भारत में खरपतवार नियंत्रण के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे हर्बिसाइड ग्लाइफोसेट को लेकर रेगुलेटरी स्तर पर एक अहम फैसला सामने आया है। रजिस्ट्रेशन कमिटी (RC) ने ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल को सीमित करने और इसे केवल प्रशिक्षित लोगों या पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर्स (PCOs) के माध्यम से कराने की सिफारिश की है। कमिटी ने यह कदम काम के दौरान होने वाले संभावित खतरों और रसायन के गलत इस्तेमाल से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए उठाया है।
हालांकि, इस फैसले को ग्लाइफोसेट पर तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू होने वाला प्रतिबंध नहीं माना जा सकता। रजिस्ट्रेशन कमिटी की ओर से की गई सिफारिश और नियामकीय राय को अब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के स्तर पर अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा। यानी फिलहाल ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है।
यह निर्णय 30 जुलाई, 2026 को हुई रजिस्ट्रेशन कमिटी की 474वीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता कृषि आयुक्त एवं रजिस्ट्रेशन कमिटी के चेयरमैन डॉ. पी. के. सिंह ने की। बैठक फरीदाबाद स्थित डायरेक्टरेट ऑफ प्लांट प्रोटेक्शन, क्वारंटाइन एंड स्टोरेज (DPPQS) के पीपीए सचिवालय में आयोजित हुई। बैठक में पौध संरक्षण और कीटनाशक नियमन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों तथा विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट पर हुई चर्चा
ग्लाइफोसेट को लेकर रजिस्ट्रेशन कमिटी के सामने एक विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट रखी गई। इस विशेषज्ञ समूह का गठन प्लांट प्रोटेक्शन एडवाइजर के स्तर पर किया गया था। समूह को ग्लाइफोसेट से संबंधित नए वैज्ञानिक साक्ष्यों और पेस्टिसाइड एसोसिएशन की ओर से हाल में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों तथा दावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
कमिटी ने विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन किया और बैठक के दौरान इस मुद्दे पर वैज्ञानिक स्तर पर चर्चा की। इसमें ग्लाइफोसेट के उपयोग, उससे जुड़े संभावित जोखिम, कार्यस्थल पर इसके संपर्क और इसके गलत या अनियंत्रित इस्तेमाल से संबंधित पहलुओं पर विचार किया गया।
रजिस्ट्रेशन कमिटी ने अपने पहले के विचारों को भी ध्यान में रखा और नए उपलब्ध वैज्ञानिक तथ्यों की समीक्षा के बाद सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया। कमिटी का निष्कर्ष था कि ग्लाइफोसेट के बिना किसी अतिरिक्त नियंत्रण के लगातार इस्तेमाल को जारी रखने के लिए उसे कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं मिला।
प्रशिक्षित लोगों से इस्तेमाल कराने की सिफारिश
बैठक में कमिटी ने ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल को नियंत्रित करने पर जोर दिया। इसके तहत यह सिफारिश की गई कि ग्लाइफोसेट का उपयोग प्रशिक्षित व्यक्तियों या पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर्स (PCOs) के माध्यम से कराया जाना चाहिए।
इस सिफारिश के पीछे मुख्य उद्देश्य काम से जुड़े खतरों को कम करना और ग्लाइफोसेट के गलत इस्तेमाल की संभावना को रोकना है। आम तौर पर किसी भी कृषि रसायन के सुरक्षित उपयोग के लिए उसकी सही मात्रा, सही समय, सही उपकरण और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। गलत मात्रा या गलत तरीके से किए गए छिड़काव से न केवल उपयोग करने वाले व्यक्ति के लिए जोखिम पैदा हो सकता है, बल्कि आसपास के वातावरण और गैर-लक्षित पौधों पर भी असर पड़ सकता है।
कमिटी का रुख इसी व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है। इसके अनुसार ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल को ऐसे लोगों तक सीमित करना उचित होगा, जिन्हें इसके सुरक्षित और निर्धारित तरीके से उपयोग की जानकारी हो।
मामला दिल्ली हाई कोर्ट में भी विचाराधीन
