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Home कृषि समाचार

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर पीएयू ने जारी की सोयाबीन की खेती, प्रसंस्करण और विपणन पर विशेष पुस्तिका

On World Food Safety Day, PAU released a special booklet on soybean cultivation, processing and marketing.

Emran Khan by Emran Khan
June 9, 2026
in कृषि समाचार
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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर पीएयू ने जारी की सोयाबीन की खेती, प्रसंस्करण और विपणन पर विशेष पुस्तिका
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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना ने सुरक्षित, पौष्टिक और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सोयाबीन की खेती, प्रसंस्करण और विपणन पर आधारित एक विस्तृत पुस्तिका “सोयाबीन – सफल खेती, प्रसंस्करण एवं विपणन” का विमोचन किया। यह पुस्तिका विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज तथा पौध प्रजनन एवं आनुवंशिकी विभाग के संयुक्त प्रयास का परिणाम है, जो कृषि और उद्यमिता के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

इस विशेष कार्यक्रम में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने पुस्तिका का औपचारिक विमोचन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एच.के. चौधरी, पूर्व कुलपति, चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (सीएसकेएचपीकेवी), पालमपुर तथा वर्तमान में अभिलाषी विश्वविद्यालय, मंडी के कुलपति भी उपस्थित रहे।

 

खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है सोयाबीन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सुरक्षित और पौष्टिक भोजन किसी भी स्वस्थ समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि सोयाबीन एक ऐसी फसल है जिसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, भरपूर पोषण और प्रसंस्करण की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से उत्पादित और सुरक्षित रूप से प्रसंस्कृत सोयाबीन उत्पादों को बढ़ावा देकर लोगों के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। साथ ही यह फसल टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डॉ. गोसल ने कहा कि बदलती खाद्य आदतों और बढ़ती पोषण संबंधी चुनौतियों के बीच सोयाबीन एक प्रभावी समाधान बनकर उभर रही है।

‘भविष्य की स्वर्णिम फसल’ के रूप में उभर रही है सोयाबीन

पुस्तिका में सोयाबीन को “गोल्डन बीन ऑफ द फ्यूचर” यानी भविष्य की स्वर्णिम फसल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें पंजाब में सोयाबीन की वर्तमान स्थिति, इसकी उन्नत खेती तकनीकों, उत्पादकता बढ़ाने के उपायों तथा बाजार की संभावनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है।

इसके साथ ही पुस्तिका में उन सफल कृषि उद्यमियों की प्रेरणादायक कहानियां भी शामिल की गई हैं, जिन्होंने सोयाबीन आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण और विपणन के माध्यम से रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए हैं। इनमें टोफू, सोया मिल्क, फ्लेवर्ड रेडी-टू-ड्रिंक पेय पदार्थ तथा अन्य पोषणयुक्त उत्पाद प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और भविष्य में यह क्षेत्र ग्रामीण युवाओं तथा स्टार्टअप्स के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है।

 

स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है सोयाबीन

मुख्य अतिथि डॉ. एच.के. चौधरी ने अपने संबोधन में सोयाबीन और उससे बने उत्पादों के पोषण एवं स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोयाबीन पौधों से प्राप्त होने वाले प्रोटीन के सबसे समृद्ध स्रोतों में से एक है।

उन्होंने बताया कि इसमें आवश्यक अमीनो अम्ल, स्वास्थ्यवर्धक वसा और अनेक लाभकारी जैव सक्रिय तत्व मौजूद होते हैं। टोफू, सोया दूध और अन्य सोया आधारित उत्पादों का नियमित सेवन हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, पोषण स्तर बढ़ाने तथा विभिन्न आय वर्गों के लोगों को सस्ता और गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन उपलब्ध कराने में मदद करता है।

डॉ. चौधरी ने कहा कि बढ़ती आबादी और पोषण संबंधी चुनौतियों के दौर में सोयाबीन जैसे पौध आधारित खाद्य पदार्थों का महत्व और भी बढ़ जाता है।

नई किस्मों के विकास से बढ़ेगी किसानों की आय

पौध प्रजनन एवं आनुवंशिकी विभाग की प्रमुख और प्रधान मक्का प्रजनक डॉ. सुरिंदर कौर संधू ने कहा कि सोयाबीन की उच्च उत्पादक, जलवायु-अनुकूल और पोषण की दृष्टि से बेहतर किस्मों के विकास में पौध प्रजनन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि उन्नत आनुवंशिकी और वैज्ञानिक खेती तकनीकों का समन्वय किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगा। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि गुणवत्तापूर्ण सोयाबीन आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग को भी पूरा किया जा सकेगा।

डॉ. संधू ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए ऐसी किस्मों का विकास आवश्यक है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें।

बाजार और ब्रांडिंग में छिपे हैं बड़े अवसर

स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज के निदेशक डॉ. रामनदीप सिंह ने कहा कि आज उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से स्वास्थ्यवर्धक, कार्यात्मक और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की ओर बढ़ रही है। ऐसे में सोयाबीन आधारित उत्पाद कृषि उद्यमियों के लिए विशाल व्यावसायिक अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाए, प्रभावी ब्रांडिंग की जाए और बाजार से बेहतर जुड़ाव स्थापित किया जाए तो सोयाबीन का व्यवसायिक मूल्य कई गुना बढ़ सकता है। उन्होंने युवाओं को कृषि आधारित स्टार्टअप्स के माध्यम से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।

फसल विविधीकरण में निभा सकती है अहम भूमिका

प्रधान दलहन प्रजनक डॉ. बी.एस. गिल ने कहा कि पंजाब में फसल विविधीकरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। सोयाबीन ऐसी फसल है जो किसानों को पारंपरिक फसलों के विकल्प के रूप में नई संभावनाएं प्रदान कर सकती है।

उन्होंने कहा कि यह फसल मिट्टी की सेहत सुधारने, पोषण सुरक्षा बढ़ाने और मूल्यवर्धित प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करने की क्षमता रखती है। इसलिए इसे राज्य की कृषि प्रणाली में अधिक स्थान मिलना चाहिए।

युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणा बनेगी पुस्तिका

स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज की सहायक प्रोफेसर डॉ. नवनीत कौर गिल ने कहा कि यह पुस्तिका उत्पादन और बाजार के बीच की दूरी को कम करने का कार्य करेगी। इसमें ऐसे व्यावहारिक उद्यमिता मॉडल शामिल किए गए हैं जो किसानों, युवाओं, स्टार्टअप्स और कृषि उद्यमियों को सोयाबीन आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करेंगे।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण आधारित उद्यमों की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें सही जानकारी और मार्गदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है।

सुरक्षित खाद्य प्रणाली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर जारी यह पुस्तिका केवल एक तकनीकी दस्तावेज नहीं है, बल्कि किसानों, उद्यमियों, छात्रों और उपभोक्ताओं के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगी। इसमें सोयाबीन की खेती से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन तक की पूरी श्रृंखला को सरल और व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंजाब सहित देश के अन्य राज्यों में भी सोयाबीन आधारित उद्यमों को बढ़ावा दिया जाए तो इससे किसानों की आय बढ़ाने, पौष्टिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर पीएयू की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

Tags: AgriculturearmingPAUSoabean
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