कृषि क्षेत्र में जैविक एवं टिकाऊ पोषक प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि महत्त्वपूर्ण सूक्ष्मजीव ब्यूरो (ICAR-NBAIM), मऊ ने तीन जैव उर्वरक प्रौद्योगिकियों को व्यावसायिक उत्पादन और किसानों के बीच व्यापक प्रसार के लिए तेलंगाना स्थित भूमाइक्रोजेन एग्रीनोकुलेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित किया है। हस्तांतरित की गई प्रौद्योगिकियों में बायोएनपीके (BioNPK), बायोग्रो (BioGrow) और बायोफॉस (BioPhos) शामिल हैं।
इस प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का उद्देश्य कृषि सूक्ष्मजीव विज्ञान के क्षेत्र में विकसित वैज्ञानिक नवाचारों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य सूक्ष्मजीवी समाधानों में बदलना और उन्हें अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना है। इन जैव उर्वरक प्रौद्योगिकियों के व्यापक स्तर पर उत्पादन और उपयोग से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ाने और सतत फसल उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से संबंधित समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान कृषि भवन, नई दिल्ली में किया गया। इस अवसर पर भाकृअनुप-एनबीएआईएम के निदेशक डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव तथा भूमाइक्रोजेन एग्रीनोकुलेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्री आकाश मेडिचेरला और श्री नूका राजेश उपस्थित रहे। दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने समझौते से संबंधित औपचारिकताओं को पूरा किया।
कार्यक्रम में भाकृअनुप के उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव और भाकृअनुप की सहायक महानिदेशक (पादप संरक्षण एवं जैव सुरक्षा) डॉ. पूनम जसरोतिया भी उपस्थित थीं।
किसानों तक पहुंचेगी जैव उर्वरक तकनीक
यह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केवल अनुसंधान संस्थान और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। भाकृअनुप-एनबीएआईएम द्वारा विकसित इन तीनों प्रौद्योगिकियों को अब व्यावसायिक उत्पादन के लिए निजी कंपनी को उपलब्ध कराया गया है, जिससे इनका बड़े स्तर पर उत्पादन और किसानों के बीच प्रसार संभव हो सकेगा।
जैव उर्वरक कृषि में सूक्ष्मजीव आधारित समाधान उपलब्ध कराते हैं और पोषक तत्वों की उपलब्धता एवं उपयोग दक्षता को बेहतर बनाने में भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में इन प्रौद्योगिकियों का व्यापक स्तर पर उपयोग कृषि में संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग और मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने की दिशा में योगदान कर सकता है।
मृदा स्वास्थ्य और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग पर जोर
भाकृअनुप-एनबीएआईएम के अनुसार, BioNPK, BioGrow और BioPhos प्रौद्योगिकियों से मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ाने और टिकाऊ फसल उत्पादन को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।
कृषि में लगातार बढ़ते इनपुट उपयोग और मृदा स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच जैव उर्वरक आधारित तकनीकें किसानों के लिए वैकल्पिक एवं संसाधन-कुशल समाधान उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन प्रौद्योगिकियों को किसानों तक पहुंचाने से वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित सूक्ष्मजीवी समाधानों के व्यावहारिक इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
अनुसंधान से खेत तक तकनीक पहुंचाने की पहल
भाकृअनुप-एनबीएआईएम लंबे समय से कृषि सूक्ष्मजीव विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और तकनीकी विकास पर काम कर रहा है। संस्थान की ओर से इन प्रौद्योगिकियों का व्यावसायिक हस्तांतरण इस बात को रेखांकित करता है कि अनुसंधान आधारित तकनीकों को केवल प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यावसायिक स्तर पर उपलब्ध कराकर किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
इस सहयोग के माध्यम से निजी क्षेत्र को इन तकनीकों के व्यावसायिक उत्पादन और व्यापक प्रसार का अवसर मिलेगा, जबकि किसानों को सूक्ष्मजीवी आधारित कृषि समाधानों तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।
टिकाऊ और संसाधन-कुशल कृषि को मिलेगा बढ़ावा
कृषि उत्पादन में टिकाऊपन और संसाधनों के कुशल उपयोग पर बढ़ते जोर के बीच जैव उर्वरक प्रौद्योगिकियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। BioNPK, BioGrow और BioPhos के व्यावसायिक उत्पादन से किसानों के लिए जैव उर्वरक आधारित विकल्पों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भाकृअनुप-एनबीएआईएम और भूमाइक्रोजेन एग्रीनोकुलेंट्स के बीच हुआ यह सहयोग अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में भी एक उदाहरण है। इससे कृषि क्षेत्र में विकसित वैज्ञानिक तकनीकों के व्यावसायीकरण और उनके खेत स्तर तक पहुंचने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
संस्थान के अनुसार, यह पहल भाकृअनुप-एनबीएआईएम के उन सतत प्रयासों को दर्शाती है, जिनका उद्देश्य अनुसंधान आधारित प्रौद्योगिकियों का प्रयोगशाला से खेत तक तेजी से हस्तांतरण सुनिश्चित करना और सतत कृषि विकास को समर्थन देना है। तीनों जैव उर्वरक प्रौद्योगिकियों का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद इनके व्यापक प्रसार से किसानों को सूक्ष्मजीवी कृषि समाधानों का लाभ मिलने की संभावना है।
