भारतीय कृषि को बदलते मौसम और जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक सक्षम और लचीला बनाने के उद्देश्य से फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सहयोग से तथा श्री कोंडा लक्ष्मण तेलंगाना हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी (SKLTGHU) के अकादमिक सहयोग से एक विशेष वेबिनार का आयोजन करने जा रहा है। “Building Climate-Resilient Agriculture: Addressing Abiotic and Biotic Stresses, Including El Niño and Its Potential Impact on Kharif and Rabi Crops” विषय पर आयोजित यह वेबिनार 21 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे से शुरू होगा।
वेबिनार का उद्देश्य भारतीय कृषि के सामने उभर रहे मौसम और जलवायु संबंधी जोखिमों पर विशेषज्ञों के बीच चर्चा करना तथा कृषि क्षेत्र में बेहतर तैयारी और जलवायु-लचीलेपन को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श करना है। कार्यक्रम में सरकार, मौसम विज्ञान, कृषि शिक्षा, अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और डिजिटल तकनीक से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर आएंगे।
कार्यक्रम में मौसमी मौसम और मानसून के पूर्वानुमान के साथ-साथ खरीफ फसलों के लिए मौसम आधारित कृषि तैयारी, जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए डिजिटल एवं GIS आधारित समाधान और कृषि क्षेत्र के सामने मौजूद जैविक एवं अजैविक तनावों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, El Niño के खरीफ और रबी फसलों पर संभावित प्रभाव को भी चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल किया गया है।
मौसम आधारित कृषि योजना पर रहेगा विशेष जोर
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से प्रस्तुत किया जाने वाला Seasonal Weather and Monsoon Outlook for Kharif and Weather-Informed Agricultural Preparedness होगा। यह प्रस्तुति डॉ. शेषकुमार गोरोशी, Scientist & Head, Agromet-Advisory Service Division तथा Project Director, Gramin Krishi Mausam Sewa, IMD, Ministry of Earth Sciences, New Delhi द्वारा दी जाएगी।
कार्यक्रम के एजेंडा के अनुसार डॉ. गोरोशी की प्रस्तुति दोपहर 2:05 बजे से 2:15 बजे तक होगी। इसमें मौसमी मौसम एवं मानसून की स्थिति तथा मौसम आधारित कृषि तैयारी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी जाएगी।
कृषि क्षेत्र में मौसम संबंधी जानकारी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। बुवाई से लेकर सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, फसल सुरक्षा और कटाई तक कई कृषि गतिविधियां मौसम की परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं। ऐसे में मौसम आधारित कृषि सलाह किसानों और कृषि से जुड़े संस्थानों को बेहतर समय पर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
खरीफ और रबी फसलों पर जलवायु जोखिमों की चर्चा
वेबिनार की थीम में Abiotic and Biotic Stresses यानी जैविक एवं अजैविक तनावों को प्रमुखता दी गई है। कृषि क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी, सूखा, अनियमित वर्षा, अत्यधिक वर्षा और अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियां फसलों के लिए अजैविक तनाव पैदा कर सकती हैं। वहीं कीट और रोग जैसे कारक जैविक तनाव के रूप में फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।
इन चुनौतियों के बीच मौसम और जलवायु संबंधी पूर्वानुमानों को कृषि योजना के साथ जोड़ना महत्वपूर्ण हो जाता है। वेबिनार में इस बात पर चर्चा होगी कि कृषि क्षेत्र इन जोखिमों के लिए किस तरह बेहतर तैयारी कर सकता है।
कार्यक्रम में El Niño और खरीफ एवं रबी फसलों पर इसके संभावित प्रभाव को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक और क्षेत्रीय मौसम परिस्थितियों के कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को समझना और तैयारी के लिए विशेषज्ञ दृष्टिकोण सामने लाना है।
