भारत की ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और उद्यमिता का शानदार प्रदर्शन भारत टेक्स 2026 (Bharat Tex 2026) में देखने को मिला। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के माध्यम से इस चार दिवसीय आयोजन में देशभर की लखपति दीदियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिला उद्यमियों को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। इस दौरान महिलाओं ने अपने हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और पारंपरिक कला का प्रदर्शन कर न केवल देश-विदेश के खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक ताकत का भी प्रभावशाली परिचय दिया।
चार दिनों तक चले इस आयोजन में ग्रामीण विकास मंत्रालय का मंडप आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। यहां देश के विभिन्न राज्यों से आई लखपति दीदियों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से संवाद किया और नए व्यापारिक अवसरों की संभावनाओं पर चर्चा की। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना तथा उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाना था।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बढ़ाया महिलाओं का उत्साह
कार्यक्रम के समापन दिवस पर वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शामी राव, ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव टी.के. अनिल कुमार, संयुक्त सचिव जयश्री तथा संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के मंडप का दौरा किया। इस दौरान उनका स्वागत DAY-NRLM की निदेशक डॉ. मोलीश्री ने किया।
अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों से आई महिला उद्यमियों से बातचीत की और उनकी सफलता की कहानियों को जाना। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों का अवलोकन किया और ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
अधिकारियों ने कहा कि लखपति दीदियों की सफलता यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को उचित प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
खरीदारों और निर्यातकों ने दिखाई विशेष रुचि
भारत टेक्स 2026 के दौरान मंत्रालय के मंडप में देश और विदेश से आए खरीदारों, निर्यातकों, उद्योग प्रतिनिधियों और आगंतुकों की भारी भीड़ देखने को मिली। महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने, संभावित व्यापारिक साझेदारों से मिलने और बाजार की नई मांगों को समझने का अवसर मिला।
इस संवाद से महिलाओं को अपने उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग और विपणन रणनीति को बेहतर बनाने की जानकारी भी प्राप्त हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन ग्रामीण उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा का शानदार प्रदर्शन
प्रदर्शनी में भारत की विविध वस्त्र और हस्तशिल्प परंपराओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया। यहां आगंतुकों ने पट्टचित्र (Pattachitra), पेन कलमकारी (Pen Kalamkari), फुलकारी कढ़ाई (Phulkari Embroidery), एरी सिल्क (Eri Silk), पश्मीना सहित अनेक पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को करीब से देखा।
इन उत्पादों ने देश की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कला और ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विभिन्न राज्यों की महिला उद्यमियों ने स्थानीय कला और शिल्प को आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
‘सरस शक्ति कलेक्शन’ बना आकर्षण का केंद्र
प्रदर्शनी का सबसे बड़ा आकर्षण ‘सरस शक्ति कलेक्शन’ रहा। यह DAY-NRLM के तहत शुरू की गई एक विशेष प्रीमियम गिफ्टिंग पहल है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए चुनिंदा हस्तनिर्मित उत्पाद शामिल हैं।
इस पहल के अंतर्गत उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन, आकर्षक पैकेजिंग और बाजार की मांग के अनुरूप प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को कॉरपोरेट, संस्थागत और प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाना है, साथ ही भारत की पारंपरिक कला और शिल्प की मौलिकता को भी सुरक्षित रखना है।
प्रदर्शनी में आए अनेक खरीदारों और उद्योग प्रतिनिधियों ने सरस शक्ति कलेक्शन के उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई, जिससे महिला उद्यमियों के लिए भविष्य में नए व्यापारिक अवसर बनने की उम्मीद बढ़ी है।
DAY-NRLM से मजबूत हो रही ग्रामीण महिलाओं की आजीविका
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सहायता, कौशल विकास, उद्यमिता प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने जैसी व्यापक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस योजना के तहत महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें स्वरोजगार और लघु उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही उत्पाद निर्माण, ब्रांडिंग, विपणन और डिजिटल माध्यमों से बिक्री बढ़ाने के लिए भी लगातार सहायता दी जा रही है।
इन प्रयासों का परिणाम है कि आज लाखों ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर रही हैं।
10 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ीं स्वयं सहायता समूहों से
सरकार के अनुसार, DAY-NRLM के माध्यम से अब तक देशभर में 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। यह दुनिया के सबसे बड़े महिला सामुदायिक नेटवर्कों में से एक है।
इसी मजबूत नेटवर्क के आधार पर केंद्र सरकार ‘लखपति दीदी’ पहल को आगे बढ़ा रही है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक आय को एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंचाना और उन्हें सफल उद्यमी बनाना है।
सरकार ने हाल ही में 3 करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य हासिल कर लिया है और अब 6 करोड़ लखपति दीदियां तैयार करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसके लिए महिलाओं को कृषि आधारित उद्योग, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र निर्माण, डेयरी, पशुपालन और अन्य ग्रामीण उद्यमों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति
भारत टेक्स 2026 में ग्रामीण विकास मंत्रालय की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि ग्रामीण महिलाओं के उत्पाद केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की पूरी क्षमता है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से महिलाओं को खरीदारों, निर्यातकों और उद्योग जगत से सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी आय बढ़ाने और स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार उपलब्ध कराए जाते रहे, तो भारत का हस्तशिल्प और वस्त्र क्षेत्र वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत होगा। साथ ही, लखपति दीदी अभियान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

