हैदराबाद: खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच यूरिया की उपलब्धता को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव सामने आया है। तेलंगाना के कृषि मंत्री Tummala Nageswara Rao ने केंद्र सरकार की फर्टिलाइजर सप्लाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि किसानों की जरूरतों को लेकर कोई ठोस और समयबद्ध योजना नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही राज्य को यूरिया संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे किसानों में चिंता बढ़ रही है।
मंगलवार को आयोजित रायथू नेस्थम कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर भारत पर भी दिखाई दे रहा है। वैश्विक स्तर पर यूरिया शिपमेंट प्रभावित होने से देश के कई राज्यों में सप्लाई बाधित हुई है और तेलंगाना भी इससे अछूता नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पिछले वर्ष नवंबर से ही खरीफ सीजन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र से अतिरिक्त यूरिया आवंटन की मांग कर रही थी, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला।
तुम्माला नागेश्वर राव ने कहा कि यूरिया का उत्पादन, आयात और वितरण पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में यदि किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही है, तो इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराना गलत है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा तेलंगाना सरकार की आलोचना पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तथ्यात्मक स्थिति को समझे बिना राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यूरिया सप्लाई के अलावा डीजल उपलब्धता और कई कृषि संबंधी व्यवस्थाओं पर भी केंद्र सरकार का बड़ा नियंत्रण होता है। इसलिए राज्यों को अक्सर केंद्र की नीतियों और सप्लाई चैन पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार किसानों को राहत देने और खेती को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन यदि केंद्र स्तर पर सप्लाई बाधित होती है तो उसका सीधा असर खेतों तक पहुंचता है।
उन्होंने यह भी कहा कि तेलंगाना सरकार किसानों से फसल खरीदने के मामले में लगातार सक्रिय रही है। राज्य सरकार ने मक्का, ज्वार और सूरजमुखी जैसी फसलों की खरीद सुनिश्चित की, जबकि कई अन्य राज्यों में किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार ने किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए खरीद प्रक्रिया को मजबूत किया ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके।
तुम्माला ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा फसल खरीदने के बाद उम्मीद थी कि NAFED और Food Corporation of India जैसी केंद्रीय एजेंसियां समय पर स्टॉक उठाएंगी। हालांकि, इसमें देरी होने से राज्य पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय एजेंसियां समय पर जिम्मेदारी निभाएं, तो किसानों और राज्य सरकार दोनों को राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। धान, मक्का, कपास और दालों जैसी फसलों की बुआई इसी दौरान होती है और इसके लिए यूरिया की मांग तेजी से बढ़ती है। यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं होती, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि राज्यों द्वारा पहले से योजना बनाकर केंद्र को मांग भेजी जाती है।
इस बीच, किसानों के बीच भी चिंता का माहौल है। कई किसान संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि यूरिया सप्लाई में देरी जारी रही, तो खेती की लागत बढ़ सकती है और फसलों की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय कृषि आपूर्ति श्रृंखला पर साफ दिखाई देने लगा है।
तेलंगाना सरकार ने केंद्र से मांग की है कि खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए तत्काल अतिरिक्त यूरिया आवंटित किया जाए और राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाया जाए। आने वाले हफ्तों में मानसून और बुआई की गतिविधियां तेज होने वाली हैं, ऐसे में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकारों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।


