जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईओआर), हैदराबाद ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी समाधान विकसित किया है। संस्थान ने जैव-पॉलिमर आधारित “स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक” विकसित कर उसका सफल प्रदर्शन किया है, जो बीजों की गुणवत्ता बढ़ाने, फसल की बेहतर स्थापना सुनिश्चित करने और विभिन्न जैविक एवं अजैविक तनावों से पौधों की रक्षा करने में सक्षम है।
बीज ही कृषि तकनीक का आधार
विशेषज्ञों के अनुसार खेती की सफलता की शुरुआत बीज से होती है। यदि बीज कमजोर हो या अंकुरण सही ढंग से न हो, तो उन्नत प्रबंधन के बावजूद अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव, सूखा, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, नए कीट और रोग तथा संसाधनों की कमी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में बीजों की प्रारंभिक अवस्था को मजबूत बनाना कृषि उत्पादकता बढ़ाने का सबसे किफायती और प्रभावी तरीका माना जा रहा है।
क्या है स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक?
आईसीएआर-आईआईओआर द्वारा विकसित यह तकनीक जैव-अवक्रमणीय (बायोडिग्रेडेबल) जैव-पॉलिमर का उपयोग करती है। बीज के चारों ओर एक विशेष सुरक्षात्मक परत बनाई जाती है, जिसमें लाभकारी सूक्ष्मजीव, पोषक तत्व, सूक्ष्म पोषक तत्व, फसल सुरक्षा एजेंट और पौध वृद्धि को बढ़ावा देने वाले यौगिक शामिल किए जा सकते हैं।
यह परत बीज और मिट्टी के संपर्क क्षेत्र में एक अनुकूल सूक्ष्म वातावरण तैयार करती है, जिससे:
- बीजों का तेजी से अंकुरण होता है,
- पौधों की शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है,
- जड़ों का विकास बेहतर होता है,
- सूखा, तापमान और अन्य पर्यावरणीय तनावों के प्रति सहनशीलता बढ़ती है,
- फसल की स्थापना अधिक समान और मजबूत होती है।
मूंगफली और सोयाबीन में 30% तक अधिक उत्पादन
तेलंगाना में किसानों के खेतों पर किए गए प्रदर्शन परीक्षणों में इस तकनीक के बेहद उत्साहजनक परिणाम सामने आए। मूंगफली और सोयाबीन की फसलों में पारंपरिक किसान पद्धति की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत तक अधिक उपज दर्ज की गई। इससे न केवल उत्पादन बढ़ा बल्कि किसानों की लाभप्रदता में भी सुधार हुआ।
इसके अलावा देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में सोयाबीन, मक्का, चना, कपास, सरसों और अरहर जैसी फसलों पर किए गए बहु-स्थान परीक्षणों में भी 12 से 37 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि देखने को मिली।
वर्षा आधारित खेती के लिए वरदान
भारत की बड़ी कृषि भूमि वर्षा आधारित है, जहां खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहती है। देर से बारिश आना, बीच-बीच में सूखा पड़ना, मिट्टी में नमी की कमी और कीट-रोगों का दबाव अक्सर फसल की शुरुआती अवस्था को प्रभावित करता है।
स्मार्ट सीड तकनीक ऐसे क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है क्योंकि यह अंकुरण और पौध स्थापना के सबसे संवेदनशील चरण में सुरक्षा प्रदान करती है। इससे उत्पादन जोखिम कम होता है और फसल की जलवायु सहनशीलता बढ़ती है।
एक ही कोटिंग में कई लाभ
सामान्य बीज उपचार जहां केवल एक उद्देश्य पूरा करते हैं, वहीं आईसीएआर-आईआईओआर की यह तकनीक बहु-उद्देशीय बीज संवर्धन प्रणाली के रूप में काम करती है। इसमें पोषण, जैविक सुरक्षा और पौध वृद्धि को बढ़ावा देने वाले तत्वों को एक साथ शामिल किया जा सकता है।
इस तकनीक को निम्न फसलों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है:
- अनाज
- मोटे अनाज (मिलेट्स)
- दलहन
- तिलहन
- रेशेदार फसलें
- चारा फसलें
- सब्जियां
- मसाले
- बागवानी फसलें
किसानों की आय बढ़ाने में मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाए तो किसानों को कई प्रकार के लाभ मिल सकते हैं:
- बेहतर अंकुरण और पौध संख्या,
- कम बीज हानि,
- उर्वरकों और जैविक इनपुट का अधिक कुशल उपयोग,
- सूखा और तनाव सहनशीलता में वृद्धि,
- अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ।
इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की आय में सुधार होने की संभावना है।
सतत कृषि की दिशा में बड़ा कदम
आईसीएआर-आईआईओआर के वैज्ञानिकों ने कहा कि भविष्य की कृषि उन तकनीकों पर निर्भर करेगी जो किसानों द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रत्येक इनपुट की दक्षता बढ़ाएं। स्मार्ट सीड तकनीक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि यह सुरक्षा, पोषण और जैविक सहायता को ठीक वहीं पहुंचाती है जहां उसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है—बीज के शुरुआती विकास चरण में।
यह तकनीक पर्यावरण पर कम प्रभाव डालते हुए बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती है, जिससे टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
बड़े पैमाने पर अपनाने की तैयारी
इस नवाचार को देशभर में पहुंचाने के लिए आईसीएआर-आईआईओआर सार्वजनिक और निजी बीज प्रणालियों के साथ साझेदारी को बढ़ावा दे रहा है। राज्य बीज विकास निगम, राष्ट्रीय बीज निगम, सहकारी बीज संघ, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), बीज प्रसंस्करण इकाइयां, बीज उद्यमी और निजी बीज कंपनियां इस तकनीक के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
संस्थान का उद्देश्य है कि गुणवत्ता-संवर्धित स्मार्ट बीज बड़े पैमाने पर किसानों तक पहुंचें और देश की कृषि वृद्धि को नई गति मिले।
आईसीएआर-आईआईओआर जैव-पॉलिमर, लाभकारी सूक्ष्मजीव, पोषक तत्व वितरण प्रणाली और पर्यावरण-अनुकूल फॉर्मूलेशन पर आधारित अगली पीढ़ी की बीज संवर्धन तकनीकों पर लगातार अनुसंधान कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्मार्ट सीड तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग किया गया तो यह भारत की बीज प्रणाली को मजबूत करेगी, कृषि उत्पादकता बढ़ाएगी, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से मुकाबला करने की क्षमता बढ़ाएगी और अंततः करोड़ों किसानों की आजीविका को बेहतर बनाएगी।

