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Agricultural Export Promotion Scheme: जानें क्या है किसानों के लिए पात्रकता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया

Agricultural Export Promotion Scheme: Eligibility, Benefits, and Application Process

Fiza by Fiza
July 11, 2026
in योजना
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Agricultural Export Promotion Scheme

Agricultural Export Promotion Scheme

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Agricultural Export Promotion Scheme: भारत कृषि उत्पादन के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। देश में अनाज, फल, सब्जियां, मसाले, चाय, कॉफी, दुग्ध उत्पाद, जैविक उत्पाद, बाजरा और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का बड़े स्तर पर उत्पादन होता है। हालांकि, अच्छी पैदावार होने के बावजूद हर किसान या कृषि उद्यम अंतरराष्ट्रीय बाजार तक नहीं पहुंच पाता।

इसके पीछे गुणवत्ता मानकों की जानकारी का अभाव, आधुनिक पैकहाउस की कमी, कोल्ड चेन की समस्या, महंगा परिवहन, प्रमाणन का खर्च और विदेशी खरीदारों से संपर्क न होना जैसे कई कारण हैं। इन्हीं बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से सरकार विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करती है।

सामान्य रूप से कृषि निर्यात संवर्धन योजना शब्द का प्रयोग कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA की वित्तीय सहायता योजनाओं, कृषि निर्यात नीति तथा अन्य निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रमों के लिए किया जाता है।

APEDA ने 15वें वित्त आयोग की अवधि के लिए Agriculture and Processed Foods Export Promotion Scheme लागू की थी। इसकी अवधि वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 निर्धारित थी। इस योजना में पंजीकृत निर्यातकों को तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहायता देने का प्रावधान था:

  1. निर्यात अवसंरचना का विकास
  2. गुणवत्ता विकास
  3. बाजार विकास

APEDA के अनुसार इस योजना का उद्देश्य कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को कम करना तथा भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना था।

महत्वपूर्ण अपडेट: APEDA की उपलब्ध योजना 2021-22 से 2025-26 की वित्तीय अवधि के लिए थी। जुलाई 2026 में नई परियोजना शुरू करने वाले आवेदकों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि पुराने नियम स्वतः जारी हैं। आवेदन से पहले APEDA की वर्तमान अधिसूचना, आवेदन विंडो और पात्र उत्पादों की सूची जांचना जरूरी है।

कृषि निर्यात संवर्धन योजना का उद्देश्य

कृषि निर्यात केवल विदेश में उत्पाद बेचने की प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए उत्पादन से लेकर पैकिंग, परीक्षण, प्रमाणन, भंडारण, दस्तावेजीकरण और परिवहन तक पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत बनाना पड़ता है।इस योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई कृषि उत्पादों की कीमत घरेलू बाजार की तुलना में अधिक हो सकती है। निर्यात व्यवस्था मजबूत होने पर किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि उद्यमियों को अधिक खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिलता है।

कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारना

प्रत्येक आयातक देश के अपने खाद्य सुरक्षा, कीटनाशक अवशेष, स्वच्छता, पैकेजिंग और लेबलिंग संबंधी नियम होते हैं। योजना के अंतर्गत गुणवत्ता परीक्षण और आवश्यक प्रणालियां विकसित करने पर जोर दिया जाता है।

फसल कटाई के बाद नुकसान कम करना

भारत में फल, सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को उचित ग्रेडिंग, प्री-कूलिंग, कोल्ड स्टोरेज और परिवहन की आवश्यकता होती है। आधुनिक अवसंरचना उपलब्ध होने से खराब होने वाली उपज का नुकसान कम किया जा सकता है।

मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना

कच्चा कृषि उत्पाद बेचने के बजाय उसकी सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग या प्रसंस्करण करके निर्यात करने पर अधिक मूल्य मिल सकता है। उदाहरण के लिए ताजे आम के साथ आम पल्प, अचार, सूखे आम और अन्य उत्पादों का बाजार विकसित किया जा सकता है।

नए विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाना

व्यापार मेले, खरीदार-विक्रेता बैठकें, उत्पाद प्रदर्शन और बाजार अध्ययन भारतीय निर्यातकों को नए देशों तथा खरीदारों तक पहुंचने में सहायता करते हैं।

किसान उत्पादक संगठनों को निर्यात से जोड़ना

छोटे किसान व्यक्तिगत रूप से निर्यात की मात्रा, गुणवत्ता और दस्तावेजी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाते। FPO के माध्यम से उत्पादन एकत्र करके निर्यात योग्य खेप तैयार करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