विशेषज्ञों के बीच होगा पैनल विमर्श
वेबिनार में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की जाएगी। यह पैनल सत्र दोपहर 2:15 बजे से 2:45 बजे तक चलेगा।
पैनल में AVM G. P. Sharma (Retd.), President (Meteorology & Climate Change), Skymet Weather Services Pvt. Ltd.; डॉ. D. Rajireddy, Vice Chancellor, Sri Konda Laxman Telangana Horticultural University (SKLTGHU), Siddipet, Telangana; सुश्री Nupoor Prasad, National GIS Expert एवं National Project Coordinator, FAO India; डॉ. Sunil Kumar Dubey, HOO एवं Deputy Director, Mahalanobis National Crop Forecast Centre; और Mr. Nalin Rawal, Director – GIS & Consulting, Agriwatch शामिल होंगे। एजेंडा में CRISIL का भी उल्लेख पैनल प्रतिभागी के रूप में किया गया है।
इन विशेषज्ञों की भागीदारी से मौसम विज्ञान, जलवायु परिवर्तन, कृषि, फसल पूर्वानुमान और डिजिटल तकनीक जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के दृष्टिकोण को एक साथ समझने का अवसर मिलेगा।
डिजिटल और GIS आधारित समाधानों पर भी चर्चा
जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उपग्रह आधारित जानकारी, GIS, मौसम डेटा, फसल पूर्वानुमान और डिजिटल कृषि सलाह जैसे समाधान कृषि क्षेत्र में जोखिमों की पहचान और प्रबंधन में उपयोगी हो सकते हैं।
वेबिनार में सुश्री Nupoor Prasad, National GIS Expert और National Project Coordinator, FAO India, की भागीदारी के माध्यम से GIS आधारित समाधानों पर भी चर्चा होगी। GIS तकनीक के जरिए विभिन्न क्षेत्रों की कृषि, मौसम और भौगोलिक जानकारी को एकीकृत करके उसका विश्लेषण किया जा सकता है।
ऐसे डिजिटल समाधान नीति निर्माण, फसल निगरानी, कृषि योजना और जोखिम प्रबंधन को अधिक डेटा आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वेबिनार में कृषि को जलवायु के प्रति अधिक लचीला बनाने में डिजिटल और GIS समाधानों की संभावित भूमिका पर विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे।
कृषि मौसम सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत
भारतीय कृषि में मौसम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में मानसून का समय, वर्षा का वितरण, तापमान और मौसम की चरम परिस्थितियां किसानों के उत्पादन निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे में कृषि मौसम सेवाओं के माध्यम से किसानों तक समय पर उपयोगी मौसम जानकारी पहुंचाना कृषि जोखिम प्रबंधन का अहम हिस्सा है। IMD की Gramin Krishi Mausam Sewa के माध्यम से कृषि क्षेत्र के लिए मौसम आधारित जानकारी और सलाह से संबंधित कार्य किए जाते हैं।
वेबिनार में मौसम पूर्वानुमान को कृषि निर्णयों के साथ जोड़ने और मौसम आधारित कृषि तैयारी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों को मौसम की संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करने के महत्व को समझने में मदद मिलेगी।
FICCI की ओर से होगा कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम में श्री Siraj Hussain, Advisor, Food Processing, FICCI और भारत सरकार के Ministry of Agriculture & Farmers Welfare तथा Ministry of Food Processing Industries के पूर्व Secretary, Session Chair एवं Moderator की भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम के एजेंडा के अनुसार श्री सिराज हुसैन द्वारा 2:00 से 2:05 बजे तक Context Setting किया जाएगा। विशेषज्ञों की प्रस्तुतियों और पैनल चर्चा के बाद वे 2:55 से 3:00 बजे तक Concluding Remarks भी देंगे।
सवाल-जवाब सत्र में विशेषज्ञों से संवाद
वेबिनार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Interactive Q&A Session होगा। पैनल चर्चा के बाद 2:45 से 2:55 बजे तक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया जाएगा।
