भारत के कृषि इनपुट उद्योग के लिए 25 और 26 जून 2026 का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब नई दिल्ली के एरोसिटी स्थित होटल पुलमैन में आयोजित 24वें इंटरनेशनल क्रॉप साइंस कॉन्फ्रेंस एंड एग्जीबिशन (ICSCE Delhi 2026) का सफल समापन हुआ। PMFAI Agribusiness Foundation द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर से 1500 से अधिक प्रतिनिधियों, 129 अग्रणी कंपनियों, कृषि वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। सम्मेलन ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारत वैश्विक कृषि इनपुट उद्योग में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
सम्मेलन का उद्घाटन PMFAI के अध्यक्ष प्रदीप दवे ने किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने बताया कि वर्ष 1997 में मुंबई से शुरू हुई ICSCE की यात्रा आज विश्व स्तर के सबसे महत्वपूर्ण कृषि व्यापार मंचों में शामिल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों की कंपनियों, वैज्ञानिकों और निवेशकों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन चुका है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच कृषि उद्योग की अहम भूमिका
प्रदीप दवे ने अपने संबोधन में कृषि इनपुट उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 से खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण समुद्री आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे उर्वरक, सल्फर, एलएनजी, पेट्रोकेमिकल कच्चे माल और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता पर असर पड़ा है। इसका सीधा प्रभाव कृषि रसायन उद्योग की उत्पादन क्षमता पर भी देखने को मिला।
इसके बावजूद उन्होंने विश्वास जताया कि कृषि इनपुट उद्योग वैश्विक खाद्य सुरक्षा की रीढ़ बना हुआ है। बढ़ती जनसंख्या, सीमित कृषि योग्य भूमि और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच आधुनिक फसल सुरक्षा तकनीकों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष विश्वभर में लगभग 20 प्रतिशत कृषि उत्पादन कीट, रोग और खरपतवार के कारण नष्ट हो जाता है, जिसे आधुनिक क्रॉप प्रोटेक्शन तकनीकों के माध्यम से काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने पर विशेष जोर
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन को कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बढ़ते तापमान, सूखा, अनियमित वर्षा और चरम मौसम की घटनाएं खेती को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में जैविक कृषि उत्पाद, बायो-पेस्टिसाइड, बायो-स्टिमुलेंट और उन्नत कृषि तकनीकें किसानों को बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
129 कंपनियों ने प्रदर्शित किए नवीनतम कृषि समाधान
ICSCE दिल्ली 2026 में भारत और विदेशों की 129 अग्रणी कृषि इनपुट एवं संबद्ध कंपनियों ने अपने नवीनतम उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में आधुनिक फसल सुरक्षा रसायन, बायोलॉजिकल उत्पाद, बायो-स्टिमुलेंट, स्पेशलिटी फर्टिलाइजर, डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म और नई पीढ़ी की कृषि तकनीकों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
दो दिनों तक चले इस आयोजन में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने नई व्यावसायिक संभावनाओं पर चर्चा की और कई कंपनियों ने भविष्य के सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बैठकें भी कीं।
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने साझा किए भविष्य के समाधान
सम्मेलन के पहले दिन कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
वैश्विक फसल सुरक्षा बाजार, भू-राजनीतिक परिस्थितियों का कृषि व्यापार पर प्रभाव, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने की रणनीति, उन्नत सर्फेक्टेंट तकनीक, बायो-पेस्टिसाइड फॉर्मुलेशन, ड्रोन स्प्रे तकनीक, आधुनिक एडजुवेंट, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग तथा “मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड” जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के पास वैज्ञानिक क्षमता, रसायन विज्ञान में विशेषज्ञता और मजबूत विनिर्माण आधार होने के कारण वह वैश्विक कृषि रसायन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
बायोलॉजिकल कृषि समाधान बने आकर्षण का केंद्र
सम्मेलन के दूसरे दिन बायोलॉजिकल कृषि उत्पादों, जैव उर्वरकों और टिकाऊ खेती पर विशेष फोकस रहा।
विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक बायोलॉजिकल तकनीकें किसानों को बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती हैं।