ग्लाइफोसेट से जुड़ा मामला न्यायिक स्तर पर भी विचाराधीन है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग इस विषय की समीक्षा दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुरूप कर रहा है। रजिस्ट्रेशन कमिटी की बैठक में भी इस तथ्य को ध्यान में रखा गया।
कमिटी ने स्पष्ट किया कि मामला अभी अदालत के विचाराधीन है। इसलिए उसके स्तर पर लिया गया फैसला अंतिम देशव्यापी प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण नियामकीय सिफारिश है, जिसके आधार पर संबंधित विभाग को आगे की कार्रवाई करनी है।
यही कारण है कि ग्लाइफोसेट के बारे में यह कहना कि भारत में तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, सही नहीं होगा। वर्तमान स्थिति में रजिस्ट्रेशन कमिटी ने इसके अनियंत्रित इस्तेमाल को जारी रखने के पक्ष में वैज्ञानिक आधार नहीं पाया है और नियंत्रित इस्तेमाल की सिफारिश की है।
अंतिम निर्णय कृषि मंत्रालय के स्तर पर
रजिस्ट्रेशन कमिटी ने सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमिटी (CIB&RC) के सचिव को निर्देश दिया है कि बैठक में लिए गए निर्णय से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को अवगत कराया जाए। इसके बाद विभाग इस विषय पर आगे का निर्णय लेगा।
इसका मतलब है कि ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल को लेकर अंतिम नियामकीय स्थिति कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आगामी फैसले पर निर्भर करेगी। विभाग उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों, विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट, न्यायालय के निर्देशों और रजिस्ट्रेशन कमिटी की सिफारिशों को ध्यान में रखकर आगे की कार्रवाई कर सकता है।
किसानों के लिए क्या मायने?
ग्लाइफोसेट का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में खरपतवार नियंत्रण के लिए किया जाता है। इसलिए इसके इस्तेमाल को लेकर किसी भी नियामकीय बदलाव का सीधा प्रभाव किसानों, कृषि इनपुट विक्रेताओं और पेस्ट कंट्रोल सेवाओं से जुड़े लोगों पर पड़ सकता है।
यदि भविष्य में प्रशिक्षित लोगों या PCOs के माध्यम से इसके इस्तेमाल को अनिवार्य किया जाता है, तो किसानों को ग्लाइफोसेट के छिड़काव के लिए प्रशिक्षित और अधिकृत सेवा प्रदाताओं पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे उपयोग के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन बेहतर तरीके से सुनिश्चित करने की कोशिश की जा सकती है।
दूसरी ओर, नियामकीय बदलाव लागू होने की स्थिति में किसानों और कृषि रसायन विक्रेताओं को नए नियमों की जानकारी रखना भी जरूरी होगा। खासकर उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देश, निर्धारित फसल, मात्रा, सुरक्षा अवधि और छिड़काव से संबंधित सावधानियों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा।
अभी पूर्ण प्रतिबंध नहीं
ग्लाइफोसेट पर रजिस्ट्रेशन कमिटी की 474वीं बैठक का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश में इस हर्बिसाइड के इस्तेमाल को लेकर नियामकीय दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत देता है। कमिटी ने बिना किसी नियंत्रण के इसके लगातार इस्तेमाल को उचित ठहराने वाला पर्याप्त वैज्ञानिक आधार नहीं पाया और संभावित जोखिमों को कम करने के लिए प्रशिक्षित व्यक्तियों या PCOs के माध्यम से इस्तेमाल की सिफारिश की।
लेकिन इस फैसले को तत्काल प्रभाव से पूरे भारत में ग्लाइफोसेट पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिलहाल यह रजिस्ट्रेशन कमिटी की सिफारिश है और अंतिम फैसला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के स्तर पर होना बाकी है।
474वीं बैठक में DPPQS, ICAR, सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमिटी तथा अन्य संबंधित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे। आने वाले समय में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का निर्णय यह स्पष्ट करेगा कि ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल को लेकर देश में किस तरह की नई नियामकीय व्यवस्था लागू होगी।