कृषि निर्यात संवर्धन योजना की मुख्य विशेषताएं

विशेषताविवरण
प्रमुख कार्यान्वयन संस्थाAPEDA, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
संबंधित योजना अवधि2021-22 से 2025-26
मुख्य क्षेत्रनिर्यात अवसंरचना, गुणवत्ता विकास और बाजार विकास
लक्षित लाभार्थीपंजीकृत निर्यातक और दिशा-निर्देशों में निर्धारित पात्र संस्थाएं
प्रमुख उत्पादकृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की अधिसूचित श्रेणियां
पंजीकरणसंबंधित उत्पाद के अनुसार APEDA RCMC की आवश्यकता हो सकती है
आवेदन का माध्यमAPEDA की संबंधित ऑनलाइन आवेदन प्रणाली
सहायता का स्वरूपपात्र गतिविधियों पर परियोजना आधारित वित्तीय सहायता
वर्तमान सावधानी2026 में नवीनतम अधिसूचना और आवेदन विंडो जांचना जरूरी

APEDA एक वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना APEDA Act, 1985 के अंतर्गत हुई थी। यह कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के विकास और निर्यात संवर्धन के लिए कार्य करती है।

कृषि निर्यात संवर्धन योजना के तीन प्रमुख घटक

1. निर्यात अवसंरचना का विकास

कृषि निर्यात में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक उपयुक्त आधारभूत संरचना की कमी है। खेत से निकलने वाले उत्पाद को विदेशी खरीदार तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है।

योजना का यह घटक निर्यात योग्य उत्पादों के लिए पोस्ट-हार्वेस्ट और प्रसंस्करण सुविधाओं को विकसित करने पर केंद्रित था।

इसके अंतर्गत उपयोगी सुविधाएं

  • आधुनिक पैकहाउस
  • सफाई और धुलाई लाइन
  • छंटाई एवं ग्रेडिंग मशीन
  • प्री-कूलिंग यूनिट
  • कोल्ड स्टोरेज
  • नियंत्रित तापमान वाली सुविधा
  • पैकेजिंग लाइन
  • फूड प्रोसेसिंग उपकरण
  • मेटल डिटेक्टर
  • एक्स-रे या स्क्रीनिंग सिस्टम
  • सॉर्टेक्स मशीन
  • खाद्य सुरक्षा सेंसर
  • निर्यात योग्य उत्पादों के लिए ट्रीटमेंट सुविधा
  • आयातक देश की फाइटोसैनिटरी आवश्यकता पूरी करने वाली तकनीक

इस घटक का मुख्य उद्देश्य उत्पाद खराब होने से होने वाले नुकसान को कम करना और निर्यात योग्य गुणवत्ता बनाए रखना था। APEDA के दिशा-निर्देशों में ताजा उपज और प्रसंस्कृत खाद्य, दोनों क्षेत्रों से संबंधित अवसंरचना को शामिल किया गया था।

किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ

अवसंरचना सहायता सामान्यतः प्रत्येक किसान के खेत पर व्यक्तिगत नकद अनुदान के रूप में नहीं दी जाती। इसका लाभ निर्यातक कंपनी, FPO, सहकारी संस्था, प्रसंस्करण इकाई या सामान्य सुविधा केंद्र के माध्यम से किसानों तक पहुंच सकता है।

पैकहाउस और कोल्ड चेन उपलब्ध होने पर किसान की उपज अधिक समय तक सुरक्षित रहती है। इससे जल्दबाजी में कम कीमत पर बिक्री करने का दबाव कम हो सकता है।

2. गुणवत्ता विकास

विदेशी बाजार में केवल आकर्षक उत्पाद होना पर्याप्त नहीं है। उत्पाद को आयातक देश के स्वास्थ्य, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी नियम भी पूरे करने पड़ते हैं।

कई देशों में निम्न विषयों पर कड़े मानक लागू होते हैं:

  • कीटनाशक अवशेष
  • अधिकतम अवशेष सीमा यानी MRL
  • सूक्ष्मजीव संदूषण
  • भारी धातुएं
  • मिलावट
  • उत्पाद की ट्रेसबिलिटी
  • पैकेजिंग सामग्री
  • स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा
  • पौध स्वास्थ्य प्रमाणपत्र
  • जैविक उत्पादन प्रमाणन

गुणवत्ता विकास के अंतर्गत संभावित गतिविधियां

  • प्रयोगशाला परीक्षण
  • खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली
  • गुणवत्ता प्रमाणन
  • उत्पाद ट्रेसबिलिटी
  • अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन
  • परीक्षण उपकरणों की स्थापना
  • प्रयोगशाला उन्नयन
  • पैकहाउस या इकाई का निरीक्षण
  • निर्यात उत्पादों के लिए तकनीकी अध्ययन
  • अवशेष निगरानी प्रणाली

गुणवत्ता सुधार में निवेश करने से निर्यात खेप अस्वीकार होने का जोखिम कम किया जा सकता है। इससे खरीदार का विश्वास भी बढ़ता है।