समुद्री शैवाल (Seaweed) आधारित जैव उत्पाद, माइक्रोबियल फॉर्मुलेशन, कार्बन न्यूट्रल फसल सुरक्षा तकनीक और माइक्रोबायोम आधारित कृषि समाधान जैसे विषयों ने प्रतिभागियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
नीति सुधारों पर भी हुई गंभीर चर्चा
सम्मेलन के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में कृषि उद्योग से जुड़े नीति सुधारों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
विशेषज्ञों ने पूरे देश में “वन नेशन, वन लाइसेंस” व्यवस्था लागू करने, डिजिटल डेटा सिस्टम विकसित करने, NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की भूमिका बढ़ाने, अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने तथा नियमों को सरल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रतिभागियों का मानना था कि यदि नियामकीय प्रक्रियाएं सरल होंगी तो कृषि उद्योग में नवाचार और निवेश दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
भारत में तेजी से बढ़ रहा है बायोपेस्टिसाइड बाजार
सम्मेलन में भारत में बायो-पेस्टिसाइड और बायो-स्टिमुलेंट उद्योग की तेजी से बढ़ती संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने बताया कि पर्यावरण अनुकूल कृषि उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार तथा निजी निवेशकों द्वारा जैविक कृषि तकनीकों के अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन दिए जाने से आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना है।
इसके अलावा नीम आधारित उत्पादों, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी फंडिंग और जैविक कृषि समाधान पर भी कई महत्वपूर्ण प्रस्तुतियां दी गईं।

PMFAI Awards 2026 में उत्कृष्ट योगदान देने वालों का सम्मान
ICSCE दिल्ली 2026 के साथ आयोजित PMFAI Awards 2026 समारोह इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। इस अवसर पर कृषि इनपुट उद्योग में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विभिन्न विशेषज्ञों और पेशेवरों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) के सचिव डॉ. सुभाष चंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने उद्योग को संबोधित करते हुए अनुसंधान एवं विकास (R&D), नवाचार और सुरक्षित फसल सुरक्षा उत्पादों के विकास पर अधिक निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल भारतीय किसानों को लाभ मिलेगा बल्कि कृषि उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि होगी।
इन क्षेत्रों में दिए गए प्रतिष्ठित पुरस्कार
PMFAI Awards 2026 के अंतर्गत इंस्टीट्यूशनल सेल्स, सप्लाई चेन, रेगुलेटरी कंप्लायंस, महिला वैज्ञानिक योगदान, ग्लोबल बिजनेस एक्सीलेंस, बायो-स्टिमुलेंट, बायो-पेस्टिसाइड, उभरते नेतृत्व और लाइफटाइम अचीवमेंट जैसी कई श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए।
इन पुरस्कारों का उद्देश्य कृषि इनपुट उद्योग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पेशेवरों को प्रोत्साहित करना और नवाचार को बढ़ावा देना है। समारोह में 1100 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ICSCE 2026?
विशेषज्ञों का मानना है कि ICSCE दिल्ली 2026 ने भारत को वैश्विक कृषि इनपुट उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सम्मेलन के दौरान आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक समाधानों, डिजिटल कृषि, जलवायु अनुकूल खेती और वैश्विक व्यापार सहयोग पर हुई चर्चाएं आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि को नई दिशा दे सकती हैं।
कृषि क्षेत्र में लगातार बढ़ते नवाचार, सरकारी समर्थन, वैज्ञानिक अनुसंधान और निजी निवेश के कारण भारत विश्व बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। साथ ही, किसानों को बेहतर तकनीक, उन्नत उत्पाद और टिकाऊ खेती के नए विकल्प भी उपलब्ध होंगे।
ICSCE दिल्ली 2026 केवल एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण वैश्विक मंच बनकर उभरा। दो दिनों तक चले इस आयोजन में कृषि रसायन, बायोलॉजिकल उत्पाद, टिकाऊ खेती, डिजिटल कृषि और नीति सुधार जैसे विषयों पर हुई व्यापक चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाला समय नवाचार आधारित कृषि का होगा।
1500 से अधिक प्रतिनिधियों, 129 कंपनियों और विश्वभर के विशेषज्ञों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल कृषि उत्पादन में ही नहीं, बल्कि कृषि प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, निर्माण और वैश्विक व्यापार में भी नेतृत्व की भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ICSCE दिल्ली 2026 ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और वैश्विक सहयोग के माध्यम से भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।

