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Home कृषि समाचार

पीएम-किसान योजना की 23वीं किस्त जारी, 9.44 करोड़ किसानों के खातों में पहुंचे 18,880 करोड़ रुपये

23rd installment of PM-KISAN scheme released, Rs 18,880 crore transferred ...

Emran Khan by Emran Khan
June 22, 2026
in कृषि समाचार
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पीएम-किसान योजना की 23वीं किस्त जारी, 9.44 करोड़ किसानों के खातों में पहुंचे 18,880 करोड़ रुपये
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देश के करोड़ों किसानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 23वीं किस्त जारी कर दी गई है। प्रधानमंत्री द्वारा जारी की गई इस किस्त के तहत देशभर के 9.44 करोड़ किसानों के बैंक खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। इस कदम को कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

पीएम-किसान योजना केंद्र सरकार की प्रमुख किसान कल्याण योजनाओं में से एक है, जिसके तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम-किसान की नई किस्त जारी होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि निवेशों के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में सीधे खाते में पहुंचने वाली यह राशि किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित होती है।

कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है। ऐसे में किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना उत्पादन बढ़ाने और कृषि गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

डीबीटी प्रणाली ने बढ़ाई पारदर्शिता

पीएम-किसान योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) व्यवस्था है। इस प्रणाली के माध्यम से लाभार्थी किसानों के खातों में सीधे राशि भेजी जाती है। इससे न केवल भुगतान प्रक्रिया तेज हुई है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ी है।

पिछले कुछ वर्षों में डीबीटी के माध्यम से सरकार ने करोड़ों किसानों तक सहायता राशि पहुंचाई है। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिला है और किसानों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।

डिजिटल सशक्तिकरण में भी निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका

पीएम-किसान योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण भारत में डिजिटल समावेशन को भी गति दी है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को ई-केवाईसी, आधार प्रमाणीकरण और बैंक खाते से आधार लिंकिंग जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इससे गांवों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ी है और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंच रहा है।

योजना के प्रभाव से बड़ी संख्या में किसानों ने डिजिटल पहचान और बैंकिंग सेवाओं को अपनाया है। इससे वित्तीय समावेशन को भी मजबूती मिली है और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

बीएलएस ई-सर्विसेज ने जमीनी स्तर पर निभाई अहम भूमिका

पीएम-किसान योजना के क्रियान्वयन में कई संस्थाएं जमीनी स्तर पर किसानों की सहायता कर रही हैं। बीएलएस ई-सर्विसेज भी अपने बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (बीसी) नेटवर्क के माध्यम से किसानों तक विभिन्न सेवाएं पहुंचाने का कार्य कर रही है। कंपनी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ साझेदारी में ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं को मजबूत बनाने में योगदान दे रही है।

बीएलएस ई-सर्विसेज के सीओओ लोकनाथ पांडा ने 23वीं किस्त जारी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह किसानों और ग्रामीण भारत के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा, “पीएम-किसान योजना की 23वीं किस्त जारी होना किसानों और ग्रामीण भारत के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आज प्रधानमंत्री द्वारा जारी की गई इस किस्त के तहत 9.44 करोड़ किसानों के खातों में 18,880 करोड़ रुपये सीधे भेजे गए हैं, जिससे उन्हें समय पर और पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता मिल रही है।”

ई-केवाईसी और आधार लिंकिंग से मजबूत हुआ तंत्र

लोकनाथ पांडा के अनुसार, पीएम-किसान योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं के विस्तार को भी नई दिशा दी है।

उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी, आधार को बैंक खाते से जोड़ना, निष्क्रिय खातों का पुनः सत्यापन (री-केवाईसी) और भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण जैसे प्रयास भविष्य में योजनाओं के लाभ को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचाने में मदद करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों के कारण लाभार्थियों की पहचान अधिक सटीक हुई है और अपात्र लाभार्थियों को हटाने में भी सहायता मिली है। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है।

किसानों के लिए भरोसेमंद सहारा बनी योजना

वर्षों से संचालित पीएम-किसान योजना आज किसानों के लिए एक भरोसेमंद वित्तीय सहारा बन चुकी है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह राशि खेती के खर्चों को पूरा करने, कृषि निवेश बढ़ाने और वित्तीय दबाव कम करने में सहायक साबित हो रही है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना के साथ डिजिटल सेवाओं का विस्तार, भूमि रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण और बैंकिंग पहुंच को और मजबूत किया जाता है, तो इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में और व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।

23वीं किस्त के वितरण के साथ एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि तकनीक आधारित कल्याणकारी योजनाएं किसानों तक सरकारी सहायता पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं। सरकार की यह पहल न केवल किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, बल्कि ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

 

Tags: AgricultureFarmingPM Kisan Samman Nidhi
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