इस सत्र में प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के सामने अपने सवाल रखने और जलवायु, मौसम, फसल तैयारी, कृषि मौसम सलाह तथा डिजिटल समाधानों से संबंधित विषयों पर सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा।
यह सत्र विशेष रूप से कृषि क्षेत्र से जुड़े शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों के लिए उपयोगी हो सकता है, क्योंकि वे अपने क्षेत्र से जुड़े व्यावहारिक सवाल विशेषज्ञों के सामने रख सकेंगे।
कृषि क्षेत्र में जलवायु लचीलापन बढ़ाने पर जोर
जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र के सामने मौसम संबंधी अनिश्चितताओं और जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे समय में कृषि उत्पादन को केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित रखने के बजाय मौसम और जलवायु संबंधी वैज्ञानिक जानकारी को कृषि योजना में शामिल करना आवश्यक हो गया है।
मौसम पूर्वानुमान, कृषि मौसम सलाह, फसल पूर्वानुमान, GIS और डिजिटल तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से कृषि क्षेत्र को संभावित जोखिमों के प्रति पहले से तैयार करने में सहायता मिल सकती है। साथ ही, जैविक और अजैविक तनावों के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
FICCI और IMD का यह वेबिनार इसी व्यापक उद्देश्य के तहत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध करा रहा है। कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को एक साथ रखा गया है, जिससे जलवायु-अनुकूल कृषि की दिशा में समग्र दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिल सकती है।
21 अगस्त को होगा वेबिनार
यह वेबिनार शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को दोपहर 2:00 बजे से आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम से होगा। एजेंडा में कार्यक्रम का स्थान FICCI, Federation House, New Delhi दिया गया है।
FICCI ने इच्छुक प्रतिभागियों से समय रहते पंजीकरण करने और ईमेल के माध्यम से अपनी भागीदारी की पुष्टि करने का आग्रह किया है। पंजीकरण के बाद वेबिनार का joining link पंजीकृत प्रतिभागियों के साथ साझा किया जाएगा।
वेबिनार के लिए पंजीकरण
इच्छुक प्रतिभागी नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से FICCI के वेबिनार के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं:
वेबिनार के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करें
वेबिनार की प्रमुख जानकारी:
तारीख: 21 अगस्त 2026, शुक्रवार
समय: दोपहर 2:00 बजे से
माध्यम: वर्चुअल
विषय: जलवायु-अनुकूल कृषि, मौसम आधारित कृषि तैयारी, जैविक एवं अजैविक तनाव, El Niño का संभावित प्रभाव तथा डिजिटल/GIS समाधान
भारतीय कृषि को बदलती जलवायु और मौसम संबंधी चुनौतियों के प्रति अधिक तैयार करने के लिए वैज्ञानिक जानकारी, मौसम पूर्वानुमान और डिजिटल तकनीक का प्रभावी उपयोग आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। FICCI, IMD और SKLTGHU के सहयोग से आयोजित यह वेबिनार इसी दिशा में विशेषज्ञों के विचारों और अनुभवों को एक मंच पर लाने का प्रयास है।
कार्यक्रम में मौसमी मौसम एवं मानसून आउटलुक, खरीफ फसलों के लिए मौसम आधारित तैयारी, El Niño के संभावित प्रभाव, जैविक एवं अजैविक तनावों और GIS आधारित डिजिटल समाधानों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञों के पैनल और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को कृषि क्षेत्र में जलवायु जोखिमों से निपटने के व्यावहारिक एवं तकनीकी पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा।
ऐसे संवाद कृषि क्षेत्र में मौसम संबंधी जानकारी के बेहतर इस्तेमाल, समय पर कृषि निर्णय और जलवायु-लचीली कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़े इच्छुक प्रतिभागी 21 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे इस महत्वपूर्ण वेबिनार में शामिल होने के लिए अग्रिम पंजीकरण कर सकते हैं।
