Dairy Entrepreneurship Development Scheme: भारत में खेती के साथ पशुपालन लंबे समय से किसानों की आय का मजबूत आधार रहा है। गांवों में अधिकतर किसान खेती के साथ गाय, भैंस, बकरी या अन्य पशुओं का पालन करते हैं। इनमें डेयरी व्यवसाय किसानों के लिए सबसे भरोसेमंद आय स्रोत माना जाता है, क्योंकि दूध की मांग पूरे साल बनी रहती है। शहर हो या गांव, दूध, दही, घी, पनीर, मक्खन और अन्य दुग्ध उत्पादों की खपत लगातार बढ़ रही है।
इसी जरूरत को देखते हुए सरकार ने समय-समय पर डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें एक प्रमुख नाम रहा है Dairy Entrepreneurship Development Scheme, जिसे आमतौर पर DEDS के नाम से जाना जाता था। इस योजना का उद्देश्य छोटे किसानों, पशुपालकों, बेरोजगार युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए सहायता देना था।
हालांकि किसानों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि पुरानी Dairy Entrepreneurship Development Scheme अब सक्रिय रूप से लागू नहीं है। यह योजना 2020-21 से बंद मानी जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि डेयरी क्षेत्र में सरकारी मदद बंद हो गई है। आज डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर, दूध प्रोसेसिंग, चिलिंग यूनिट, पशु आहार, डेयरी कोऑपरेटिव और आधुनिक डेयरी उद्यमों के लिए सरकार अन्य योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रही है। इनमें Animal Husbandry Infrastructure Development Fund यानी AHIDF, National Programme for Dairy Development यानी NPDD और राज्य सरकारों की पशुपालन योजनाएं प्रमुख हैं।
Dairy Entrepreneurship Development Scheme क्या थी?
Dairy Entrepreneurship Development Scheme एक ऐसी योजना थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी आधारित रोजगार को बढ़ावा देना था। इस योजना को NABARD के माध्यम से लागू किया जाता था। इसके तहत किसानों और उद्यमियों को छोटे डेयरी फार्म, दूध उत्पादन इकाई, दूध ठंडा करने की सुविधा, मिल्क पार्लर, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, पशु पालन आधारित उद्यम और डेयरी उत्पाद निर्माण जैसे कामों के लिए वित्तीय सहायता दी जाती थी।
इस योजना में सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को परियोजना लागत पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को 33.33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान था। यह सब्सिडी back-ended capital subsidy के रूप में दी जाती थी, यानी किसान पहले बैंक से लोन लेकर प्रोजेक्ट शुरू करता था और बाद में पात्रता के अनुसार सब्सिडी समायोजित होती थी।
इस योजना का फायदा खास तौर पर छोटे और मध्यम किसानों को मिलता था। इसके जरिए किसान 2 से 10 पशुओं तक की छोटी डेयरी यूनिट शुरू कर सकते थे। इसके अलावा दूध संग्रहण, दूध परीक्षण, दूध ठंडा करने की मशीन, डेयरी मार्केटिंग आउटलेट और डेयरी उत्पाद बनाने वाली छोटी इकाइयों को भी बढ़ावा दिया जाता था।
क्या यह योजना अभी चालू है?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। कई किसान आज भी इंटरनेट पर Dairy Entrepreneurship Development Scheme या NABARD Dairy Subsidy के नाम से जानकारी खोजते हैं। लेकिन आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह योजना 2020-21 से बंद है। इसलिए यदि कोई किसान आज इस नाम से सब्सिडी लेने की योजना बना रहा है, तो उसे पहले अपने नजदीकी पशुपालन विभाग, NABARD कार्यालय या बैंक से वर्तमान स्थिति जरूर जांचनी चाहिए।
कई बार पुराने लेखों या वेबसाइटों पर इस योजना की सब्सिडी और आवेदन प्रक्रिया दिखाई देती है, लेकिन किसान को केवल नई और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही आवेदन करना चाहिए। आज डेयरी क्षेत्र में निवेश के लिए केंद्र सरकार ने AHIDF जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया है, जो डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर और पशुपालन आधारित उद्योगों को मजबूत करने में मदद कर रही हैं।
किसानों के लिए यह योजना कैसे उपयोगी रही?
