देश की राजधानी नई दिल्ली के पुलमैन एरोसिटी होटल में 25-26 जून 2026 को आयोजित ICSCE–Buyer Seller Meet 2026 का सफल समापन हुआ। पेस्टिसाइड्स मैन्युफैक्चरर्स एंड फॉर्म्युलेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (PMFAI) द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं ट्रेड शो में भारत सहित दुनिया के अनेक देशों से कृषि रसायन, जैविक कृषि इनपुट, उर्वरक, बीज, पैकेजिंग, ड्रोन, एआई, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि तकनीक से जुड़े 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
यह आयोजन केवल एक व्यापार प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि क्षेत्र के भविष्य, वैश्विक व्यापार, जैविक खेती, टिकाऊ कृषि, निर्यात, अनुसंधान एवं नई तकनीकों पर गंभीर विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। सम्मेलन के दौरान प्रदर्शनी के साथ-साथ ज्ञानवर्धक प्लेनरी सेशन, तकनीकी प्रस्तुतियां, पैनल चर्चा तथा बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकों का आयोजन किया गया।

पहले दिन वैश्विक कृषि रसायन उद्योग पर रही चर्चा
25 जून को कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत भाषण के साथ हुई। इसके बाद विशेषज्ञों ने वैश्विक कृषि रसायन उद्योग की वर्तमान स्थिति, भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
टैग्रोस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी अभिजीत बोस ने “ग्लोबल क्रॉप प्रोटेक्शन आउटलुक 2026″ विषय पर बोलते हुए वैश्विक बाजार के आकार, प्रमुख देशों, व्यापारिक अवसरों और जोखिमों पर विस्तृत जानकारी साझा की।
इसके बाद पीआई इंडस्ट्रीज के विपुल पटेल ने कृषि रसायन आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत और रणनीतिक बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल लागत कम करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए टिकाऊ और विश्वसनीय सप्लाई चेन विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है।
व्यापार विशेषज्ञ अजय जोशी ने वैश्विक व्यापार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव का कृषि रसायन निर्यात पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।
सम्मेलन के दौरान स्टेपन एशिया, रेसिल, डॉव केमिकल, सायेंसक्यो (Syensqo) तथा अन्य कंपनियों के विशेषज्ञों ने नई फॉर्म्युलेशन तकनीकों, सर्फैक्टेंट्स, एडजुवेंट्स तथा बेहतर फील्ड प्रदर्शन के लिए विकसित नवीन समाधानों की जानकारी दी।
जैविक कृषि और बायोपेस्टिसाइड्स पर विशेष जोर
कार्यक्रम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग एंड फॉर्म्युलेशन टेक्नोलॉजी (IPFT) के निदेशक डॉ. मोहना कृष्णा रेड्डी ने अगली पीढ़ी के बायो-इनपुट्स, बायो-बॉटैनिकल पेस्टिसाइड्स तथा उन्नत फॉर्म्युलेशन तकनीकों पर संस्थान की पहल को प्रस्तुत किया।
डॉ. अभिसार जैन ने बायोपेस्टिसाइड्स की प्रभावशीलता बढ़ाने वाली आधुनिक फॉर्म्युलेशन तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वैज्ञानिक नवाचार किसानों के लिए अधिक प्रभावी एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विलोवुड केमिकल्स के मुख्य परिचालन अधिकारी जितेंद्र मोहन ने “मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड” विषय पर भारत के विशेष रसायन एवं कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी प्रक्रिया विशेषज्ञता, उत्पादन क्षमता तथा प्रतिस्पर्धी लागत के कारण वैश्विक कृषि रसायन उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उद्योग विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
पहले दिन दोपहर बाद वैश्विक बायोपेस्टिसाइड बाजार, एडजुवेंट तकनीक, ऊर्जा दक्ष फॉर्म्युलेशन प्रक्रिया तथा कृषि उद्योग में सर्फैक्टेंट्स की भूमिका पर कई तकनीकी सत्र आयोजित हुए।