MRL का महत्व

MRL किसी कृषि उत्पाद में स्वीकार्य कीटनाशक अवशेष की अधिकतम कानूनी सीमा होती है। यह सीमा देश और उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है।

यदि कोई किसान निर्यात आपूर्ति शृंखला से जुड़ना चाहता है, तो उसे कीटनाशकों का प्रयोग खरीदार और आयातक देश के मानकों के अनुसार करना चाहिए। बिना सलाह के अत्यधिक या गलत रसायन का इस्तेमाल पूरी खेप को प्रभावित कर सकता है।

3. बाजार विकास

अच्छा उत्पाद तैयार होने के बाद सही खरीदार तक पहुंच बनाना अगली चुनौती है। इसी कारण कृषि निर्यात संवर्धन योजना में बाजार विकास को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।

बाजार विकास में शामिल प्रमुख गतिविधियां

  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी
  • विदेशी प्रदर्शनियों में उत्पाद प्रदर्शित करना
  • खरीदार-विक्रेता बैठक
  • बाजार सर्वेक्षण
  • उत्पाद प्रचार
  • ब्रांड निर्माण
  • पैकेजिंग डिजाइन
  • विदेशी बाजार की मांग का अध्ययन
  • व्यापार प्रतिनिधिमंडल
  • डिजिटल और भौतिक प्रचार सामग्री
  • नए निर्यात बाजारों की पहचान

APEDA समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और निर्यात कार्यक्रमों की जानकारी भी जारी करता है। इन कार्यक्रमों में भागीदारी से निर्यातकों को संभावित आयातकों, वितरकों और खुदरा कंपनियों से संपर्क करने का अवसर मिल सकता है।

किन कृषि उत्पादों को निर्यात किया जा सकता है?

APEDA के कार्यक्षेत्र में कई कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद आते हैं। संबंधित उत्पाद के निर्यात से पहले उसका HS Code, निर्यात नीति और APEDA अनुसूचित श्रेणी जांचना आवश्यक है।

प्रमुख श्रेणियों में शामिल हैं:

उत्पाद श्रेणीउदाहरण
अनाजबासमती चावल, गैर-बासमती चावल, गेहूं, मक्का
फलआम, अंगूर, केला, अनार, संतरा
सब्जियांप्याज, भिंडी, आलू, हरी मिर्च
प्रसंस्कृत खाद्यफल पल्प, अचार, सॉस, रेडी-टू-ईट उत्पाद
पशु उत्पादमांस और कुछ अन्य अधिसूचित उत्पाद
डेयरी उत्पादघी, दूध पाउडर, पनीर की पात्र श्रेणियां
जैविक उत्पादप्रमाणित जैविक अनाज, दाल, मसाले और फल
बाजरा उत्पादरागी, ज्वार, बाजरा और मूल्य संवर्धित उत्पाद
फूल एवं बीजकट फ्लावर, पौध सामग्री और कुछ बीज
मूंगफली और काजूकच्चे तथा प्रसंस्कृत उत्पाद
GI उत्पादविशिष्ट क्षेत्रीय पहचान वाले अधिसूचित उत्पाद

APEDA के उत्पाद कैटलॉग में अनाज, ताजे फल एवं सब्जियां, प्रसंस्कृत खाद्य, पशु उत्पाद, जैविक उत्पाद, मिलेट्स, काजू, मूंगफली, फूल, बीज और GI उत्पाद जैसी श्रेणियां उपलब्ध हैं।

किसी उत्पाद का APEDA के अंतर्गत होना यह गारंटी नहीं देता कि उसका निर्यात हर समय बिना प्रतिबंध के किया जा सकता है। प्याज, चावल, गेहूं, चीनी या अन्य संवेदनशील वस्तुओं की निर्यात नीति समय-समय पर बदल सकती है। अंतिम शिपमेंट से पहले DGFT की वर्तमान निर्यात नीति जांचना आवश्यक है।

कृषि निर्यात संवर्धन योजना के लिए पात्रता

योजना की पात्रता संबंधित घटक, परियोजना, उत्पाद और लागू अधिसूचना के अनुसार बदल सकती है। सामान्य रूप से निम्न संस्थाएं उपयुक्त दिशा-निर्देशों के अंतर्गत आवेदन कर सकती थीं:

  • APEDA के साथ पंजीकृत निर्यातक
  • कृषि निर्यात कंपनी
  • खाद्य प्रसंस्करण इकाई
  • किसान उत्पादक संगठन
  • किसान उत्पादक कंपनी
  • सहकारी संस्था
  • केंद्र या राज्य सरकार की पात्र एजेंसी
  • सरकारी या निजी क्षेत्र की सामान्य अवसंरचना संस्था
  • निर्यात से जुड़ी मान्यता प्राप्त इकाई
  • संबंधित दिशा-निर्देशों में शामिल अन्य संगठन

क्या सामान्य किसान सीधे आवेदन कर सकता है?