Dairy Entrepreneurship Development Scheme ने ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय को संगठित रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस योजना के जरिए किसानों को केवल पशु खरीदने तक सीमित मदद नहीं मिली, बल्कि दूध उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
किसानों को इससे कई तरह से फायदा मिला। छोटे किसान अपनी खेती के साथ 2 से 5 पशुओं की डेयरी यूनिट शुरू कर सकते थे। जिन किसानों के पास पहले से पशु थे, वे दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर नस्ल के पशु खरीद सकते थे। ग्रामीण युवाओं को रोजगार का अवसर मिला। महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को भी डेयरी व्यवसाय से जुड़ने का मौका मिला।
डेयरी व्यवसाय का एक बड़ा लाभ यह है कि इससे किसान को रोजाना या नियमित नकद आय मिल सकती है। खेती में फसल से पैसा एक निश्चित अवधि के बाद आता है, लेकिन दूध बेचने से किसान को दैनिक या साप्ताहिक आय मिलती है। इससे किसान के घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और छोटे खर्चों के लिए उसे कर्ज पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
डेयरी क्षेत्र में अब कौन-सी योजना ज्यादा उपयोगी है?
पुरानी DEDS योजना बंद होने के बाद किसानों और उद्यमियों के लिए Animal Husbandry Infrastructure Development Fund एक महत्वपूर्ण विकल्प है। यह योजना डेयरी, पशुपालन, मांस प्रोसेसिंग और पशु आहार से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है।
AHIDF के तहत पात्र लाभार्थियों को बैंक से परियोजना लागत का बड़ा हिस्सा loan के रूप में मिल सकता है। सरकार इस योजना में 3 प्रतिशत ब्याज सहायता देती है। यह सहायता कई वर्षों तक उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उद्यमियों पर ब्याज का बोझ कम होता है।
इस योजना के तहत individual entrepreneurs, private companies, MSME, FPO, Section 8 companies और dairy cooperatives जैसे लाभार्थी आवेदन कर सकते हैं। अब डेयरी कोऑपरेटिव भी इस योजना के तहत अपने प्लांट के आधुनिकीकरण, प्रोसेसिंग यूनिट और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए लाभ ले सकते हैं।
AHIDF के तहत किन कामों के लिए सहायता मिल सकती है?
AHIDF योजना का मुख्य उद्देश्य पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है। इसके तहत किसान, उद्यमी, FPO या कंपनियां कई तरह के प्रोजेक्ट शुरू कर सकती हैं।
इसमें milk processing unit, value added dairy product unit, दूध ठंडा करने की यूनिट, milk chilling plant, dairy product manufacturing unit, पशु आहार उत्पादन इकाई, breed improvement से जुड़े प्रोजेक्ट, modern dairy plant, डेयरी कोऑपरेटिव प्लांट का modernization और दूध की quality testing से जुड़े काम शामिल हो सकते हैं।
जो किसान या ग्रामीण युवा छोटे स्तर पर डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें अपने जिले के पशुपालन विभाग और बैंक से यह जांचना चाहिए कि उनके प्रोजेक्ट के लिए कौन-सी योजना उपयुक्त रहेगी। छोटे पशुपालकों के लिए कई राज्यों में अलग-अलग पशुपालन सब्सिडी योजनाएं भी चलती हैं।
कौन-कौन से राज्य इस योजना का लाभ ले सकते हैं?
Dairy Entrepreneurship Development Scheme केंद्र सरकार से जुड़ी योजना थी, इसलिए इसका दायरा पूरे देश में था। इसी तरह AHIDF भी केंद्र सरकार की योजना है और इसका लाभ देश के अलग-अलग राज्यों में पात्र लाभार्थी ले सकते हैं।
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित देश के अधिकांश राज्यों में डेयरी और पशुपालन से जुड़े किसान इन योजनाओं की जानकारी अपने बैंक, जिला पशुपालन विभाग, डेयरी विभाग या संबंधित राज्य पोर्टल से प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि आवेदन प्रक्रिया और राज्य स्तर की अतिरिक्त सब्सिडी अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसान को अपने राज्य के पशुपालन विभाग से ताजा जानकारी जरूर लेनी चाहिए। कई राज्यों में गाय-भैंस खरीद, डेयरी यूनिट, चारा विकास, पशु टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, दुग्ध सहकारी समिति और डेयरी प्रशिक्षण से जुड़ी अलग योजनाएं भी चलती हैं।
किसान कैसे अप्लाई करें?