एक विशेष पैनल चर्चा में विभिन्न कंपनियों के विशेषज्ञों ने कृषि उद्योग में आधुनिक सर्फैक्टेंट्स की आवश्यकता, टिकाऊ उत्पाद विकास तथा बदलती बाजार आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा की। सम्मेलन के पहले दिन का समापन सांस्कृतिक कार्यक्रम, एग्री-केमिकल अवार्ड्स, नेटवर्किंग सत्र तथा रात्रिभोज के साथ हुआ।
दूसरे दिन पुनर्योजी कृषि और जैविक समाधान रहे केंद्र में
26 जून को सम्मेलन के दूसरे दिन “सस्टेनेबल क्लाइमेट एक्शन टेक्नोलॉजीज फॉर रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया।
कृषि रसायन निर्यात प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अतुल चुरीवाल ने पारंपरिक कृषि समाधानों के साथ जैविक उत्पादों के समन्वय को भविष्य की टिकाऊ कृषि के लिए आवश्यक बताया।
आईसीएआर-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुजय साहा ने अंगूर उत्पादन में जैविक तकनीकों के माध्यम से कृषि अवशेषों को आय के स्रोत में बदलने वाले भारतीय मॉडल की जानकारी दी।
वैश्विक एग-बायो बाजार पर लॉरेंस मिडलर ने विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया, जबकि सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई के निदेशक डॉ. अरूप घोष ने समुद्री शैवाल (Seaweed) आधारित कृषि उत्पादों की उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
इंसेक्टिसाइड्स इंडिया लिमिटेड की डॉ. रितिका पाठक ने उन्नत जैविक एवं पोषण तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने पर जोर दिया।
नीति, पंजीकरण और जलवायु वित्त पर हुआ विचार-विमर्श
दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में भारत में बायो-स्टिमुलेंट्स और बायोपेस्टिसाइड्स के पंजीकरण, जैविक कृषि इनपुट उद्योग की वर्तमान स्थिति, जलवायु वित्त तथा नीम आधारित उत्पादों के वैश्विक बाजार पर विस्तार से चर्चा हुई।
विशेष पैनल चर्चा में उद्योग प्रतिनिधियों ने विशेष उर्वरकों, जैविक उत्पादों तथा सरकारी नीतियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि किसानों को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि प्रणाली उपलब्ध कराई जा सके।
प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
दोनों दिनों तक आयोजित प्रदर्शनी में देश-विदेश की अनेक कंपनियों ने कृषि रसायन, जैविक उत्पाद, बीज, उर्वरक, ड्रोन तकनीक, एआई आधारित कृषि समाधान, पैकेजिंग सामग्री, मशीनरी तथा अनुसंधान सेवाओं का प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनी के दौरान बड़ी संख्या में भारतीय एवं विदेशी खरीदारों ने निर्माताओं, निर्यातकों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ व्यावसायिक बैठकें कीं। इससे नए व्यापारिक समझौते, निर्यात संभावनाएं तथा दीर्घकालिक साझेदारियों के अवसर भी बने।
भारत को मिला वैश्विक मंच
सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत आज विश्व के प्रमुख कृषि रसायन निर्यातकों में शामिल है। देश की मजबूत उत्पादन क्षमता, प्रक्रिया विशेषज्ञता, प्रतिस्पर्धी लागत और अनुसंधान क्षमताएं भारत को वैश्विक कृषि इनपुट उद्योग का महत्वपूर्ण केंद्र बना रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि “चाइना प्लस वन” रणनीति के चलते भारत के लिए वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। इसके साथ ही जैविक कृषि, बायोपेस्टिसाइड्स, विशेष रसायनों तथा कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में भी भारत तेजी से उभर रहा है।
दो दिवसीय ICSCE–Buyer Seller Meet 2026 ने यह स्पष्ट किया कि कृषि का भविष्य केवल रासायनिक उत्पादों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जैविक समाधान, आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, टिकाऊ उत्पादन प्रणाली और वैश्विक सहयोग मिलकर कृषि क्षेत्र को नई दिशा देंगे। सम्मेलन ने ज्ञान साझा करने, नई तकनीकों को बढ़ावा देने, वैश्विक नेटवर्किंग और व्यापारिक सहयोग के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराया, जिससे भारतीय कृषि इनपुट उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

