भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, पोषण-संपन्न और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा आयोजित PHDCCI Agri Business Awards 2026 में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और वैज्ञानिकों ने एक मंच पर आकर कृषि नवाचार, मिलेट्स (श्री अन्न), खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित PHD House में किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन के साथ हुई, जिसके बाद कृषि क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन तथा वैश्विक बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्रालय, उद्योग, कृषि वैज्ञानिकों तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएचडीसीसीआई एग्रीबिजनेस कमेटी के चेयरमैन एवं धनुका एग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन एमेरिटस डॉ. आर. जी. अग्रवाल ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के बीच मजबूत तालमेल स्थापित करना होगा। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल अधिक उत्पादन की नहीं, बल्कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण तकनीक, आधुनिक फसल सुरक्षा समाधान और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की है।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाने से नई तकनीकों का लाभ तेजी से किसानों तक पहुंचेगा। डॉ. अग्रवाल ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए मूल्य संवर्धन, कृषि प्रसंस्करण, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक कृषि रसायनों और डिजिटल तकनीकों के अधिक उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कृषि नवाचारों को गांव-गांव तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार सिंह (P.K. Singh) ने कहा कि भारत की कृषि तेजी से विज्ञान और तकनीक आधारित परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। उन्होंने किसानों तक आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, नई किस्में और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. सिंह ने कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, निजी उद्योग और किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैल्यू एडिशन, फूड प्रोसेसिंग, निर्यात, डिजिटल कृषि और आधुनिक कृषि तकनीकों को लगातार बढ़ावा दे रही है। साथ ही उन्होंने पोषण सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए मिलेट्स (श्री अन्न) जैसी फसलों के उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
मिलेट्स को बताया भविष्य का सुपरफूड
कार्यक्रम की प्रमुख वक्ता और ‘मिलेट वुमन ऑफ इंडिया‘ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. शर्मिला ओसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि आज पूरी दुनिया स्वास्थ्यवर्धक और पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों की ओर तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत के पारंपरिक मोटे अनाज यानी मिलेट्स वैश्विक बाजार में सबसे बड़े अवसर के रूप में उभर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मिलेट्स केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह देश की पोषण सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का भी प्रभावी समाधान हैं। उन्होंने कहा कि मिलेट्स में पोषण तत्वों की भरपूर मात्रा होती है और इन्हें दैनिक भोजन का हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है।

डॉ. ओसवाल ने कृषि मंत्रालय द्वारा मिलेट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में मिलेट्स की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और आने वाले वर्षों में इसका वैश्विक बाजार और अधिक विस्तारित होगा।
कृषि और पोषण को जोड़ने की जरूरत
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अब समय केवल उत्पादन बढ़ाने का नहीं, बल्कि पोषण आधारित कृषि (Nutrition-based Agriculture) को बढ़ावा देने का है। किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित करना होगा जो बाजार में बेहतर मूल्य दिलाने के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हों।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा मिलेट उत्पादक देश बनने की क्षमता रखता है। यदि किसानों, उद्योग और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए तो भारत वैश्विक मिलेट व्यापार में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
कृषि में नवाचार और तकनीक पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. प्रवीण कुमार सिंह, कृषि आयुक्त, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा कि भारतीय कृषि तेजी से तकनीक आधारित बदलाव की ओर बढ़ रही है। किसानों तक नई तकनीकों, आधुनिक बीजों, बेहतर कृषि पद्धतियों और डिजिटल सेवाओं को पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें खेतों तक पहुंचाना होगा। इसके लिए सरकार, निजी क्षेत्र, कृषि विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स को मिलकर कार्य करना होगा।
उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए मूल्य संवर्धन (Value Addition), फूड प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
भारत-ब्राजील कृषि सहयोग पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम में भारत स्थित ब्राजील दूतावास के कृषि अटैची रॉबर्टो कार्लोस पापा ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने भारत और ब्राजील के बीच कृषि सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास कृषि क्षेत्र में विशाल अनुभव और संभावनाएं हैं। आधुनिक कृषि तकनीक, अनुसंधान, बीज विकास, कृषि मशीनरी और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर दोनों देश किसानों को अधिक लाभ पहुंचा सकते हैं।
कृषि उद्योग और किसानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को बाजार से सीधे जोड़ना भी बेहद जरूरी है। कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार और निर्यात को बढ़ावा देने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में निजी निवेश, नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाने से खेती अधिक लाभकारी बन सकती है।
एग्री बिजनेस अवॉर्ड्स से नवाचार को मिलेगा प्रोत्साहन
कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले संस्थानों, कंपनियों और नवाचारकर्ताओं को PHDCCI Agri Business Awards 2026 से सम्मानित किया गया। आयोजकों का कहना था कि इन पुरस्कारों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करना तथा उनके नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इनमें प्रमुख रूप से—
- मिलेट्स और अन्य पोषणयुक्त फसलों का उत्पादन बढ़ाना।
- कृषि अनुसंधान और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
- किसानों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल सेवाओं से जोड़ना।
- कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बढ़ाना।
- फूड प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना।
- जलवायु परिवर्तन के अनुरूप टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना।
कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संदेश
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि भारत की कृषि केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकती। अब आवश्यकता ऐसी कृषि प्रणाली विकसित करने की है, जो पोषण, पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा—चारों लक्ष्यों को एक साथ पूरा कर सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिलेट्स, कृषि नवाचार, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से भारत कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। PHDCCI Agri Business Awards 2026 जैसे आयोजन न केवल कृषि क्षेत्र के उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करते हैं, बल्कि नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग और किसानों के बीच संवाद का प्रभावी मंच भी उपलब्ध कराते हैं, जिससे भारतीय कृषि को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में नई राह तैयार होती है।