यदि किसान पुरानी Dairy Entrepreneurship Development Scheme के नाम से आवेदन करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले यह समझना चाहिए कि यह योजना अब सक्रिय नहीं है। इसलिए आवेदन से पहले किसान को नजदीकी बैंक, NABARD जिला विकास प्रबंधक कार्यालय या पशुपालन विभाग से वर्तमान स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।
यदि किसान AHIDF या किसी वर्तमान डेयरी योजना के तहत आवेदन करना चाहते हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपना प्रोजेक्ट तय करना होगा। उदाहरण के लिए, किसान दूध उत्पादन इकाई, milk chilling unit, dairy product processing, पशु आहार निर्माण, दूध संग्रहण केंद्र या डेयरी उत्पाद मार्केटिंग से जुड़ा प्रोजेक्ट बना सकते हैं।
इसके बाद किसान को एक project report तैयार करनी होगी। इसमें प्रोजेक्ट की लागत, जमीन या शेड की जानकारी, पशुओं की संख्या, मशीनरी, संभावित दूध उत्पादन, बाजार व्यवस्था, आय और खर्च का अनुमान, बैंक लोन की जरूरत और repayment plan शामिल होना चाहिए।
फिर किसान बैंक में आवेदन कर सकता है। बैंक प्रोजेक्ट की viability यानी व्यवहार्यता की जांच करता है। यदि प्रोजेक्ट सही पाया जाता है, तो बैंक loan sanction करता है। AHIDF जैसे मामलों में आवेदन Udyami Mitra Portal के माध्यम से भी किया जा सकता है। इसके अलावा किसान जिला पशुपालन विभाग, डेयरी विभाग, Krishi Vigyan Kendra या NABARD कार्यालय से मार्गदर्शन ले सकते हैं।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
डेयरी योजना के तहत आवेदन करते समय कुछ सामान्य दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, जाति प्रमाण पत्र यदि लागू हो, निवास प्रमाण पत्र, जमीन या शेड से जुड़े दस्तावेज, project report, quotation, पशु खरीद या मशीनरी का अनुमानित खर्च, उद्यम पंजीकरण यदि जरूरी हो, FPO या कंपनी के दस्तावेज और बैंक द्वारा मांगे गए अन्य कागजात शामिल हो सकते हैं।
यदि किसान किसी cooperative या FPO के माध्यम से आवेदन कर रहा है, तो संस्था के registration documents, board resolution, financial statement और project proposal भी जरूरी हो सकते हैं।
डेयरी व्यवसाय शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
डेयरी व्यवसाय लाभदायक हो सकता है, लेकिन इसमें सही योजना और नियमित देखभाल बहुत जरूरी है। किसान को केवल सब्सिडी देखकर प्रोजेक्ट शुरू नहीं करना चाहिए। सबसे पहले स्थानीय दूध बाजार, दूध की कीमत, चारे की उपलब्धता, पशु चिकित्सक की सुविधा, पानी, शेड, श्रम और पशुओं की नस्ल पर ध्यान देना चाहिए।
अच्छी नस्ल के पशु खरीदना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उनका सही पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन। पशुओं को संतुलित आहार, साफ पानी, नियमित टीकाकरण और समय पर चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए। दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए हरा चारा, सूखा चारा और मिनरल मिक्सचर का संतुलित उपयोग करना चाहिए।
किसान को दूध बेचने की व्यवस्था पहले से करनी चाहिए। अगर आसपास दूध सहकारी समिति, डेयरी प्लांट, होटल, मिठाई दुकान या direct consumer market है, तो कमाई की संभावना बेहतर हो सकती है।
महिलाओं और युवाओं के लिए बड़ा अवसर
डेयरी व्यवसाय में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। गांवों में पशुओं की देखभाल, दुहाई, चारा प्रबंधन और दूध बिक्री में महिलाएं पहले से सक्रिय रहती हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षण, बैंक लोन और बाजार से जोड़ा जाए, तो वे डेयरी उद्यमी बन सकती हैं।