सिर्फ खेती करने वाला प्रत्येक किसान इस योजना में सीधे नकद सहायता पाने का पात्र नहीं माना जा सकता। APEDA की वित्तीय सहायता मुख्य रूप से निर्यात से संबंधित परियोजनाओं और पंजीकृत पात्र संस्थाओं के लिए तैयार की गई थी।

किसान निम्न तरीकों से इसका लाभ ले सकता है:

  1. किसी निर्यातक के साथ अनुबंध करके
  2. FPO से जुड़कर
  3. किसान उत्पादक कंपनी बनाकर
  4. निर्यात क्लस्टर में शामिल होकर
  5. APEDA पंजीकृत खरीदार को उपज बेचकर
  6. प्रमाणित जैविक समूह में शामिल होकर
  7. निर्यात के लिए निर्धारित उत्पादन प्रोटोकॉल अपनाकर

APEDA पंजीकरण और RCMC क्या है?

RCMC का अर्थ Registration-Cum-Membership Certificate है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात से जुड़ी कई गतिविधियों में संबंधित निर्यात संवर्धन परिषद या प्राधिकरण का RCMC आवश्यक हो सकता है।

APEDA से संबंधित उत्पादों के निर्यातकों को आवेदन से पहले निम्न तैयारियां करनी पड़ सकती हैं:

  • व्यवसाय का वैध गठन
  • PAN
  • बैंक खाता
  • Importer Exporter Code यानी IEC
  • GST पंजीकरण, जहां लागू हो
  • कंपनी, फर्म, सोसायटी या FPO के दस्तावेज
  • APEDA RCMC
  • प्रस्तावित उत्पाद और उसका HS Code
  • प्रसंस्करण या पैकिंग इकाई की जानकारी

RCMC के लिए वर्तमान प्रक्रिया DGFT की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था से जुड़ी हो सकती है। इसलिए पुराने वीडियो या अनौपचारिक वेबसाइटों पर निर्भर होने के बजाय DGFT तथा APEDA की नवीनतम प्रक्रिया देखनी चाहिए।

कृषि उत्पाद निर्यात शुरू करने की चरणबद्ध प्रक्रिया

चरण 1: सही उत्पाद का चयन करें

निर्यात के लिए केवल अधिक उत्पादन वाली फसल चुनना पर्याप्त नहीं है। निम्न बिंदुओं का अध्ययन करें:

  • किन देशों में उत्पाद की मांग है
  • संभावित निर्यात मूल्य
  • आयातक देश के गुणवत्ता मानक
  • परिवहन लागत
  • उत्पाद की शेल्फ लाइफ
  • प्रतिस्पर्धी देश
  • मौसमी मांग
  • निर्यात प्रतिबंध की स्थिति

चरण 2: बाजार अनुसंधान करें

APEDA के AgriExchange जैसे प्लेटफॉर्म पर अंतरराष्ट्रीय उत्पादन, कीमत, बाजार, आयात नियम और व्यापार संबंधी जानकारी उपलब्ध होती है। पोर्टल गुणवत्ता, पैकेजिंग, लेबलिंग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात दस्तावेजों पर मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।

चरण 3: व्यवसाय और IEC तैयार करें

व्यक्ति, फर्म, कंपनी, सहकारी संस्था या FPO के रूप में व्यवसाय की कानूनी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इसके बाद DGFT से IEC प्राप्त करना निर्यात प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है।

चरण 4: APEDA RCMC प्राप्त करें

यदि उत्पाद APEDA की अनुसूचित श्रेणी में आता है, तो लागू नियमों के अनुसार APEDA से पंजीकरण करना होगा।

चरण 5: उत्पादन प्रोटोकॉल बनाएं

किसानों के लिए खेत स्तर पर निम्न रिकॉर्ड तैयार करना उपयोगी है:

  • बीज या पौध सामग्री का स्रोत
  • बुवाई की तारीख
  • खाद और उर्वरक का रिकॉर्ड
  • कीटनाशक उपयोग का रिकॉर्ड
  • सिंचाई की जानकारी
  • कटाई की तारीख
  • खेत की पहचान
  • उत्पाद का बैच नंबर

चरण 6: गुणवत्ता परीक्षण कराएं

निर्यात से पहले आवश्यकतानुसार मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से अवशेष, सूक्ष्मजीव, नमी, भारी धातु या अन्य निर्धारित जांच करानी पड़ सकती है।

चरण 7: पैकेजिंग और लेबलिंग तैयार करें

पैकेजिंग ऐसी होनी चाहिए जो परिवहन के दौरान उत्पाद को सुरक्षित रखे और आयातक देश की कानूनी आवश्यकताएं पूरी करे।

लेबल पर आवश्यकतानुसार निम्न जानकारी हो सकती है:

