देश में कृषि उत्पादों के बेहतर प्रसंस्करण, किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PM Kisan Sampada Yojana – PMKSY) लगातार सकारात्मक परिणाम दे रही है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा लागू इस योजना के तहत 30 जून 2026 तक 1,735 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 1,256 परियोजनाएं पूरी होकर संचालित हो रही हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रति वर्ष 294.21 लाख मीट्रिक टन Food Processing एवं Preservation Capacity का निर्माण हुआ है और देशभर में 9.16 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं। इसके साथ ही लगभग 37.76 लाख किसानों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला है।
यह जानकारी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना को मिल रही मजबूती
भारत में लंबे समय से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान (Post Harvest Loss) और कृषि उत्पादों के सीमित प्रसंस्करण की समस्या किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव डालती रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वर्ष 2017-18 से लागू प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) आधुनिक Food Processing Infrastructure विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
योजना के तहत Cold Chain, Food Processing Units, Storage Facilities, Packaging Infrastructure, Value Addition Centres तथा कृषि उत्पादों के संरक्षण और विपणन से जुड़ी आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादन को केवल कच्चे उत्पाद के रूप में बेचने तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उसे Value Addition के माध्यम से अधिक मूल्यवान बनाना है। सरकार आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास के जरिए किसानों, उद्यमियों और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) तैयार करना चाहती है।
योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं—
- आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना का विकास।
- कृषि उत्पादों के संरक्षण एवं प्रसंस्करण को बढ़ावा।
- फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी।
- किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना।
- भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना।
1,735 परियोजनाओं को मिली स्वीकृति
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2026 तक प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत कुल 1,735 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें से 1,256 परियोजनाएं पूर्ण होकर कार्यरत हैं।
इन परियोजनाओं के माध्यम से देश में हर वर्ष लगभग 294.21 लाख मीट्रिक टन खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण क्षमता विकसित हुई है। इससे कृषि उत्पादों के सुरक्षित भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।
37.76 लाख किसानों को मिला लाभ
खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के अनुसार अब तक इस योजना से लगभग 37.76 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण सुविधाओं के कारण कृषि उपज की मांग बढ़ी है, जिससे किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण होता है, तो किसानों को केवल कच्चा माल बेचने पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों का भी विकास होता है।
9.16 लाख रोजगार का हुआ सृजन
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के तहत स्थापित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग सेंटर और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से 9.16 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं।
इससे न केवल कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को रोजगार मिला है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए भी नए अवसर उपलब्ध हुए हैं।
PMKSY एक Demand Driven Scheme
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) पूरी तरह Demand Driven Scheme है। इसके अंतर्गत किसी भी राज्य के लिए अलग से बजट या निधि निर्धारित नहीं की जाती।
देशभर से Expression of Interest (EOI) के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। प्राप्त प्रस्तावों की पात्रता की जांच की जाती है और योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मूल्यांकन के बाद योग्य परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की जाती है। उपलब्ध बजट के आधार पर ही वित्तीय सहायता जारी की जाती है।
भरतपुर संसदीय क्षेत्र में नहीं मिली कोई परियोजना
लोकसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार अब तक राजस्थान के भरतपुर संसदीय क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत किसी भी परियोजना को स्वीकृति नहीं मिली है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि योजना राज्यवार आवंटन पर आधारित नहीं है, बल्कि पात्र प्रस्तावों की गुणवत्ता और उपलब्ध निधि के आधार पर स्वीकृति दी जाती है।
FPO को मिलती है विशेष रियायत
केंद्र सरकार किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organizations – FPOs) को इस योजना में विशेष प्रोत्साहन दे रही है। किसानों को संगठित कर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ने के उद्देश्य से FPO को सामान्य आवेदकों की तुलना में अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
एफपीओ को मिलने वाली प्रमुख रियायतें—
- अधिक वित्तीय सहायता।
- कम इक्विटी योगदान की शर्त।
- न्यूनतम बैंक ऋण आवश्यकता में छूट।
- न्यूनतम वित्तीय पूंजी की अनिवार्यता समाप्त।
- पात्रता मानकों में विशेष राहत।
इन प्रावधानों का उद्देश्य छोटे किसानों को सामूहिक रूप से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना है।
PMFME Scheme से भी मिल रही सहायता
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की PMFME Scheme (Pradhan Mantri Formalisation of Micro Food Processing Enterprises) भी किसान उत्पादक संगठनों और सूक्ष्म उद्यमों को मजबूत कर रही है।
इस योजना के तहत—
- सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना या उन्नयन के लिए 10 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 35 प्रतिशत Credit Linked Subsidy।
- 3 करोड़ रुपये तक की Common Infrastructure परियोजनाओं पर 35 प्रतिशत अनुदान।
- राज्य एवं क्षेत्रीय स्तर पर FPO समूहों को Branding एवं Marketing के लिए 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता।
इससे छोटे उद्यमियों और किसान समूहों को स्थानीय स्तर पर Food Processing Business स्थापित करने में मदद मिल रही है।
Post Harvest Loss कम करने पर विशेष फोकस
भारत में हर वर्ष बड़ी मात्रा में फल, सब्जियां, अनाज और अन्य कृषि उत्पाद उचित भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में खराब हो जाते हैं। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना का एक प्रमुख उद्देश्य Post Harvest Loss को कम करना है।
आधुनिक Cold Chain, Processing Units, Pack Houses, Food Testing Facilities और Logistics Infrastructure के विकास से कृषि उत्पादों का संरक्षण बेहतर तरीके से संभव हो रहा है। इससे खाद्य अपव्यय में कमी आने के साथ-साथ किसानों की आय भी बढ़ रही है।
खाद्य निर्यात को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना के विकास से भारत के Processed Food Products की गुणवत्ता में सुधार होगा और वे वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
योजना के माध्यम से तैयार हो रही आधुनिक इकाइयां कृषि उत्पादों की Export Competitiveness बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना आज भारत के Food Processing Sector को नई दिशा देने वाली प्रमुख योजनाओं में शामिल हो चुकी है। 1,735 स्वीकृत परियोजनाएं, 1,256 संचालित इकाइयां, 37.76 लाख लाभान्वित किसान, 9.16 लाख रोजगार और 294.21 लाख मीट्रिक टन वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना, Value Addition, Cold Chain Development, FPO Empowerment और PMFME Scheme जैसी पहलों के माध्यम से सरकार किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और भारत को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

