PM-FME Scheme: कृषि क्षेत्र में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसलों का मूल्य संवर्धन (Value Addition) भी जरूरी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises – PM-FME) शुरू की है।
यह योजना वर्ष 2020 में शुरू की गई थी और इसका मुख्य उद्देश्य देश के छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत किसानों, FPOs, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), सहकारी समितियों और सूक्ष्म उद्यमियों को खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना एवं उन्नयन के लिए सहायता दी जाती है। योजना का कुल बजट 10,000 करोड़ रुपये रखा गया है।
क्यों जरूरी है PM-FME Scheme?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में से एक है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद बिना प्रसंस्करण के ही बाजार में पहुंचते हैं। इससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
उदाहरण के लिए:
- टमाटर से सॉस और प्यूरी बनाना
- आम से जैम और जूस बनाना
- दूध से पनीर और घी बनाना
- मक्का से स्नैक्स और प्रोसेस्ड उत्पाद बनाना
- मसालों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग
जब कृषि उत्पादों को प्रोसेस करके बेचा जाता है तो उनकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है। PM-FME योजना इसी दिशा में किसानों को प्रोत्साहित करती है।
PM-FME Scheme के मुख्य उद्देश्य
PM-FME योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को औपचारिक क्षेत्र में लाना।
- किसानों की आय बढ़ाना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना।
- स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देना।
- कृषि उत्पादों की बर्बादी कम करना।
- ODOP (One District One Product) मॉडल को मजबूत बनाना।
किसानों के लिए PM-FME योजना कैसे कार्य करती है?
यह योजना किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखती बल्कि उन्हें कृषि उद्यमी बनने का अवसर देती है।
1. फसल का मूल्य संवर्धन
यदि कोई किसान आम उगाता है तो वह केवल कच्चे आम बेचने के बजाय आम का पल्प, जैम, स्क्वैश या कैंडी बनाकर अधिक आय अर्जित कर सकता है।
2. प्रोसेसिंग यूनिट लगाने में सहायता
योजना के तहत मशीनरी, उपकरण और प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता मिलती है।
3. ब्रांडिंग और मार्केटिंग
किसानों और FPOs को अपने उत्पाद की ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
4. प्रशिक्षण
योजना के तहत उद्यमियों को प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ा जाता है।
5. रोजगार सृजन
ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे खाद्य उद्योग स्थापित होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है।
PM-FME योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता
व्यक्तिगत इकाइयों के लिए
योजना के अंतर्गत पात्र इकाइयों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी प्रदान की जाती है।
- अधिकतम सब्सिडी: 10 लाख रुपये
- लाभार्थी का योगदान: न्यूनतम 10 प्रतिशत
- शेष राशि बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध हो सकती है।
SHG सदस्यों के लिए
- प्रति सदस्य 40,000 रुपये तक सीड कैपिटल सहायता
- कार्यशील पूंजी और छोटे उपकरणों की खरीद के लिए सहायता
FPO और सहकारी समितियों के लिए
- पूंजी निवेश पर 35 प्रतिशत तक अनुदान
- कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए सहायता
- मार्केटिंग और ब्रांडिंग सहायता
One District One Product (ODOP) मॉडल क्या है?
PM-FME योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ODOP मॉडल है।
इस मॉडल के तहत प्रत्येक जिले के लिए एक प्रमुख कृषि या खाद्य उत्पाद की पहचान की जाती है।
उदाहरण:
- मालिहाबाद (उत्तर प्रदेश) – आम
- मुजफ्फरनगर – गुड़
- नागपुर – संतरा
- दार्जिलिंग – चाय
- केरल के कई जिले – मसाले
ODOP मॉडल से स्थानीय उत्पादों को पहचान और बेहतर बाजार मिलता है। देश के सैकड़ों जिलों में ODOP उत्पादों की पहचान की जा चुकी है।
किन राज्यों में लागू है PM-FME योजना?
