खरीफ 2026 सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत की खाद आपूर्ति व्यवस्था लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री परिवहन में आई चुनौतियों के बावजूद देश ने पर्याप्त उर्वरक भंडार बनाए रखा है। अब आने वाले 7 से 10 दिनों में 12 कार्गो जहाज़ भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं, जिनमें कुल 3.30 लाख टन यूरिया और 2.57 लाख टन डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) शामिल है। इन शिपमेंट्स के पहुंचने से खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता और मजबूत होगी।
हाल के सप्ताहों में पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर बढ़ी अनिश्चितता ने उर्वरक शिपमेंट की आवाजाही को प्रभावित किया। कई कार्गो जहाज़ों को देरी का सामना करना पड़ा, जिससे बाजार में खाद की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। हालांकि अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दे रही है और लंबित शिपमेंट भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।
उर्वरक मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों के अनुसार, आने वाले दिनों में पहुंचने वाले 12 कार्गो जहाज़ों से कुल 5.87 लाख टन उर्वरकों की अतिरिक्त आपूर्ति होगी। इसमें 3.30 लाख टन यूरिया और 2.57 लाख टन डीएपी शामिल है। यूरिया और डीएपी दोनों ही खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण उर्वरकों में गिने जाते हैं। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी प्रमुख फसलों की खेती में इनका व्यापक उपयोग होता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 14 जून 2026 तक देश में कुल उर्वरक स्टॉक बढ़कर 196.65 लाख टन हो चुका है। यह मात्रा खरीफ सीजन की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि मार्च 2026 से लगातार किए गए आयात और घरेलू उत्पादन में वृद्धि के कारण देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक स्तर पर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्टॉक स्थिति किसानों के लिए राहत देने वाली है। पिछले कुछ सप्ताहों में वैश्विक घटनाक्रमों के कारण यूरिया और डीएपी की उपलब्धता को लेकर आशंकाएं बढ़ी थीं। कुछ क्षेत्रों में किसानों द्वारा अतिरिक्त खरीद और भंडारण की खबरें भी सामने आई थीं। लेकिन अब नए आयात और पर्याप्त स्टॉक की जानकारी से बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।
खरीफ 2026 सीजन के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने उर्वरकों की कुल आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन किया है। विभाग के अनुसार इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान कुल 383.9 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की जरूरत रहने का अनुमान है। सरकार का दावा है कि मौजूदा स्टॉक, घरेलू उत्पादन और आगामी आयात को देखते हुए इस मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जा चुकी है।
देश में खाद आपूर्ति को मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार लगातार विभिन्न स्तरों पर निगरानी कर रही है। उर्वरक कंपनियों, राज्य सरकारों और बंदरगाह प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आयातित उर्वरक समय पर किसानों तक पहुंच सकें। साथ ही घरेलू उत्पादन इकाइयों को भी अधिकतम क्षमता पर संचालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ सीजन भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन का बड़ा हिस्सा तैयार होता है। इसलिए यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों की समय पर उपलब्धता फसल उत्पादन और किसानों की आय दोनों के लिए आवश्यक है।
आने वाले दिनों में 12 कार्गो जहाज़ों के भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने से उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूती मिलेगी। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और खरीफ 2026 की बुआई एवं फसल प्रबंधन गतिविधियों पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना कम होगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा स्टॉक और आगामी आयात को देखते हुए देश में उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक बनी रहेगी और किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

