• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
Advertisement
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

जैव उर्वरक से भारत में 40% तक घट सकता है कृषि उत्सर्जन

जैव उर्वरक के उपयोग से भारत में कृषि उत्सर्जन 40% तक घट सकता है। FAI ने टिकाऊ खेती और मिट्टी सुधार का बड़ा समाधान बताया।

Emran Khan by Emran Khan
May 13, 2026
in कृषि समाचार
0
जैव उर्वरक से भारत में 40% तक घट सकता है कृषि उत्सर्जन
0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

जैव उर्वरक से भारत में 40% तक घट सकता है कृषि उत्सर्जन

जैव उर्वरक आज भारत की टिकाऊ खेती और जलवायु-अनुकूल कृषि का सबसे बड़ा समाधान बनकर उभर रहे हैं। कृषि क्षेत्र में बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और मिट्टी की घटती उर्वरता के बीच विशेषज्ञ अब जैव उर्वरकों को भविष्य की खेती का मजबूत आधार मान रहे हैं।

हाल ही में The Fertiliser Association of India (FAI) के महानिदेशक डॉ. एस.के. चौधरी ने कहा कि यदि भारत अपनी पोषक तत्व जरूरत का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा भी जैव उर्वरकों से पूरा कर ले, तो कृषि क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 40 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

इसके अलावा, जैव उर्वरक किसानों की लागत कम करने, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

 

 

 

जैव उर्वरक क्या हैं और क्यों हैं जरूरी?

जैव उर्वरक ऐसे प्राकृतिक उत्पाद होते हैं जिनमें लाभकारी सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं। ये सूक्ष्मजीव मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाते हैं और पौधों की वृद्धि को बेहतर बनाते हैं।

हालांकि रासायनिक उर्वरक तुरंत असर दिखाते हैं, लेकिन लंबे समय तक उनका अत्यधिक उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी ओर, जैव उर्वरक मिट्टी की जैविक सक्रियता बढ़ाते हैं और खेती को अधिक टिकाऊ बनाते हैं।

जैव उर्वरकों के प्रमुख प्रकार

  • नाइट्रोजन फिक्सिंग बैक्टीरिया
  • फॉस्फेट घुलनशील सूक्ष्मजीव
  • माइकोराइजा फंगस
  • पोटाश मोबिलाइजिंग बैक्टीरिया
  • ब्लू-ग्रीन एल्गी

इसके अलावा, जैव उर्वरक मिट्टी की जल धारण क्षमता भी सुधारते हैं।

 

जैव उर्वरक से कैसे घटेगा कृषि उत्सर्जन?

कृषि क्षेत्र से निकलने वाली नाइट्रस ऑक्साइड गैस ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण मानी जाती है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से इसका उत्सर्जन तेजी से बढ़ता है।

डॉ. चौधरी के अनुसार, यदि किसान रासायनिक उर्वरकों के साथ संतुलित मात्रा में जैव उर्वरक अपनाएं, तो नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन में बड़ी कमी लाई जा सकती है।

कृषि उत्सर्जन घटाने में जैव उर्वरक की भूमिका

लाभ प्रभाव
रासायनिक उर्वरक की कम जरूरत उत्सर्जन में कमी
मिट्टी में सूक्ष्मजीव सक्रियता बेहतर पोषण
मिट्टी की उर्वरता बढ़ना स्थायी उत्पादन
जल प्रदूषण में कमी पर्यावरण संरक्षण

इसके परिणामस्वरूप खेती अधिक पर्यावरण-अनुकूल बन सकती है।

 

टिकाऊ खेती के लिए Integrated Nutrient Management जरूरी

FAI ने Integrated Nutrient Management (INM) को भविष्य की खेती के लिए सबसे वैज्ञानिक तरीका बताया है।

इस मॉडल में तीन चीजों का संतुलित उपयोग किया जाता है:

  • रासायनिक उर्वरक
  • जैव उर्वरक
  • जैविक पदार्थ

इसके अलावा, यह पद्धति मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखने में मदद करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 60 वर्षों के शोध से यह साबित हो चुका है कि संतुलित पोषण प्रबंधन ही टिकाऊ कृषि का आधार है।

 

भारत में जैव उर्वरक की बढ़ती जरूरत

भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उपभोक्ता देशों में शामिल है। हर साल बड़ी मात्रा में खनिज उर्वरकों का आयात किया जाता है।

हालांकि इससे किसानों पर लागत का बोझ बढ़ता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे भारतीय कृषि पर पड़ता है।

ऐसे में जैव उर्वरक भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकते हैं।

जैव उर्वरक अपनाने के बड़े फायदे

  • आयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम
  • किसानों की लागत में कमी
  • मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर
  • फसल उत्पादन में स्थिरता
  • पर्यावरण संरक्षण

इसके अलावा, जैव उर्वरक टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देते हैं।

 