स्वयं सहायता समूहों के लिए भी डेयरी व्यवसाय अच्छा विकल्प है। समूह मिलकर दूध संग्रहण, पनीर निर्माण, घी निर्माण, दही पैकिंग या local dairy brand शुरू कर सकते हैं। इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा और किसानों को दूध का बेहतर मूल्य भी मिलेगा।
युवाओं के लिए आधुनिक डेयरी में और भी अवसर हैं। वे automated milking, milk testing, chilling unit, online दूध सप्लाई, organic milk branding, A2 milk marketing और value added dairy products जैसे क्षेत्रों में काम कर सकते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने में डेयरी की भूमिका
डेयरी खेती के साथ जुड़ा ऐसा व्यवसाय है जो किसान को आर्थिक सुरक्षा देता है। जब फसल खराब होती है या बाजार में दाम कम मिलते हैं, तब पशुपालन किसान के लिए सहारा बन सकता है। दूध की नियमित बिक्री से किसान को नकद आय मिलती रहती है।
इसके अलावा पशुओं से गोबर मिलता है, जिससे वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद और बायोगैस बनाई जा सकती है। इससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की सेहत भी सुधरती है। अगर किसान डेयरी और खेती को साथ लेकर चलता है, तो वह एक integrated farming model तैयार कर सकता है।
राज्य सरकारों की भूमिका
केंद्र सरकार की योजनाओं के अलावा राज्य सरकारें भी डेयरी और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाती हैं। कई राज्यों में पशु खरीद पर अनुदान, डेयरी यूनिट स्थापना, पशु बीमा, चारा विकास, नस्ल सुधार, दूध सहकारी समिति, artificial insemination, पशु स्वास्थ्य शिविर और डेयरी प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं दी जाती हैं।
किसानों को अपने जिले के पशुपालन अधिकारी, ब्लॉक पशु चिकित्सालय, डेयरी विकास विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करना चाहिए। कई बार राज्य योजनाओं का लाभ पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलता है, इसलिए समय पर आवेदन करना जरूरी है।
सावधानी: फर्जी सब्सिडी और गलत जानकारी से बचें
आजकल कई जगह पुराने NABARD dairy subsidy या Dairy Entrepreneurship Development Scheme के नाम पर गलत जानकारी फैलाई जाती है। किसान किसी भी व्यक्ति या निजी एजेंट को बिना जांचे पैसा न दें। सब्सिडी और लोन हमेशा बैंक, सरकारी विभाग या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही लिया जाना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति तुरंत सब्सिडी दिलाने, गारंटी से लोन पास कराने या भारी कमीशन लेकर योजना दिलाने का दावा करे, तो किसान सावधान रहें। योजना की पुष्टि हमेशा सरकारी विभाग, बैंक या NABARD कार्यालय से करें।
निष्कर्ष
Dairy Entrepreneurship Development Scheme ने एक समय में किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को डेयरी क्षेत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि यह योजना अब 2020-21 से बंद है, लेकिन डेयरी क्षेत्र में अवसर आज भी बहुत बड़े हैं। सरकार AHIDF, NPDD और राज्य स्तरीय पशुपालन योजनाओं के माध्यम से किसानों, FPO, cooperatives और entrepreneurs को सहायता दे रही है।
जो किसान डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें पहले सही जानकारी, project report, बाजार योजना और बैंक सलाह के साथ आगे बढ़ना चाहिए। डेयरी केवल दूध बेचने का काम नहीं है, बल्कि यह दूध उत्पादन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, value addition और ग्रामीण रोजगार का मजबूत मॉडल बन सकता है। सही योजना, अच्छी नस्ल, बेहतर चारा, पशु स्वास्थ्य और मजबूत बाजार से किसान डेयरी उद्यमिता के जरिए बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं।

