भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर आईसीएआर-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-CCARI), गोवा में भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर गोवा सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD), विधिक माप विज्ञान एवं कैप्टन ऑफ पोर्ट्स मंत्री श्री दिगंबर कामत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने आईसीएआर द्वारा पिछले 97 वर्षों में भारतीय कृषि के विकास में दिए गए योगदान की सराहना करते हुए युवाओं से कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाने और खेती की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, जनप्रतिनिधियों, किसानों, महिला किसानों, युवाओं और विभिन्न संस्थानों के अधिकारियों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही। इस दौरान संस्थान द्वारा विकसित आधुनिक कृषि तकनीकों, जलवायु अनुकूल नवाचारों और तटीय कृषि अनुसंधान से जुड़ी उपलब्धियों का भी प्रदर्शन किया गया।
छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित हो वैज्ञानिक अनुसंधान
मुख्य अतिथि श्री दिगंबर कामत ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अब अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों का प्रमुख उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाना, खेती की लागत कम करना तथा आधुनिक तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत @2047′ के विजन और गोवा सरकार के ‘विकसित गोवा 2037′ के लक्ष्य को केवल मजबूत, प्रगतिशील और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है। यदि कृषि लाभकारी बनेगी तो युवाओं का खेती की ओर आकर्षण बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
कृषि और एग्री-उद्यमिता को बढ़ावा देने की जरूरत
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एवं कुंबरजुआ विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री राजेश फलदेसाई ने कहा कि आईसीएआर ने गोवा के कृषि क्षेत्र को वैज्ञानिक अनुसंधान और कृषि शिक्षा के माध्यम से नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि और पशुपालन से संबंधित उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना से युवाओं को कृषि और एग्री-उद्यमिता (Agripreneurship) के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने किसानों और युवाओं से आधुनिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि युवा कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाएंगे तो गोवा ही नहीं, पूरा देश अधिक हरित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा।
कृषि भूमि संरक्षण और जैविक खेती पर दिया जोर
गोवा उच्च शिक्षा निगम के अध्यक्ष श्री गोविंद पर्वतकर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्थानीय स्तर पर सब्जी उत्पादन बढ़ाने और गोवा की प्रसिद्ध खाजन भूमि (Khazan Lands) की उत्पादकता में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि भूमि उपयोग परिवर्तन के कारण राज्य में कृषि योग्य भूमि लगातार कम होती जा रही है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कृषि भूमि के संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ कृषि विकास भी सुनिश्चित होगा।
विज्ञान आधारित अनुसंधान से भारत बना खाद्यान्न अधिशेष राष्ट्र
आईसीएआर-सीसीएआरआई, गोवा के निदेशक डॉ. परवीन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने विज्ञान आधारित कृषि अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से भारत को खाद्यान्न की कमी वाले देश से खाद्यान्न अधिशेष राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि पिछले 75 वर्षों में भारत की जनसंख्या लगभग 4.1 गुना बढ़ी है, जबकि इसी अवधि में देश का खाद्यान्न उत्पादन 7.4 गुना बढ़ा है। यह उपलब्धि उन्नत फसल किस्मों, आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि मशीनीकरण तथा प्रभावी अनुसंधान एवं विस्तार सेवाओं के कारण संभव हो सकी है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों तक नई तकनीकों की पहुंच भारत की खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
तटीय कृषि अनुसंधान में संस्थान की उपलब्धियों का प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने आईसीएआर-सीसीएआरआई की स्थापना से अब तक की विकास यात्रा और उपलब्धियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि संस्थान ने तटीय क्षेत्रों के लिए जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के सतत प्रबंधन तथा किसान-केंद्रित नवाचारों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
इन तकनीकों ने तटीय क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कृषि प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान परिसर में आधुनिक कृषि तकनीकों और अनुसंधान आधारित उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। प्रदर्शनी में वैज्ञानिकों ने किसानों, विद्यार्थियों और युवाओं को संस्थान द्वारा विकसित नई तकनीकों और नवाचारों की जानकारी दी।
प्रदर्शनी के माध्यम से आगंतुकों को जलवायु अनुकूल खेती, तटीय कृषि प्रबंधन, उन्नत कृषि उपकरणों और वैज्ञानिक खेती के आधुनिक मॉडलों को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। किसानों ने इन तकनीकों में विशेष रुचि दिखाई और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
किसानों और महिला किसानों की रही सक्रिय भागीदारी
इस समारोह में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 100 से अधिक किसान और महिला किसान शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच मजबूत संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम हैं। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ सीधे खेतों तक पहुंचता है और किसान नई तकनीकों को तेजी से अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।
विकसित भारत के लिए वैज्ञानिक कृषि होगी आधार
आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की कृषि प्रगति का आधार वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और किसानों तक आधुनिक तकनीकों की प्रभावी पहुंच है। कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि को आधुनिक, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाकर ही ‘विकसित भारत @2047′ और ‘विकसित गोवा 2037′ जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
युवाओं की बढ़ती भागीदारी, कृषि अनुसंधान में नवाचार, जैविक खेती, जलवायु अनुकूल तकनीकों और किसान-केंद्रित वैज्ञानिक समाधानों के माध्यम से भारतीय कृषि आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों को छू सकती है। आईसीएआर और उसके अनुसंधान संस्थान इस परिवर्तन के प्रमुख आधार बनकर देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की समृद्धि और टिकाऊ कृषि विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

