ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि दिसंबर 2025 तक 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया गया है। अब केंद्र सरकार ने अगले चरण में अतिरिक्त 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाकर कुल संख्या 6 करोड़ तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
नई दिल्ली में आयोजित समीक्षा बैठक में केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से मिशन मोड में काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि कोई भी पात्र स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्य आजीविका के अवसरों से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से निर्धारित समय सीमा के भीतर 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा अभियान
बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों में लखपति दीदी अभियान की प्रगति और आगामी रणनीति की समीक्षा की गई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह पहल केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का व्यापक अभियान है।
उन्होंने कहा कि अब अगला लक्ष्य अतिरिक्त 3 करोड़ महिलाओं को स्थायी और विविध आजीविका गतिविधियों से जोड़ना है ताकि उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए कृषि, पशुपालन, लघु उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, व्यापार, सेवा क्षेत्र और अन्य गैर-कृषि गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
4.11 करोड़ संभावित लखपति दीदियों की पहचान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर में लगभग 4.11 करोड़ संभावित लखपति दीदियों की पहचान की जा चुकी है। यह आंकड़ा अगले चरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।
उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि इन महिलाओं तक सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और बाजार संपर्क की सुविधाएं प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाएं। इससे ग्रामीण महिलाओं को आय बढ़ाने वाले स्थायी अवसर उपलब्ध होंगे और वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगी।
DAY-NRLM बना अभियान की ताकत
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत विकसित सामुदायिक ढांचा इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 4.09 लाख आजीविका सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (Community Resource Persons) स्वयं सहायता समूहों के साथ काम कर रहे हैं। ये संसाधन व्यक्ति महिलाओं को आजीविका गतिविधियों की योजना बनाने, व्यवसाय शुरू करने और आय बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
इसके अलावा, 6,600 से अधिक मास्टर ट्रेनरों का नेटवर्क प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का कार्य कर रहा है। यह नेटवर्क ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक कौशल और उद्यमिता की जानकारी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
डिजिटल तकनीक से हो रही निगरानी
लखपति दीदी अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार डिजिटल तकनीक का भी व्यापक उपयोग कर रही है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR) के माध्यम से महिलाओं की आय और आजीविका गतिविधियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। अब तक 17.24 करोड़ से अधिक DAR प्रविष्टियां दर्ज की जा चुकी हैं।
इन आंकड़ों के माध्यम से यह पता लगाया जा रहा है कि ग्रामीण परिवार किस प्रकार की आजीविका गतिविधियां अपना रहे हैं और उनकी आय में कितना परिवर्तन हो रहा है। इससे योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा रहा है।
एआई और डेटा आधारित प्रणालियों का उपयोग
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार इस अभियान में आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित समाधानों का भी उपयोग कर रही है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा एनालिटिक्स की मदद से लाभार्थियों की पहचान, प्रशिक्षण आवश्यकताओं का आकलन, आय वृद्धि की निगरानी और परिणामों का विश्लेषण किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के उपयोग से योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन रहा है, जिससे वास्तविक लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने में आसानी हो रही है।
बैंक ऋण और उद्यमिता पर विशेष जोर
बैठक में विभिन्न राज्यों द्वारा बैंक ऋण, उद्यमिता विकास, कौशल उन्नयन और बाजार संपर्क से जुड़ी पहलों की भी समीक्षा की गई।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महिलाओं को केवल वित्तीय सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवसाय स्थापित करने, उत्पादों का विपणन करने और आय बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
उन्होंने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूहों को समय पर ऋण उपलब्ध कराना इस अभियान की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों के अनुसार लखपति दीदी अभियान केवल महिलाओं के सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रहा है।
जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं तो परिवार की आय बढ़ती है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ता है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित होते हैं। इससे गांवों में समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलती है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लखपति दीदी पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण के विजन को जमीन पर उतारने का सशक्त माध्यम बन चुकी है।
उन्होंने सभी राज्यों, बैंकों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य हितधारकों से मिशन मोड में कार्य करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि यदि सभी पक्ष मिलकर काम करें तो 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य समय से पहले भी हासिल किया जा सकता है।
ग्रामीण भारत में बदलाव की नई कहानी
3 करोड़ लखपति दीदी बनने की उपलब्धि यह साबित करती है कि सही नीतियों, सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
अब 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का नया लक्ष्य केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में आर्थिक बदलाव, महिला नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह अभियान देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने और महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
