प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047′ के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने के उद्देश्य से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन का शुभारंभ नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। पहली बार आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं और ग्रामीण विकास विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया, जबकि दूसरे दिन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री सम्मेलन में शामिल होकर भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
यह सम्मेलन केवल सरकारी योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत को आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे के स्तर पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक व्यापक रोडमैप तैयार करने का प्रयास है।
ग्रामीण विकास को बताया विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव
सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश के गांव विकसित होंगे।” उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और यदि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तभी देश विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित कर ग्रामीण विकास को मिशन मोड में आगे बढ़ाने का मंच है। उन्होंने अधिकारियों और मंत्रियों को “टीम इंडिया–टीम रूरल डेवलपमेंट” की भावना से कार्य करने का आह्वान किया।
गांव हैं भारत की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और लोकतंत्र की ताकत
अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गांव केवल आबादी का केंद्र नहीं बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा, लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत इकाई हैं। उन्होंने कहा कि यदि गांव समृद्ध होंगे तो किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे, पलायन कम होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर और बिना किसी भेदभाव के पहुंचे।
लास्ट माइल डिलीवरी पर सरकार का विशेष फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की सफलता योजनाओं की घोषणा से नहीं बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से तय होती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विचार को दोहराया कि “सरकार फाइलों में नहीं बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देनी चाहिए।”
उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि किसी भी योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
मनरेगा में सुधार और VB-GRAM-G मॉडल पर जोर
सम्मेलन में मनरेगा के भविष्य को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अतीत में कई स्थानों पर मशीनों के उपयोग, फर्जी मस्टर रोल और अन्य अनियमितताओं के कारण सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ था। अब सरकार इन कमियों को दूर करने के लिए व्यापक सुधार लागू कर रही है।
उन्होंने बताया कि मजदूरों के लिए रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाकर 125 दिन करने जैसे कदम उठाए गए हैं ताकि जरूरतमंद परिवारों को अधिक रोजगार मिल सके।
साथ ही सरकार VB-GRAM-G (विकसित भारत-ग्राम) मॉडल के माध्यम से गांवों में केवल रोजगार ही नहीं बल्कि स्थायी परिसंपत्तियों और उत्पादक बुनियादी ढांचे के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को मिलेगा और विस्तार
सम्मेलन में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की प्रगति की समीक्षा भी की गई। शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी पात्र गरीब परिवार को योजना से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा सामूहिक निर्माण सामग्री खरीद, प्रशिक्षित राजमिस्त्री (मेसन) तैयार करने और विभिन्न योजनाओं के समन्वय से ग्रामीण आवास निर्माण को और तेज किया जाएगा।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर सरकार का बड़ा फोकस
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी सम्मेलन में विशेष चर्चा हुई।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देशभर में करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ चुकी हैं और लाखों महिलाएं ‘लखपति दीदी‘ बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि अब महिलाओं को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि उन्हें फूड प्रोसेसिंग, एग्री-बिजनेस, डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, सेवा क्षेत्र और आधुनिक उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष बल दिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में करोड़ों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
ग्रामीण सड़कें बनेंगी विकास की नई लाइफलाइन
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मजबूत सड़क नेटवर्क गांवों की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है।
बेहतर सड़क संपर्क से किसानों को बाजार तक पहुंच आसान होती है, बच्चों को शिक्षा, मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं और ग्रामीण उद्यमियों को नए व्यापारिक अवसर मिलते हैं। सरकार आने वाले वर्षों में शेष सभी पात्र गांवों को सर्व मौसमीय सड़कों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
डिजिटल तकनीक और AI से बदलेगा ग्रामीण विकास का स्वरूप
सम्मेलन में पहली बार ग्रामीण विकास योजनाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल मॉनिटरिंग, डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी नवाचार के उपयोग पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से योजनाओं की निगरानी, लाभार्थियों की पहचान, भुगतान प्रक्रिया और परियोजनाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
सरकार भविष्य में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए तकनीक आधारित समाधान अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मिलेगा और मजबूत आधार
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं की समीक्षा भी सम्मेलन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
सरकार डिजिटल माध्यम से समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने और पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी देरी के सहायता पहुंचाने के लिए नई व्यवस्था विकसित कर रही है।
ग्रामीण विकास में केंद्र और राज्यों की साझेदारी होगी मजबूत
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। विभिन्न राज्यों द्वारा प्रस्तुत सफल मॉडलों और नवाचारों पर चर्चा करते हुए यह तय किया गया कि प्रभावी योजनाओं को अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा।
दूसरे दिन आयोजित होने वाले मंत्रिस्तरीय सत्र में राज्यों के सुझावों के आधार पर भविष्य की नीतियों और सुधारों पर अंतिम रूप से विचार किया जाएगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 केवल एक सरकारी बैठक नहीं बल्कि ग्रामीण भारत के व्यापक परिवर्तन का रोडमैप तैयार करने वाला महत्वपूर्ण मंच है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन को साकार करने के लिए केंद्र सरकार गांवों में बेहतर सड़क, पक्का आवास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल तकनीक, सामाजिक सुरक्षा और मजबूत बुनियादी ढांचे पर एकीकृत रूप से कार्य कर रही है। यदि सम्मेलन में तय की गई रणनीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत के गांव आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता के नए मॉडल बन सकते हैं।