PM-FME एक अखिल भारतीय योजना है और इसे सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है।
प्रमुख राज्य:
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान
- पंजाब
- हरियाणा
- महाराष्ट्र
- गुजरात
- पश्चिम बंगाल
- झारखंड
- छत्तीसगढ़
- ओडिशा
- तमिलनाडु
- कर्नाटक
- केरल
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
- असम
- उत्तराखंड
- हिमाचल प्रदेश
पूर्वोत्तर राज्यों और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र सरकार अधिक वित्तीय भागीदारी भी करती है।
कौन आवेदन कर सकता है?
योजना के लिए निम्नलिखित पात्र हैं:
- व्यक्तिगत उद्यमी
- किसान
- किसान उत्पादक संगठन (FPO)
- स्वयं सहायता समूह (SHG)
- सहकारी समितियां
- खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां
- ग्रामीण उद्यमी
- महिला उद्यमी
किन क्षेत्रों में व्यवसाय शुरू किया जा सकता है?
PM-FME के तहत कई प्रकार की फूड प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की जा सकती हैं:
- फल एवं सब्जी प्रसंस्करण
- डेयरी उत्पाद
- मसाला प्रसंस्करण
- अचार निर्माण
- जैम एवं जेली
- शहद प्रसंस्करण
- मक्का आधारित उत्पाद
- बाजरा आधारित उत्पाद
- मिलेट स्नैक्स
- तेल प्रसंस्करण
- बेकरी उत्पाद
- रेडी टू ईट फूड
किसान PM-FME योजना के लिए कैसे आवेदन करें?
चरण 1: परियोजना तैयार करें
सबसे पहले अपने व्यवसाय की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करें।
चरण 2: आवश्यक दस्तावेज जुटाएं
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- बैंक पासबुक
- मोबाइल नंबर
- फोटो
- भूमि या व्यवसाय से संबंधित दस्तावेज
- परियोजना रिपोर्ट
चरण 3: ऑनलाइन आवेदन
आवेदन PM-FME पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है।
आधिकारिक पोर्टल:
PM-FME Portal
चरण 4: जिला स्तर पर सत्यापन
जिला संसाधन व्यक्ति (DRP) और संबंधित विभाग आवेदन की जांच करते हैं।
चरण 5: बैंक ऋण स्वीकृति
परियोजना स्वीकृत होने के बाद बैंक ऋण की प्रक्रिया शुरू होती है।
चरण 6: सब्सिडी प्राप्त करें
परियोजना पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थियों को सब्सिडी प्रदान की जाती है।
किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
आय में वृद्धि
प्रसंस्कृत उत्पादों की कीमत कच्चे उत्पादों की तुलना में अधिक होती है।
बाजार का विस्तार
ब्रांडिंग और पैकेजिंग से बड़े बाजारों तक पहुंच बनती है।
रोजगार
गांवों में नए रोजगार अवसर पैदा होते हैं।
महिला सशक्तिकरण
SHGs के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलते हैं।
कृषि अपशिष्ट में कमी
प्रसंस्करण के कारण फलों और सब्जियों की बर्बादी कम होती है।
निर्यात के अवसर
उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
योजना की उपलब्धियां
केंद्र सरकार के अनुसार PM-FME योजना के तहत हजारों सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को सहायता प्रदान की गई है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हजारों करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में उद्यमियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।
भविष्य में किसानों के लिए अवसर
भारत में फूड प्रोसेसिंग उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। बदलती उपभोक्ता मांग, पैकेज्ड फूड की बढ़ती लोकप्रियता और निर्यात अवसरों के कारण आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं।
विशेष रूप से:
- मिलेट उत्पाद
- ऑर्गेनिक फूड
- फ्रूट प्रोसेसिंग
- डेयरी वैल्यू एडिशन
- मसाला उद्योग
- रेडी टू ईट उत्पाद
इन क्षेत्रों में किसानों के लिए PM-FME योजना एक मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
निष्कर्ष
PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises (PM-FME) योजना किसानों, ग्रामीण उद्यमियों, FPOs और SHGs के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें खाद्य प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन के माध्यम से अधिक आय अर्जित करने का अवसर देती है। यदि किसान अपनी फसल को मूल्य संवर्धित उत्पादों में बदलकर बाजार में उतारते हैं, तो वे पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान समय में कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में PM-FME योजना एक प्रभावी कदम साबित हो रही है।