  • उत्पाद का नाम
  • शुद्ध वजन
  • उत्पादन देश
  • बैच नंबर
  • पैकिंग तारीख
  • समाप्ति या उपयोग अवधि
  • निर्यातक का विवरण
  • भंडारण निर्देश
  • प्रमाणन चिह्न
  • पोषण संबंधी जानकारी

चरण 8: खरीदार और निर्यात अनुबंध तय करें

खरीदार की पहचान, भुगतान शर्त, मात्रा, गुणवत्ता, Incoterms, बीमा और विवाद समाधान शर्तों को लिखित अनुबंध में शामिल करना चाहिए।

चरण 9: लॉजिस्टिक्स और कस्टम प्रक्रिया पूरी करें

उत्पाद की प्रकृति के अनुसार समुद्री, हवाई या सड़क मार्ग चुना जाता है। जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए तापमान नियंत्रित लॉजिस्टिक्स आवश्यक हो सकती है।

कृषि निर्यात संवर्धन योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज

सटीक दस्तावेज संबंधित योजना घटक और परियोजना के अनुसार बदल सकते हैं। सामान्य रूप से निम्न दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:

दस्तावेजउपयोग
PAN कार्डआवेदक की कर पहचान
IECआयात-निर्यात पहचान
APEDA RCMCAPEDA से पंजीकरण
GST प्रमाणपत्रकर पंजीकरण
संस्था पंजीकरणकंपनी, फर्म, FPO या सोसायटी का प्रमाण
बैंक विवरणसहायता और लेन-देन के लिए
परियोजना रिपोर्टप्रस्तावित निवेश एवं गतिविधि
मशीनरी कोटेशनपरियोजना लागत का प्रमाण
भूमि दस्तावेजपरियोजना स्थल की पुष्टि
लीज डीडकिराए की भूमि या भवन होने पर
भवन नक्शाअवसंरचना परियोजना के लिए
अनुमतियां और NOCस्थानीय नियमों के अनुसार
CA प्रमाणपत्रलागत या वित्तीय विवरण
निर्यात प्रदर्शनजहां पूर्व निर्यात आवश्यक हो
गुणवत्ता प्रमाणपत्रलागू घटक के अनुसार
उत्पाद और बाजार विवरणनिर्यात प्रस्ताव की व्यवहार्यता

कृषि निर्यात संवर्धन योजना में आवेदन कैसे करें?

ऑनलाइन आवेदन की सामान्य प्रक्रिया

  1. APEDA की आधिकारिक वेबसाइट खोलें।
  2. निर्यातक पंजीकरण या संबंधित योजना अनुभाग चुनें।
  3. IEC और RCMC संबंधी औपचारिकताएं पूरी करें।
  4. वर्तमान वित्तीय सहायता या आवेदन सूचना जांचें।
  5. पात्र योजना घटक का चयन करें।
  6. परियोजना और आवेदक की जानकारी भरें।
  7. परियोजना रिपोर्ट तथा आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
  8. आवेदन जमा करके संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
  9. मांगी गई अतिरिक्त जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं।
  10. परियोजना को स्वीकृति मिलने के बाद ही दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य शुरू करें।
  11. कार्य पूरा होने पर बिल, भुगतान प्रमाण, निरीक्षण रिपोर्ट और दावा दस्तावेज जमा करें।

स्वीकृति से पहले खर्च करने में सावधानी

किसी मशीन, भवन या सेवा पर केवल इस उम्मीद से निवेश नहीं करना चाहिए कि बाद में सब्सिडी मिल जाएगी। कई सरकारी योजनाओं में पूर्व स्वीकृति, निर्धारित खरीद प्रक्रिया, बैंक भुगतान, निरीक्षण और समय सीमा का पालन अनिवार्य होता है।

बिना स्वीकृति किया गया खर्च सहायता के लिए अमान्य हो सकता है।

योजना में कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?

APEDA की वित्तीय सहायता को सभी आवेदकों के लिए समान निश्चित सब्सिडी नहीं माना जाना चाहिए। सहायता की सीमा निम्न बातों पर निर्भर करती है:

  • योजना का घटक
  • पात्र गतिविधि
  • आवेदक की श्रेणी
  • परियोजना लागत
  • उत्पाद की प्राथमिकता
  • उपलब्ध बजट
  • सामान्य या साझा अवसंरचना
  • APEDA की स्वीकृत लागत
  • आवेदन की तारीख
  • लागू वित्तीय वर्ष के दिशा-निर्देश

इसलिए बिना वर्तमान दिशा-निर्देश देखे कोई निश्चित प्रतिशत या अधिकतम राशि बताना भ्रामक हो सकता है।

