टिकाऊ और आधुनिक कृषि समाधान प्रदान करने वाली वैश्विक कंपनी UPL Limited ने भारत में अपने प्रमुख बायोस्टिमुलेंट उत्पाद Bioclassic® के लिए फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर (FCO) पंजीकरण हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि कंपनी के जैविक कृषि समाधान (Biologicals) पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगी तथा देशभर के किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का लाभ दिलाने में मददगार साबित होगी।
कंपनी ने बताया कि उसकी सहायक इकाई SWAL के माध्यम से यह पंजीकरण प्राप्त किया गया है। इसके बाद अब Bioclassic® को भारत के किसानों के लिए व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया जा सकेगा। कंपनी का मानना है कि यह कदम भारतीय कृषि में टिकाऊ खेती और जलवायु अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
वैज्ञानिक तकनीक से तैयार किया गया Bioclassic®
Bioclassic® को विशेष फर्मेंटेशन तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है। इसे एक सॉल्युबल कंसंट्रेट के रूप में तैयार किया गया है, जिसे फसल की वृद्धि अवस्था के दौरान बेहद कम मात्रा में दो बार उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
कंपनी के अनुसार यह उत्पाद पौधों में शाखाओं की वृद्धि, प्रकाश संश्लेषण क्षमता और पोषक तत्वों के संचय को बढ़ाने में मदद करता है। इसके उपयोग से पौधों की मजबूती बढ़ती है, फसलों पर मौसम और अन्य तनावों का प्रभाव कम होता है तथा उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में बदलते मौसम, बढ़ती गर्मी और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएं किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। ऐसे में बायोस्टिमुलेंट आधारित उत्पाद फसलों को प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ने में सहायता कर सकते हैं।
विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में सफल परीक्षण
UPL द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार Bioclassic® का विभिन्न जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों में फील्ड ट्रायल किया गया, जिसमें इसने बेहतर परिणाम दिए। कंपनी ने दावा किया कि यह उत्पाद खासतौर पर पौधों की सहनशक्ति बढ़ाने और फसल की समग्र गुणवत्ता सुधारने में प्रभावी साबित हुआ है।
Bioclassic® को पारंपरिक स्प्रेयर के माध्यम से आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं जहां अनुमति होगी, वहां इसे ड्रोन तकनीक के जरिए भी छिड़का जा सकेगा। कृषि क्षेत्र में ड्रोन के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह सुविधा किसानों के लिए आधुनिक खेती की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
किसानों की चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित उत्पाद
Ravishankar Cherukuri ने कहा कि भारतीय किसानों को अत्यधिक गर्मी, जलवायु परिवर्तन और कई राज्यों में क्षारीय मिट्टी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। Bioclassic® को इन्हीं वास्तविक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह पंजीकरण केवल एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जैविक उत्पाद भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ और मजबूत बना सकते हैं। कंपनी का लक्ष्य किसानों को ऐसे समाधान उपलब्ध कराना है जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हों।
टिकाऊ खेती को मिलेगा बढ़ावा
Anil Rohra ने बताया कि Bioclassic® कंपनी के ProNutiva® दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मॉडल पारंपरिक फसल सुरक्षा उत्पादों को आधुनिक जैविक समाधानों के साथ जोड़कर टिकाऊ खेती को बढ़ावा देता है।
उन्होंने कहा कि यह उत्पाद विशेष रूप से तिलहन, दलहन और सब्जियों की खेती में उपयोगी साबित हो सकता है। इसके जरिए पौधों की पोषक तत्व उपयोग क्षमता बेहतर होती है और लंबी अवधि तक फसल स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में जैविक और प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों की रुचि तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में वैज्ञानिक आधार वाले बायोस्टिमुलेंट उत्पाद कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकते हैं।
जैविक उत्पादों के पोर्टफोलियो का विस्तार
Bioclassic® के अलावा UPL को भारत में चार अन्य बायोस्टिमुलेंट उत्पादों — Opteine®, Gaxy, Macarena® और Pilatus® — के लिए भी पंजीकरण स्वीकृति प्राप्त हुई है। कंपनी ने इसे अपने बायोसॉल्यूशंस पोर्टफोलियो के बड़े विस्तार के रूप में देखा है।
इन उत्पादों के जरिए कंपनी का उद्देश्य किसानों को ऐसे समाधान उपलब्ध कराना है जो मिट्टी की सेहत सुधारें, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करें और फसल उत्पादकता को बेहतर बनाएं।
भारतीय कृषि में बढ़ रही जैविक समाधानों की भूमिका
भारत में लगातार बढ़ती जनसंख्या और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों के बीच टिकाऊ कृषि तकनीकों की मांग बढ़ रही है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे किसान अब वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल समाधानों की ओर रुख कर रहे हैं।
ऐसे समय में UPL जैसी कंपनियों द्वारा जैविक और विज्ञान आधारित कृषि उत्पादों का विकास भारतीय कृषि के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसानों को सही तकनीक, प्रशिक्षण और आधुनिक जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जाएं, तो खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।
UPL का यह नया कदम भारतीय कृषि क्षेत्र में जैविक समाधानों को नई गति देने के साथ-साथ किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


