भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) के सचिव नरेश पाल गंगवार ने 17 जून को उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (डुवासु), मथुरा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक, अनुसंधान, नैदानिक तथा पशुधन विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा की और देश में आधुनिक पशु चिकित्सा अवसंरचना को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह दौरा पशुपालन क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सचिव ने विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त की।
शिक्षण एवं पशु चिकित्सा सुविधाओं का किया निरीक्षण
दौरे के दौरान नरेश पाल गंगवार ने विश्वविद्यालय के टीचिंग वेटरिनरी क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स (टीवीसीसी), पशुधन फार्म परिसर (एलएफसी), अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तथा विभिन्न प्रशिक्षण और शिक्षण सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने इन संस्थानों में चल रहे अनुसंधान कार्यों और विद्यार्थियों को दिए जा रहे व्यावहारिक प्रशिक्षण की सराहना की।
सचिव ने कहा कि आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाएं पशुधन क्षेत्र के विकास की आधारशिला हैं। यदि किसानों और पशुपालकों को समय पर बेहतर उपचार, जांच और परामर्श सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो पशुधन की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से पशु स्वास्थ्य सेवाओं में नवीनतम तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने और अनुसंधान आधारित समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
बकरी प्रजनन और जैव-प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों में दिखाई विशेष रुचि
दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव विश्वविद्यालय की विशेषीकृत बकरी इकाई रही। यहां सचिव ने उन्नत प्रजनन तकनीकों और प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों का विस्तृत अवलोकन किया।
उन्होंने बकरी पालन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारत में छोटे पशुधन, विशेषकर बकरियां, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। देश के लाखों छोटे और सीमांत किसान बकरी पालन के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों का विकास पशुपालकों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है।
सचिव ने वैज्ञानिकों से बकरी नस्ल सुधार कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने तथा उन्नत तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास करने का आग्रह किया।
देश की पहली बकरी वीर्य संरक्षण सुविधा बनी आकर्षण का केंद्र
विश्वविद्यालय में स्थापित भारत की अग्रणी बकरी वीर्य संरक्षण (गोअट सीमेन फ्रीजिंग) सुविधा ने सचिव का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने इस अत्याधुनिक केंद्र का निरीक्षण किया और वहां विकसित की जा रही तकनीकों की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले बकरी जर्मप्लाज्म के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार में यह सुविधा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्नत आनुवंशिक संसाधनों का उपयोग कर पशुधन की नस्लों में सुधार किया जा सकता है, जिससे दूध और मांस उत्पादन में वृद्धि होगी।
नरेश पाल गंगवार ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की तकनीकें छोटे पशुपालकों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजन और पशुधन क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होंगी।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में लिया हिस्सा
पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए सचिव ने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी भाग लिया।
उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देना आवश्यक है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों से किया संवाद
दौरे के दौरान सचिव ने दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित एक संवादात्मक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान पशु स्वास्थ्य, डेयरी विकास, उद्यमिता, कौशल विकास और पशुधन क्षेत्र की भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने अपने विचार साझा किए तथा पशुपालन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रश्न भी पूछे।
सचिव ने युवाओं को नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि किसानों और पशुपालकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान भी विकसित करना है।
पशु चिकित्सा अवसंरचना सुदृढ़ करने पर विशेष बल
अपने संबोधन में नरेश पाल गंगवार ने देशभर में पशु चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक क्लीनिकल सुविधाएं, उन्नत डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाएं, वैज्ञानिक प्रजनन प्रणाली और तकनीक आधारित पशु स्वास्थ्य सेवाएं समय की मांग हैं।
उन्होंने कहा कि पशुधन क्षेत्र देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसकी प्रगति सीधे किसानों की आय, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि से जुड़ी हुई है। पशुओं में रोग नियंत्रण, बेहतर प्रजनन और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
सचिव ने शोधार्थियों और विद्यार्थियों से अपील की कि वे ऐसी तकनीकों और समाधानों पर कार्य करें जो सीधे गांव स्तर पर पशुपालकों को लाभ पहुंचा सकें।
राष्ट्रीय पशुधन विकास लक्ष्यों को मिलेगा बल
कार्यक्रम के दौरान डुवासु के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पशु स्वास्थ्य, प्रजनन तकनीक, कौशल विकास और पशुधन प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय के बीच सहयोग से पशुपालन क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी और अनुसंधान के परिणामों को तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा।
ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि डुवासु, मथुरा जैसे संस्थान देश में पशुधन विकास के लिए ज्ञान और नवाचार के प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहे हैं। केंद्रीय सचिव का यह दौरा न केवल विश्वविद्यालय के कार्यों को नई दिशा देगा, बल्कि पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर चल रही विकास योजनाओं को भी गति प्रदान करेगा।
आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाओं, उन्नत प्रजनन तकनीकों और अनुसंधान आधारित समाधानों के माध्यम से देश के करोड़ों पशुपालकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में पशुधन क्षेत्र की भूमिका और अधिक सशक्त होगी।

