• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

भाकृअनुप-वीपीकेएएस का ‘खेती बचाओ अभियान’ तेज, बागेश्वर के किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और सतत खेती के गुर सिखाए गए

ICAR-VPKAS's 'Save Farming Campaign' intensifies, Bageshwar farmers taught soil health conservation and sustainable farming techniques

Emran Khan by Emran Khan
June 4, 2026
in कृषि समाचार
0
भाकृअनुप-वीपीकेएएस का ‘खेती बचाओ अभियान’ तेज, बागेश्वर के किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और सतत खेती के गुर सिखाए गए
0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखने के उद्देश्य से भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस), अल्मोड़ा द्वारा संचालित ‘खेती बचाओ अभियान’ के तहत बागेश्वर जिले के ग्राम लोहबा में एक महत्वपूर्ण कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और सतत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक बनाना है।

कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें क्षेत्र के 16 किसानों, जिनमें 11 पुरुष और 5 महिला कृषक शामिल थे, ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए खेती की लागत कम करने तथा उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताए।

मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर दिया गया विशेष बल

कार्यक्रम का मुख्य विषय मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और संतुलित पोषण प्रबंधन रहा। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे लंबे समय में उत्पादन क्षमता घट सकती है।

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि वे नियमित रूप से अपनी मिट्टी का परीक्षण करवाएं और उसी के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करें। मृदा परीक्षण के माध्यम से खेत की वास्तविक पोषक तत्व आवश्यकता का पता चलता है, जिससे अनावश्यक उर्वरक खर्च कम होता है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रख सकते हैं।

प्राकृतिक खेती और जैविक विकल्पों पर जोर

कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को हरी खाद, जैव उर्वरक और जैविक खादों के उपयोग के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि हरी खाद मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाती है, जिससे मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और जल धारण क्षमता में सुधार आता है। वहीं जैव उर्वरक पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ-साथ मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने में भी मदद करते हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का पूर्णतः त्याग करना हर परिस्थिति में संभव नहीं है, लेकिन उनका विवेकपूर्ण और संतुलित उपयोग आवश्यक है। जैविक और रासायनिक संसाधनों के समन्वित उपयोग से खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने का संदेश

‘खेती बचाओ अभियान’ का एक प्रमुख उद्देश्य किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता प्रभावित होती है और उत्पादन लागत भी बढ़ती है।

उन्होंने एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management) अपनाने की सलाह दी, जिसमें जैविक खाद, हरी खाद, फसल अवशेष और रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जाता है। यह पद्धति न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है बल्कि फसल उत्पादन को भी स्थिर बनाए रखती है।

कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक तकनीकों की जानकारी

कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के उपयोग से श्रम लागत कम होती है और कृषि कार्यों की दक्षता बढ़ती है।

किसानों को उन्नत कृषि उपकरणों, बेहतर बीज चयन, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और जल संरक्षण तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि की जा सकती है।

सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी गई। किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि यंत्रीकरण अनुदान, कृषि विभाग की विभिन्न सहायता योजनाओं तथा अन्य लाभकारी कार्यक्रमों के बारे में बताया गया।

वैज्ञानिकों ने किसानों को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित योजनाएं किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि निवेश बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश

कृषि विषयों के साथ-साथ कार्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता पर भी चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को संतुलित जीवनशैली अपनाने और दैनिक भोजन में तेल का सीमित उपयोग करने की सलाह दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि स्वस्थ किसान ही स्वस्थ कृषि व्यवस्था की नींव होते हैं। इसलिए खेती के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पोषण पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

किसानों और वैज्ञानिकों के बीच हुआ संवाद

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संवादात्मक सत्र रहा, जिसमें किसानों ने अपनी समस्याएं, अनुभव और जिज्ञासाएं वैज्ञानिकों के साथ साझा कीं। किसानों ने फसल उत्पादन, मिट्टी की उर्वरता, उर्वरकों के उपयोग, कीट प्रबंधन और सरकारी योजनाओं से जुड़े कई प्रश्न पूछे।

वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त सुझाव दिए। इस प्रकार का प्रत्यक्ष संवाद किसानों और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान का प्रभावी माध्यम साबित हुआ।

सतत कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कार्यक्रम का समन्वयन संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारती और डॉ. मनोज कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए संस्थान के प्रयासों की सराहना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की गिरती गुणवत्ता और बढ़ती उत्पादन लागत जैसी चुनौतियों के बीच इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। भाकृअनुप-वीपीकेएएस का ‘खेती बचाओ अभियान’ न केवल किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी दे रहा है, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

यह पहल पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है, जहां सीमित संसाधनों के बीच मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कृषि विकास की आधारशिला है।

 

Previous Post

National Bamboo Mission 2026: किसानों के लिए ‘हरा सोना’ बनने का मौका, जानें योजना, सब्सिडी और आवेदन प्रक्रिया

Next Post

National Agroforestry Policy: खेत की मेड़ पर पेड़ लगाकर बढ़ाएं आय, जानिए कैसे किसानों के लिए बन रही है कमाई का नया जरिया

Next Post
National Agroforestry Policy

National Agroforestry Policy: खेत की मेड़ पर पेड़ लगाकर बढ़ाएं आय, जानिए कैसे किसानों के लिए बन रही है कमाई का नया जरिया

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Agro Processing Cluster Scheme: किसानों की फसल को दिलाएगी बेहतर बाजार और ज्यादा मुनाफा
  • National Agroforestry Policy: खेत की मेड़ पर पेड़ लगाकर बढ़ाएं आय, जानिए कैसे किसानों के लिए बन रही है कमाई का नया जरिया
  • भाकृअनुप-वीपीकेएएस का ‘खेती बचाओ अभियान’ तेज, बागेश्वर के किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और सतत खेती के गुर सिखाए गए
  • National Bamboo Mission 2026: किसानों के लिए ‘हरा सोना’ बनने का मौका, जानें योजना, सब्सिडी और आवेदन प्रक्रिया
  • Himsagar Mango किसानों के लिए लाभदायक आम की किस्म

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.