MSP Procurement: केंद्र सरकार ने किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिलाने के लिए अब सख्त रुख अपना लिया है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी किसान को अपनी उपज MSP से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए. इसी उद्देश्य से कृषि भवन में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) के अधिकारियों को तेज और लक्ष्य आधारित खरीद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.
बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि फसलों की सरकारी खरीद को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने का मिशन है. उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जिन इलाकों में बाजार भाव MSP से नीचे चल रहे हैं और खरीद की गति धीमी है, वहां तुरंत सुधार किया जाए. मंत्री ने जिला स्तर तक खरीद लक्ष्य तय करने, संभावित आवक का अनुमान लगाने और खरीद क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए.
सरकार ने इस बार दलहन और तिलहन फसलों पर विशेष फोकस करने का फैसला किया है. खास तौर पर चना, मसूर, उड़द और सरसों की खरीद को प्राथमिकता देने को कहा गया है. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन राज्यों या जिलों में किसानों को इन फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा है, वहां तुरंत प्रभाव से सरकारी खरीद अभियान तेज किया जाए. इसके अलावा उपार्जन केंद्रों की संख्या बढ़ाने, उनकी क्षमता सुधारने और स्थानीय स्तर पर आने वाली दिक्कतों की रोजाना समीक्षा करने को भी कहा गया.
बैठक में किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खरीद के बाद किसानों को भुगतान में देरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि खरीद के अधिकतम 72 घंटे के भीतर किसानों के खातों में भुगतान पहुंच जाना चाहिए. इसके लिए एक स्पष्ट और प्रभावी SOP तैयार करने तथा राज्यों के साथ समन्वय बनाकर इसे लागू करने को कहा गया.
सरकार का मानना है कि MSP व्यवस्था को मजबूत करने से किसानों की आय बढ़ेगी और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिलेगी. पिछले कुछ समय से कई राज्यों में दलहन और तिलहन फसलों के बाजार भाव MSP से नीचे जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं. ऐसे में केंद्र सरकार का यह कदम किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि NAFED और NCCF मिशन मोड में खरीद बढ़ाते हैं और समय पर भुगतान सुनिश्चित होता है, तो किसानों का भरोसा सरकारी खरीद व्यवस्था पर और मजबूत होगा. इससे कृषि क्षेत्र में स्थिरता आने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो सकती है.