2021-26 के दिशा-निर्देशों में विभिन्न गतिविधियों के लिए अलग-अलग सहायता प्रावधान थे। चूंकि वह वित्तीय चक्र समाप्त हो चुका है, इसलिए 2026 के नए आवेदक को APEDA की वर्तमान अधिसूचना से ही सहायता राशि की पुष्टि करनी चाहिए।

वर्ष 2026 में Export Promotion Mission का महत्व

भारत सरकार ने निर्यात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए Export Promotion Mission यानी EPM शुरू किया है। DGFT के अनुसार यह एक एकीकृत और डिजिटल व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है।

इस मिशन का विशेष ध्यान निम्न वर्गों पर है:

  • MSME निर्यातक
  • पहली बार निर्यात करने वाले उद्यम
  • श्रम-प्रधान क्षेत्र
  • कम निर्यात वाले क्षेत्र
  • देश के आंतरिक हिस्सों में स्थित उद्यम

DGFT के अनुसार Export Promotion Mission के लिए वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक ₹25,060 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित है।

इस मिशन के अंतर्गत निर्यात ऋण, अनुपालन, बाजार जानकारी, लॉजिस्टिक्स और अन्य व्यापार सहायता से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। कृषि निर्यातक भी अपनी पात्रता और अधिसूचित क्षेत्रों के आधार पर इन व्यवस्थाओं का लाभ देख सकते हैं।

हालांकि, EPM को APEDA की पुरानी कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात योजना का सीधा और पूर्ण विकल्प मानना उचित नहीं होगा। दोनों व्यवस्थाओं का प्रशासन, पात्रता और सहायता घटक अलग हो सकते हैं।

कृषि निर्यात संवर्धन योजना से किसानों को होने वाले लाभ

बेहतर मूल्य की संभावना

गुणवत्ता और खरीदार की मांग पूरी होने पर निर्यात बाजार किसानों को बेहतर मूल्य प्रदान कर सकता है। हालांकि, अधिक कीमत की कोई स्थायी गारंटी नहीं होती।

बाजार का विस्तार

निर्यात से किसान केवल स्थानीय मंडी या व्यापारी पर निर्भर नहीं रहता। FPO या निर्यातक के माध्यम से उसकी उपज नए बाजारों तक पहुंच सकती है।

गुणवत्ता आधारित खेती

निर्यात आपूर्ति शृंखला से जुड़ने पर किसान रिकॉर्ड रखने, संतुलित उर्वरक, सुरक्षित कीटनाशक प्रयोग और समय पर कटाई जैसे बेहतर अभ्यास अपनाता है।

फसल कटाई के बाद नुकसान में कमी

ग्रेडिंग, पैकिंग, प्री-कूलिंग और कोल्ड चेन से फल तथा सब्जियों की बर्बादी कम हो सकती है।

रोजगार के अवसर

निर्यात आधारित कृषि में पैकिंग, प्रसंस्करण, परिवहन, परीक्षण, भंडारण और दस्तावेजीकरण से स्थानीय रोजगार पैदा हो सकता है।

ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन

किसान केवल कच्चा माल उत्पादक न रहकर पैकिंग, ब्रांडिंग और प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों में भाग ले सकता है।

FPO कृषि निर्यात कैसे शुरू कर सकता है?

FPO छोटे किसानों को संगठित करके निर्यात के लिए आवश्यक मात्रा और गुणवत्ता तैयार कर सकता है।

FPO के लिए व्यावहारिक मॉडल

  1. एक या दो प्रमुख निर्यात योग्य उत्पाद चुनें।
  2. सदस्यों के खेतों का पंजीकरण करें।
  3. समान उत्पादन प्रोटोकॉल लागू करें।
  4. स्वीकृत कृषि रसायनों की सूची तैयार करें।
  5. खेत स्तर पर रिकॉर्ड रखें।
  6. उत्पाद की सामूहिक खरीद और ग्रेडिंग करें।
  7. पैकहाउस से साझेदारी करें।
  8. प्रयोगशाला परीक्षण कराएं।
  9. अनुभवी निर्यातक के साथ शुरुआती खेप भेजें।
  10. अनुभव मिलने पर स्वयं का निर्यात पंजीकरण विकसित करें।

पहली बार में सीधे बड़े विदेशी ऑर्डर लेने के बजाय किसी स्थापित निर्यातक के साथ आपूर्ति समझौता करना कम जोखिम वाला विकल्प हो सकता है।

कृषि निर्यात में प्रमुख चुनौतियां

गुणवत्ता में असमानता

एक ही खेप में अलग-अलग आकार, रंग या परिपक्वता का उत्पाद होने से विदेशी खरीदार उसे अस्वीकार कर सकता है।

कीटनाशक अवशेष

अनुचित कीटनाशक उपयोग और प्रतीक्षा अवधि का पालन न करने से MRL सीमा पार हो सकती है।