किसानों को मिलेगा आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ

विशेषज्ञ मानते हैं कि जैव उर्वरक केवल पर्यावरण ही नहीं बचाते, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद कर सकते हैं।

किसानों के लिए प्रमुख लाभ

  1. लागत में कमी

रासायनिक उर्वरकों की खपत घटने से खेती की लागत कम होती है।

  1. मिट्टी की सेहत बेहतर

जैव उर्वरक मिट्टी में सूक्ष्मजीव गतिविधियां बढ़ाते हैं। इससे मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है।

  1. फसल उत्पादन में स्थिरता

मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होने से लंबे समय तक उत्पादन क्षमता बनी रहती है।

  1. जल संरक्षण

जैव उर्वरक मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद करते हैं।

इसके परिणामस्वरूप सूखे वाले क्षेत्रों में भी बेहतर खेती संभव हो सकती है।

 

उद्योग जगत के लिए FAI की तीन बड़ी सलाह

डॉ. एस.के. चौधरी ने उर्वरक उद्योग से तीन बड़े कदम उठाने की अपील की।

  1. उत्पादन क्षमता बढ़ाना

उन्होंने कहा कि जैव उर्वरकों की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगी। इसलिए निजी और सहकारी क्षेत्र को निवेश बढ़ाना चाहिए।

  1. गुणवत्ता बनाए रखना

हालांकि बाजार में कई निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद भी मौजूद हैं। इसलिए उत्पादन से लेकर किसानों तक पहुंचने तक गुणवत्ता नियंत्रण जरूरी है।

  1. क्षेत्र विशेष के अनुसार उत्पाद बनाना

जैव उर्वरक हर मिट्टी और हर क्षेत्र में समान तरीके से काम नहीं करते।

इसलिए मिट्टी, जलवायु और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार माइक्रोबियल फॉर्मूलेशन विकसित करना जरूरी है।

 

जलवायु परिवर्तन से निपटने में जैव उर्वरक की भूमिका

आज जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। लगातार बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और मिट्टी की गिरती गुणवत्ता किसानों की चिंता बढ़ा रही है।

ऐसे समय में जैव उर्वरक जलवायु-अनुकूल खेती का मजबूत विकल्प बन सकते हैं।

जैव उर्वरक क्यों हैं क्लाइमेट-स्मार्ट समाधान?

  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करते हैं
  • मिट्टी की कार्बन क्षमता बढ़ाते हैं
  • रासायनिक प्रदूषण घटाते हैं
  • टिकाऊ खेती को बढ़ावा देते हैं

इसके अलावा, जैव उर्वरक प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी मदद करते हैं।

 

सरकार भी दे रही है टिकाऊ खेती पर जोर

भारत सरकार लगातार प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है।

इसके तहत कई योजनाओं में संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी स्वास्थ्य सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और उद्योग मिलकर काम करें, तो भारत वैश्विक स्तर पर टिकाऊ कृषि मॉडल बन सकता है।

 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं जैव उर्वरक?

भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए जैव उर्वरक केवल एक विकल्प नहीं बल्कि भविष्य की जरूरत बनते जा रहे हैं।

क्योंकि बढ़ती आबादी के साथ खाद्य सुरक्षा बनाए रखना भी जरूरी है और पर्यावरण की रक्षा करना भी।

इसलिए आने वाले समय में जैव उर्वरकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

जैव उर्वरक भारत में टिकाऊ खेती और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। FAI के अनुसार यदि देश 20 प्रतिशत पोषक तत्व जरूरत भी जैव उर्वरकों से पूरी करे, तो कृषि उत्सर्जन में 40 प्रतिशत तक कमी संभव है।

इसके अलावा, यह तकनीक किसानों की लागत घटाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और आयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में भी मदद करेगी।

Overall, जैव उर्वरक भारत को जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन सकते हैं।

Previous Post

Pineapple Black Rot Disease कारण, लक्षण और बचाव के प्रभावी उपाय

Next Post

Prateek Yadav Died: कौन थे प्रतीक यादव, क्या था उनका पॉलिटिकल बैकग्राउंड और कैसे हुई मौत?

Next Post
prateek-yadav-died

Prateek Yadav Died: कौन थे प्रतीक यादव, क्या था उनका पॉलिटिकल बैकग्राउंड और कैसे हुई मौत?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Rashtriya Krishi Vikas Yojana: किसानों के लिए खेती से कमाई बढ़ाने वाली बड़ी योजना
  • Dasheri Mango बागवानी में सफलता के रहस्य वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण
  • Kisan Credit Card Scheme: किसानों के लिए आसान लोन और आर्थिक सहारा
  • Prateek Yadav Died: कौन थे प्रतीक यादव, क्या था उनका पॉलिटिकल बैकग्राउंड और कैसे हुई मौत?
  • जैव उर्वरक से भारत में 40% तक घट सकता है कृषि उत्सर्जन

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.