किसानों और ग्रामीण महिलाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के स्किल डेवलपमेंट सेंटर द्वारा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सहयोग से फलों से प्राकृतिक सिरका एवं कम अल्कोहल युक्त कार्बोनेटेड पेय पदार्थ तैयार करने संबंधी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंजाब के विभिन्न जिलों से आए किसानों और किसान महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ कृषि प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनाना था, ताकि वे अपनी आय में वृद्धि कर सकें और ग्रामीण स्तर पर नए उद्यम स्थापित कर सकें।
22 प्रतिभागियों को दी गई व्यावहारिक प्रशिक्षण
स्किल डेवलपमेंट सेंटर की सहयोगी निदेशक डॉ. रुपिंदर कौर ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंजाब के विभिन्न जिलों से आए 22 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा फलों से प्राकृतिक तरीके से सिरका और कम अल्कोहल युक्त कार्बोनेटेड पेय तैयार करने की तकनीकों की जानकारी दी गई।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों और ग्रामीण युवाओं को छोटे स्तर पर उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्राकृतिक सिरका निर्माण से मिल रहे हैं रोजगार के अवसर
कोर्स की समन्वयक डॉ. कुलवीर कौर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पंजाब में कई लोग पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से प्राकृतिक सिरका निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त कर इसे सफल व्यवसाय के रूप में अपना चुके हैं।
उन्होंने कहा कि फल आधारित प्राकृतिक सिरका की मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और रासायनिक उत्पादों की बजाय प्राकृतिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में प्राकृतिक सिरका निर्माण किसानों और युवाओं के लिए लाभकारी व्यवसाय साबित हो सकता है।
डॉ. कुलवीर कौर ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल तकनीक विकसित करना नहीं बल्कि उसे किसानों और उद्यमियों तक पहुंचाना भी है, ताकि वे उसका लाभ उठाकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।
विशेषज्ञों ने समझाई प्राकृतिक सिरका निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. किशानी ने प्रतिभागियों को प्राकृतिक सिरका निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया, उसके लाभ और विभिन्न उपयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक सिरका फलों के किण्वन (फर्मेंटेशन) की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है और इसका उपयोग खाद्य पदार्थों, स्वास्थ्य उत्पादों तथा घरेलू उपयोगों में व्यापक रूप से किया जाता है। बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का अच्छा स्रोत बन सकता है।
उन्होंने प्रतिभागियों को गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता मानकों तथा उत्पाद की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के उपायों के बारे में भी जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक प्रसंस्करण और विपणन के गुर
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को तकनीकी और व्यावसायिक पहलुओं से अवगत कराया। इस अवसर पर डॉ. जी.एस. कोचर, डॉ. किशानी, डॉ. लेनिका कश्यप, डॉ. प्रिया कतियाल, डॉ. किरणदीप, डॉ. रिचा अरोड़ा, डॉ. पूजा, डॉ. पूनम ए. सचदेव, डॉ. रमणदीप सिंह जस्सल, डॉ. बबीता कुमार, डॉ. गगनदीप कौर तथा इंजीनियर करणवीर सिंह गिल (मैनेजर, पाबी) ने अपने-अपने विषयों से संबंधित जानकारी प्रदान की।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को उत्पादन तकनीक, गुणवत्ता प्रबंधन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और उद्यम स्थापना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया। इसके अलावा प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक प्रदर्शन (प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन) भी आयोजित किए गए।
आत्मा योजना के लाभों की भी दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान डॉ. जसप्रीत सिंह खेड़ा, परियोजना निदेशक (आत्मा), ने प्रतिभागियों को आत्मा योजना के तहत किसानों को मिलने वाले लाभों और विभिन्न सरकारी सहायता कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सरकार किसानों को कृषि आधारित उद्यम स्थापित करने और नई तकनीकों को अपनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है। यदि किसान प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का सही उपयोग करें तो वे कम लागत में सफल उद्यम स्थापित कर सकते हैं।
कृषि आधारित उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि फल प्रसंस्करण आधारित उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पंजाब जैसे राज्य में जहां बड़ी मात्रा में फल और कृषि उत्पाद उपलब्ध हैं, वहां मूल्य संवर्धन आधारित इकाइयों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
प्राकृतिक सिरका और कम अल्कोहल युक्त कार्बोनेटेड पेय जैसे उत्पाद न केवल बाजार में अच्छी मांग रखते हैं बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय भी हो रहे हैं। ऐसे उत्पादों का निर्माण किसानों को कृषि से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करता है।
प्रतिभागियों को मिला आत्मनिर्भर बनने का संदेश
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मैडम कंवलजीत कौर ने सभी प्रतिभागियों और विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का धन्यवाद किया। उन्होंने प्रतिभागियों को सलाह दी कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी और तकनीकों को अपने व्यवसाय एवं कृषि कार्यों में अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ें।
उन्होंने कहा कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को आधुनिक कृषि प्रसंस्करण तकनीकों से जोड़कर रोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
फलों से प्राकृतिक सिरका और कम अल्कोहल युक्त कार्बोनेटेड पेय बनाने संबंधी यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण आधारित व्यवसायों की ओर प्रेरित करने की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इस तकनीक को अपनाते हैं तो वे कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पीएयू की यह पहल किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होने की उम्मीद है।

