लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि ‘विकसित भारत’ का संकल्प केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र का संकल्प है, जिसे साकार करने के लिए देश के प्रत्येक नागरिक, संस्था और जनप्रतिनिधि को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाओं और नीतियों का अंतिम उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।
ओम बिरला सोमवार को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा विधानसभा के चैम्बर में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (सीपीए) इंडिया रीजन जोन-II (नॉर्थ जोन) सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में ‘भविष्य की चुनौतियों और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में जागरूक समाज एवं जनप्रतिनिधियों की भूमिका’ विषय पर मंथन किया जा रहा है।
इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण, संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा सहित विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विकसित भारत के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब सरकार की नीतियां और योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें और उसके जीवन स्तर में वास्तविक सुधार लाएं। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन की गति तेज करने, नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने और समाज को प्रगतिशील दिशा देने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि विधायक और जनप्रतिनिधि नीतियों को जमीन पर उतारने का सबसे प्रभावी माध्यम होते हैं। इसलिए उनके प्रयासों से ही विकास की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंच सकता है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत बना स्थिरता का उदाहरण
ओम बिरला ने कहा कि 21वीं सदी का वर्तमान दशक विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाएगा क्योंकि पूरी दुनिया राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलावों के दौर से गुजर रही है। अनेक देशों में अस्थिरता और तनाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन भारत मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं, स्थिर शासन व्यवस्था और सुदृढ़ कानूनी ढांचे के आधार पर लगातार आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया के विकसित देशों के अनुभवों का अध्ययन करते हुए अपनी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समय-समय पर आवश्यक बदलाव किए हैं। यही कारण है कि आज विश्व भारत को नई संभावनाओं और उम्मीदों के केंद्र के रूप में देख रहा है।
युवाशक्ति बनेगी विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कभी देश की बड़ी आबादी को चुनौती के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज वही युवा आबादी भारत की सबसे बड़ी शक्ति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यदि देश की युवाशक्ति को सही दिशा और अवसर मिले तो भारत निर्धारित समय से पहले ही विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल कर सकता है।
नई पीढ़ी की जरूरतों के अनुरूप बनें कानून
ओम बिरला ने कहा कि देश के विधानमंडलों में बनने वाले कानून और नीतियां समय की मांग और नई पीढ़ी की आकांक्षाओं के अनुरूप होनी चाहिए। तेजी से बदलती तकनीक, अर्थव्यवस्था और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कानूनों का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों।
उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में विधानसभाओं और संसद की भूमिका केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज को नई दिशा देने का दायित्व भी निभाना होगा।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए जनभागीदारी जरूरी
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब जनता की भागीदारी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि सदनों में होने वाली चर्चाएं और निर्णय राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर होने चाहिए तथा आम नागरिकों को यह महसूस होना चाहिए कि लोकतांत्रिक संस्थाएं उनकी आवाज को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनभागीदारी बढ़ने से नए विचार सामने आते हैं और विकास की प्रक्रिया को गति मिलती है। लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास जितना मजबूत होगा, विकसित भारत का सपना उतनी ही तेजी से साकार होगा।
मजबूत कानूनी ढांचा निवेश और विकास की कुंजी
ओम बिरला ने कहा कि किसी भी राज्य या देश की प्रगति उसके कानूनी और प्रशासनिक ढांचे की मजबूती पर निर्भर करती है। जहां कानून पारदर्शी, नीतियां स्पष्ट और शासन स्थिर होता है, वहां निवेश की संभावनाएं स्वतः बढ़ जाती हैं।
उन्होंने कहा कि निवेशक उन्हीं क्षेत्रों में निवेश करना पसंद करते हैं जहां उन्हें नीतिगत स्थिरता और कानूनी सुरक्षा का भरोसा हो। इसलिए राज्यों और देश को अपने कानूनी ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
सम्मेलन में 12 राज्यों के प्रतिनिधियों की भागीदारी
दो दिवसीय सीपीए इंडिया रीजन जोन-II सम्मेलन में देश के 12 राज्यों की विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, उत्तर प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सम्मेलन के दौरान विकसित भारत-2047, जनभागीदारी, लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व और भविष्य की चुनौतियों जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।
सम्मेलन के उद्घाटन से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हरियाणा विधानसभा परिसर में नवस्थापित ‘पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सेंटर’ (PRIC) का उद्घाटन भी किया। यह केंद्र विधायकों और संसदीय कार्यों के लिए शोध एवं सूचना उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधियों के आवागमन के लिए ई-बसों का उपयोग किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण और हरित परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया।

