पंजाब में कथित GMADA (ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) लाइसेंस घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाया है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच को तेज करते हुए ED ने पंजाब और हरियाणा में 12 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीतिक और कारोबारी गलियारों में हलचल मच गई है।
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई GMADA द्वारा जारी किए गए रियल एस्टेट और कॉलोनी लाइसेंसों में कथित अनियमितताओं से जुड़ी हुई है। जांच एजेंसी को शक है कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर बड़े स्तर पर आर्थिक गड़बड़ियां की गईं। आरोप है कि कुछ बिल्डरों और अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों और अवैध लेनदेन के जरिए करोड़ों रुपये का खेल किया गया।
ED की टीमों ने मोहाली, चंडीगढ़, लुधियाना और पंचकूला समेत कई शहरों में दबिश दी। बताया जा रहा है कि जिन ठिकानों पर रेड हुई, उनमें रियल एस्टेट कारोबारियों, बिचौलियों और कुछ पूर्व अधिकारियों से जुड़े परिसर शामिल हैं। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक डिटेल और संपत्ति से जुड़े कागजात जब्त किए गए हैं।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि लाइसेंस जारी करने के बदले किस स्तर तक रिश्वत और अवैध धन का लेनदेन हुआ। ED अब इस मामले में धन के स्रोत, फर्जी कंपनियों और हवाला नेटवर्क की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह घोटाला करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।
सूत्रों के अनुसार, ED को शुरुआती जांच में कई संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन और संपत्तियों के लेनदेन के सुराग मिले हैं। इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। एजेंसी की नजर अब उन लोगों पर भी है जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के जरिए पैसे को सफेद करने की कोशिश की।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला गर्माने लगा है। विपक्ष ने इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताते हुए सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। हालांकि ED का कहना है कि उसकी जांच पूरी तरह सबूतों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर आगे बढ़ रही है।
फिलहाल ED की टीमें जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डाटा की जांच में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े नामों से पूछताछ हो सकती है। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो पंजाब के रियल एस्टेट सेक्टर में यह अब तक के बड़े घोटालों में से एक माना जा सकता है।

