे इनका लाभ उठा सकें। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में मास्टर्स और पीएचडी के विद्यार्थी शोध कार्य कर रहे हैं और भविष्य की कृषि को नई दिशा देने में योगदान दे रहे हैं। वर्ष 1968 में स्थापित इस संभाग में वर्तमान में लगभग 50 शोधार्थी पीएचडी कर रहे हैं। हाल के वर्षों में विभाग का विशेष ध्यान सीड एन्हांसमेंट तकनीक पर केंद्रित है, जिसके अंतर्गत बीजों पर कोटिंग कर उनकी गुणवत्ता, भंडारण क्षमता और उत्पादकता को बेहतर बनाया जा रहा है।
प्रश्न 2: बीजों की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह संभाग क्या प्रयास कर रहा है?
बीजों की गुणवत्ता सुधारना इस संभाग की प्राथमिकता में शामिल है। किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या बीजों का लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण है, क्योंकि अधिक समय तक स्टोर करने पर बीजों की गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए विभाग ने “स्पीडी सीड किट” विकसित की है, जिसकी सहायता से मात्र 4-5 घंटे में बीज की गुणवत्ता की जांच की जा सकती है। इसके अलावा, दलहनी फसलों के बीजों में अधिक प्रोटीन होने के कारण कीट प्रकोप की संभावना रहती है। इस समस्या के समाधान के लिए विभाग ने “ब्रू-गार्ड” नामक विशेष लेप विकसित किया है, जिसका उपयोग बीज कोटिंग में किया जाता है। यह लेप बीजों को कीटों से सुरक्षित रखता है और उनकी गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है।
प्रश्न3 : बीजों का चयन करते समय किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
बीजों का चयन करते समय किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि वे बीज के स्रोत पर विशेष ध्यान दें। उन्हें हमेशा प्रमाणित संस्थानों या विश्वसनीय कंपनियों से ही बीज खरीदना चाहिए, क्योंकि खुले बाजार से खरीदे गए बीज कई बार अपेक्षित परिणाम नहीं देते और इसका सीधा प्रभाव उत्पादन पर पड़ता है। इसके साथ ही, किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार विकसित किस्मों का ही चयन करना चाहिए, क्योंकि कई बीज किस्में विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के लिए तैयार की जाती हैं। एक बार गलत बीज का चयन करने से उसका असर पूरी फसल पर पड़ सकता है, इसलिए यह निर्णय बेहद सावधानी से लेना चाहिए।
प्रश्न4 : किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए विभाग क्या कदम उठा रहा है?
कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाने पर काम कर रहा है। इसी दिशा में क्यूआर कोड आधारित प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसके तहत भविष्य में बाजार में उपलब्ध प्रत्येक बीज पैकेट पर क्यूआर कोड अनिवार्य होगा। इस कोड को स्कैन करने पर बीज से संबंधित पूरी जानकारी—जैसे उसका स्रोत, उत्पादन प्रक्रिया और उपयोग—किसानों को तुरंत उपलब्ध हो सकेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसानों तक केवल प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीज ही पहुंचें। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले एक-दो वर्षों में ऐसी व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी जाए, जिससे खराब बीजों की आपूर्ति को रोका जा सके।
प्रश्न5 : ‘फसल क्रांति’ के संदर्भ में आप किसानों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि वे जागरूक और सजग रहें। उन्हें हमेशा उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीजों का ही चयन करना चाहिए और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित उन्नत किस्मों को अपनाना चाहिए। इसके साथ ही, अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार फसल का चयन करना भी जरूरी है। सही बीज का चुनाव ही बेहतर उत्पादन, अधिक आय और टिकाऊ खेती की दिशा में पहला कदम है। बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे ये नवाचार भारतीय कृषि को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का यह प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत बना रहा है।