उच्च लॉजिस्टिक्स लागत

कोल्ड चेन, हवाई माल ढुलाई और बंदरगाह तक परिवहन का खर्च छोटे निर्यातकों के लिए चुनौती बन सकता है।

बदलती निर्यात नीति

कुछ कृषि वस्तुओं पर घरेलू उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण के कारण निर्यात प्रतिबंध, न्यूनतम निर्यात मूल्य या शुल्क लागू किया जा सकता है।

भुगतान जोखिम

विदेशी खरीदार द्वारा देर से भुगतान या अनुबंध का पालन न करने का जोखिम रहता है। सुरक्षित भुगतान शर्त और खरीदार की जांच आवश्यक है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों की जटिलता

हर देश के खाद्य सुरक्षा, पैकेजिंग, लेबलिंग और पौध स्वास्थ्य नियम अलग हो सकते हैं।

सीमित मात्रा

छोटे किसान अकेले निर्यात योग्य मात्रा उपलब्ध नहीं करा पाते। इस समस्या का समाधान FPO और क्लस्टर आधारित उत्पादन से किया जा सकता है।

कृषि निर्यात में सफलता के लिए जरूरी सावधानियां

  • केवल मौखिक ऑर्डर पर खेप तैयार न करें।
  • खरीदार और आयातक कंपनी की विश्वसनीयता जांचें।
  • उत्पाद की वर्तमान DGFT निर्यात नीति देखें।
  • आयातक देश के MRL नियम समझें।
  • खेत स्तर पर कीटनाशक रिकॉर्ड रखें।
  • गुणवत्ता परीक्षण की लागत पहले जोड़ें।
  • परिवहन और बीमा की जिम्मेदारी स्पष्ट करें।
  • विदेशी मुद्रा भुगतान की शर्त लिखित रखें।
  • APEDA या अन्य योजना की स्वीकृति से पहले निवेश न करें।
  • किसी एजेंट को बिना सत्यापन के बड़ी अग्रिम फीस न दें।
  • निर्यात दस्तावेजों में गलत जानकारी न भरें।
  • लाभ की गणना में रिजेक्शन और खराब होने का जोखिम शामिल करें।

कृषि निर्यात व्यवसाय में लागत और लाभ का उदाहरण

नीचे दिया गया उदाहरण केवल समझाने के लिए है। वास्तविक लागत उत्पाद, दूरी, देश, मौसम और परिवहन माध्यम पर निर्भर करेगी।

खर्च का मदअनुमानित राशि
किसान से उत्पाद खरीद₹3,00,000
ग्रेडिंग और छंटाई₹30,000
पैकेजिंग₹60,000
प्रयोगशाला परीक्षण₹20,000
परिवहन₹40,000
कोल्ड स्टोरेज₹25,000
दस्तावेज और हैंडलिंग₹25,000
अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई₹1,50,000
बीमा और आकस्मिक खर्च₹30,000
कुल अनुमानित लागत₹6,80,000

मान लें कि खेप की बिक्री ₹8,00,000 में होती है, तो प्रारंभिक सकल अंतर ₹1,20,000 होगा। इसमें कर, बैंक शुल्क, कमीशन, मुद्रा विनिमय, रिजेक्शन, वजन में कमी और अन्य खर्च घटाने के बाद वास्तविक लाभ निर्धारित होगा।

इसलिए केवल विदेशी बाजार की ऊंची बिक्री कीमत देखकर निर्यात शुरू नहीं करना चाहिए। प्रति किलोग्राम पूरी landed cost निकालना जरूरी है।

कृषि निर्यात संवर्धन योजना का महत्व

भारत में कृषि उत्पादन का बड़ा हिस्सा अभी भी कम प्रसंस्करण और सीमित मूल्य संवर्धन के साथ बेचा जाता है। निर्यात आधारित मूल्य शृंखला किसानों को गुणवत्ता, ब्रांडिंग और प्रसंस्करण से जोड़ सकती है।

APEDA के 2024-25 प्रशासनिक प्रतिवेदन के अनुसार उस वर्ष APEDA के अनुसूचित उत्पादों का निर्यात 28.59 अरब अमेरिकी डॉलर था, जबकि कुल कृषि निर्यात 51.91 अरब अमेरिकी डॉलर बताया गया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद भारत के निर्यात क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बेहतर अवसंरचना, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार संपर्क से इस क्षमता का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।

कृषि निर्यात संवर्धन योजना से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कृषि निर्यात संवर्धन योजना क्या है?

कृषि निर्यात संवर्धन योजना कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने वाली सरकारी सहायता व्यवस्थाओं के लिए प्रयुक्त सामान्य नाम है। APEDA की 2021-26 वित्तीय सहायता योजना में निर्यात अवसंरचना, गुणवत्ता विकास और बाजार विकास शामिल थे।

2. योजना का लाभ किसे मिलता है?

