सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SVPUAT), मेरठ में विभिन्न महाविद्यालयों के शोध कार्यों की समीक्षा बैठक के क्रम में गुरुवार को जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय (College of Biotechnology) की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने की। इस दौरान महाविद्यालय में संचालित शोध परियोजनाओं, वैज्ञानिक उपलब्धियों, पेटेंट, शोध प्रकाशनों और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रविंद्र कुमार ने महाविद्यालय की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अब तक 8 पेटेंट प्राप्त किए हैं। इसके अलावा चालू वर्ष में 58 शोध पत्र (Research Papers) प्रकाशित किए गए हैं, जिनमें से 15 शोध पत्र 6 से अधिक इम्पैक्ट फैक्टर (Impact Factor) वाली अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं (International Journals) में प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि महाविद्यालय में किए जा रहे उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्यों का प्रमाण है।
5.7 करोड़ रुपये की छह शोध परियोजनाएं संचालित
डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में महाविद्यालय में लगभग 5.7 करोड़ रुपये की लागत वाली 6 प्रमुख अनुसंधान परियोजनाएं (Research Projects) संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त 27 नई परियोजनाओं के प्रस्ताव विभिन्न वित्तपोषण संस्थानों को भेजे गए हैं, जिनके स्वीकृत होने पर विश्वविद्यालय में अनुसंधान गतिविधियों को और अधिक गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य कृषि जैव प्रौद्योगिकी, पौध सुधार, जीन तकनीक, नैनो विज्ञान और कृषि नवाचारों के क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास करना है, जिससे किसानों को उन्नत तकनीकों का लाभ मिल सके।
ग्रामीण युवाओं के लिए नए डिग्री और डिप्लोमा कोर्स शुरू करने के निर्देश
बैठक के दौरान कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय में यथासंभव नए डिग्री एवं डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएं, ताकि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को आधुनिक कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण मिल सके।
उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा (Skill-based Education) युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में मदद करेगी तथा कृषि क्षेत्र में नए स्टार्टअप और उद्यम विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी।
जीन एडिटिंग पर शोध को बढ़ावा देने पर जोर
कुलपति ने वैज्ञानिकों से Gene Editing Technology पर शोध कार्यों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीन एडिटिंग तकनीक के माध्यम से किसानों के लिए रोग प्रतिरोधी (Disease Resistant) तथा अधिक उत्पादन देने वाली (High Yielding) नई फसल किस्में विकसित की जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य और नई बीमारियों की चुनौतियों को देखते हुए कृषि अनुसंधान में आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय को इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।
नैनो टेक्नोलॉजी के व्यवसायीकरण पर भी दिया जोर
समीक्षा बैठक में कुलपति ने महाविद्यालय में विकसित Nano Particle Technology के व्यवसायीकरण (Commercialization) पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विकसित नवाचारों को प्रयोगशाला तक सीमित न रखकर उद्योगों और किसानों तक पहुंचाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि नैनो तकनीक आधारित उत्पादों का सफल व्यवसायीकरण किया जाता है तो इससे विश्वविद्यालय की आय बढ़ेगी और किसानों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिलेगा।
नव नियुक्त शिक्षकों के लिए आसान हों शोध मार्गदर्शन के नियम
बैठक में कुलपति ने नव नियुक्त शिक्षकों को शोध छात्रों का Research Guide बनने के लिए निर्धारित न्यूनतम अर्हताओं को नियमानुसार सरल बनाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इससे युवा शिक्षकों को अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलेगा और विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध कार्यों को नई गति मिलेगी।
छात्रों के साथ अभिभावक जैसा व्यवहार करने की अपील
डॉ. त्रिवेणी दत्त ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षण कार्य तक सीमित न रहें, बल्कि एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए छात्रों की समस्याओं को समझें और उनका उचित मार्गदर्शन करें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय में नशा मुक्त अभियान तथा प्लास्टिक मुक्त परिसर अभियान को लगातार जारी रखा जाए ताकि विद्यार्थियों में सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।
शोध गुणवत्ता में लगातार सुधार
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय शोध गुणवत्ता के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। उच्च इम्पैक्ट फैक्टर वाली अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्र विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक क्षमता और अनुसंधान गुणवत्ता को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान शोध परियोजनाएं सफल होती हैं तो कृषि जैव प्रौद्योगिकी, पौध प्रजनन, जीन एडिटिंग और नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक के अंत में निदेशक शोध डॉ. कमल खिलाड़ी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. वी.पी. सिंह (कुलसचिव), डॉ. डी.के. सिंह (अधिष्ठाता, स्नातकोत्तर), डॉ. आर.एस. सेंगर, डॉ. पुष्पेंद्र ढाका, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. पुरुषोत्तम, डॉ. विपिन कुमार सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक, शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में आयोजित जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की समीक्षा बैठक में Gene Editing, Nano Technology, Research Projects, Patent, Skill Development और Commercialization जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष जोर दिया गया। विश्वविद्यालय की यह पहल आधुनिक कृषि अनुसंधान को नई दिशा देने के साथ-साथ किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि उद्योग के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

