रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग के अंतर्गत कार्यरत स्वायत्त संस्थान Institute of Pesticide Formulation Technology (IPFT) (आईपीएफटी), गुरुग्राम ने नई दिल्ली स्थित National Academy of Agricultural Sciences परिसर (एनएएससी) में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी-सह-कार्यशाला “BIOPSF 2026: NextGen Bio-Inputs – Bio-based Pesticides, Stimulants and Fertilizers” का आयोजन किया। यह कार्यक्रम आईपीएफटी के 36वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, छात्रों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जैव-आधारित कृषि इनपुट्स में हो रहे नवीनतम अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास पर चर्चा करना तथा सतत कृषि में उनकी भूमिका को मजबूत करना था। वर्तमान समय में रासायनिक कृषि इनपुट्स के अत्यधिक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट, कीटनाशक प्रतिरोध और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच जैव-आधारित समाधान कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहे हैं।
संगोष्ठी का उद्घाटन रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग के संयुक्त सचिव (पेट्रोकेमिकल्स) डॉ. जी. वेंकटेश ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के जैव-इनपुट्स न केवल फसल उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होंगे, बल्कि मृदा स्वास्थ्य सुधारने, पर्यावरणीय प्रभाव कम करने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इस क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना और देश की बढ़ती जैव-अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा। उनके अनुसार, जैव-आधारित उत्पादों का विकास भारत को कृषि क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
आईपीएफटी के निदेशक डॉ. एम.के.आर. मुडियाम ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि कृषि क्षेत्र आज कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। कीटनाशकों के प्रति बढ़ता प्रतिरोध, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और बदलती जलवायु परिस्थितियां किसानों के लिए नई समस्याएं खड़ी कर रही हैं। ऐसे में जैव-आधारित कीटनाशक, जैव-उत्तेजक (बायोस्टिमुलेंट्स) और जैव-उर्वरक टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण साधन बन सकते हैं। उन्होंने शिक्षा जगत, उद्योग और नियामक संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि अनुसंधान को व्यावसायिक उत्पादों में तेजी से बदला जा सके।
उद्घाटन सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण गतिविधियां भी आयोजित की गईं। गणमान्य अतिथियों ने BIOPSF 2026 सारांश पुस्तिका का विमोचन किया तथा हिंदी प्रकाशन “कृषि रसायन दिग्दर्शिका” का अनावरण किया। इसके अलावा ASTRA दिल्ली-एनसीआर चैप्टर का भी औपचारिक शुभारंभ किया गया, जिससे वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के बीच सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम के दौरान अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी विकास और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईपीएफटी और कई अग्रणी संस्थानों एवं संगठनों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी किया गया। इन समझौतों से जैव-इनपुट क्षेत्र में अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
इस वर्ष संगोष्ठी का विषय “फसल संरक्षण, पोषण और मृदा स्वास्थ्य के लिए स्मार्ट और टिकाऊ रणनीतियाँ” रखा गया है। इसके अंतर्गत जैव-आधारित कृषि इनपुट्स के विकास, नियमन, व्यावसायीकरण और व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। कार्यक्रम में पूर्ण व्याख्यान, तकनीकी सत्र, उद्योग संवाद, मौखिक प्रस्तुतियां और पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल की गईं, जिनमें विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध निष्कर्ष साझा किए।
संगोष्ठी में कुल 23 आमंत्रित व्याख्यान तथा 80 मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल हैं। इनमें माइक्रोबियल बायो-इनपुट्स, नैनो-बायोपेस्टीसाइड्स, आरएनए-आधारित कृषि प्रौद्योगिकियां, फॉर्मूलेशन इंजीनियरिंग, बायोस्टिमुलेंट्स, सुरक्षा मूल्यांकन और नियामक ढांचे जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष चर्चा की जा रही है। इन विषयों को कृषि के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ये उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को भी पूरा करने में सहायक हैं।
कार्यक्रम में वैज्ञानिक समुदाय और उद्योग जगत की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि जैव-आधारित कृषि इनपुट्स का बढ़ता उपयोग भारत में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों की उत्पादन लागत कम करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दो दिवसीय यह संगोष्ठी समापन सत्र के साथ समाप्त होगी, जिसमें सर्वश्रेष्ठ मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही उद्योग जगत के साथ विचार-विमर्श के आधार पर ऐसी सिफारिशें तैयार की जाएंगी, जो भारत के जैव-इनपुट पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और टिकाऊ कृषि प्रौद्योगिकियों के व्यापक प्रसार में सहायक बनेंगी। BIOPSF 2026 को जैव-आधारित कृषि नवाचारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है, जो भविष्य की कृषि को अधिक सुरक्षित, उत्पादक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