लाभ संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार APEDA पंजीकृत निर्यातकों, पात्र कंपनियों, FPO, सहकारी संस्थाओं, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्धारित सरकारी या निजी संस्थाओं को मिल सकता है।

3. क्या किसान को सीधे कृषि निर्यात सब्सिडी मिलती है?

हर किसान को सीधे नकद सब्सिडी नहीं मिलती। किसान FPO, निर्यातक, प्रसंस्करण इकाई, निर्यात क्लस्टर या साझा अवसंरचना परियोजना के माध्यम से लाभ प्राप्त कर सकता है।

4. APEDA Registration क्यों जरूरी है?

APEDA से संबंधित अधिसूचित उत्पादों के निर्यात, RCMC और कुछ वित्तीय सहायता योजनाओं में APEDA पंजीकरण आवश्यक हो सकता है।

5. कृषि निर्यात के लिए IEC कहां से मिलता है?

IEC यानी Importer Exporter Code के लिए DGFT की ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से आवेदन किया जाता है।

6. योजना में कितनी सब्सिडी मिलती है?

सहायता राशि योजना घटक, गतिविधि, आवेदक श्रेणी और वर्तमान दिशा-निर्देश पर निर्भर करती है। 2026 में किसी पुराने प्रतिशत को लागू मानने के बजाय वर्तमान APEDA अधिसूचना जांचनी चाहिए।

7. क्या FPO कृषि उत्पादों का निर्यात कर सकता है?

हां, कानूनी पंजीकरण, IEC, आवश्यक RCMC, गुणवत्ता अनुपालन और अन्य निर्यात औपचारिकताएं पूरी करके FPO निर्यात कर सकता है।

8. निर्यात के लिए कौन-से कृषि उत्पाद अच्छे हैं?

उपयुक्त उत्पाद बाजार मांग, गुणवत्ता, शेल्फ लाइफ और नीति पर निर्भर करता है। आम, अंगूर, अनार, भिंडी, चावल, मसाले, जैविक उत्पाद, बाजरा और प्रसंस्कृत खाद्य संभावित श्रेणियां हैं।

9. कृषि निर्यात में MRL क्या है?

MRL किसी उत्पाद में कीटनाशक अवशेष की अनुमत अधिकतम सीमा है। यह देश, उत्पाद और कीटनाशक के अनुसार अलग हो सकती है।

10. कृषि निर्यात संवर्धन योजना के लिए आवेदन कहां होता है?

संबंधित आवेदन APEDA की आधिकारिक योजना या पंजीकरण प्रणाली पर किया जाता है। नई आवेदन विंडो उपलब्ध है या नहीं, इसकी जांच APEDA के वर्तमान योजना पेज पर करनी चाहिए।

11. क्या 2021-26 वाली APEDA योजना अभी जारी है?

प्रकाशित योजना की अवधि 2021-22 से 2025-26 थी। जुलाई 2026 में इसके पुराने नियमों के स्वतः जारी रहने की पुष्टि नहीं की जानी चाहिए। नई अधिसूचना या विस्तारित दिशा-निर्देश आने पर वही मान्य होंगे।

12. Export Promotion Mission क्या है?

Export Promotion Mission भारत सरकार की नई निर्यात प्रोत्साहन पहल है। इसका उद्देश्य MSME, पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमों और कम निर्यात वाले क्षेत्रों को वित्त, अनुपालन, लॉजिस्टिक्स और बाजार सहायता से जोड़ना है।

निष्कर्ष

कृषि निर्यात संवर्धन योजना भारत के किसानों, FPO, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों और निर्यातकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। निर्यात योग्य गुणवत्ता, सुरक्षित कीटनाशक उपयोग, आधुनिक पैकिंग, कोल्ड चेन, परीक्षण, प्रमाणन और विश्वसनीय खरीदार भी आवश्यक हैं।

APEDA की 2021-22 से 2025-26 अवधि वाली Agriculture and Processed Foods Export Promotion Scheme ने निर्यात अवसंरचना, गुणवत्ता विकास और बाजार विकास के क्षेत्रों में सहायता का ढांचा प्रदान किया। चूंकि यह वित्तीय अवधि समाप्त हो चुकी है, इसलिए 2026 में आवेदन करने वाले निर्यातक को नवीनतम अधिसूचना और पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए।

FPO और किसान समूहों के लिए सबसे उपयुक्त रणनीति यह है कि वे पहले निर्यात योग्य फसल का क्लस्टर विकसित करें, उत्पादन का रिकॉर्ड रखें, गुणवत्ता परीक्षण कराएं और किसी अनुभवी निर्यातक के साथ बाजार में प्रवेश करें। उचित योजना और जोखिम प्रबंधन के साथ कृषि निर्यात ग्रामीण आय, मूल्य संवर्धन और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।

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