Horse Care Rainy Season: बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन घोड़े पालने वाले लोगों के लिए यह कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। लगातार बारिश, नमी, कीचड़, गंदा पानी और गीला अस्तबल घोड़े की सेहत पर असर डाल सकते हैं। खासकर खुर और त्वचा से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बरसात शुरू होते ही घोड़े की रोजाना देखभाल के तरीके में कुछ बदलाव करना जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक गीली और कीचड़ वाली जगह पर रहने से घोड़े के खुर मुलायम और कमजोर हो सकते हैं। नमी और गंदगी के कारण थ्रश, व्हाइट लाइन डिजीज और खुर में फोड़े जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। वहीं बार-बार खुर का गीला होकर सूखना भी उसकी मजबूती को प्रभावित कर सकता है। (The Horse) ऐसे में सवाल है कि बारिश के दिनों में घोड़े को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए क्या किया जाए? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
1. सबसे बड़ी चुनौती है कीचड़ और लगातार नमी
मानसून में घोड़े की देखभाल करते समय सबसे पहले उसके रहने की जगह पर ध्यान देना चाहिए। अस्तबल या बाड़े के आसपास पानी जमा नहीं होना चाहिए। लगातार पानी जमा रहने से जमीन कीचड़ में बदल जाती है और घोड़े को घंटों उसी में खड़ा रहना पड़ सकता है।
सबसे ज्यादा कीचड़ उन स्थानों पर बनता है जहां घोड़े बार-बार आते-जाते या खड़े होते हैं। इनमें गेट, पानी पीने की जगह, चारा रखने का स्थान और शेल्टर के आसपास का हिस्सा शामिल है। पानी की निकासी बेहतर करने और इन जगहों पर सूखी तथा मजबूत सतह उपलब्ध कराने से समस्या काफी कम की जा सकती है। जहां संभव हो वहां नालियों और उचित ड्रेनेज की व्यवस्था रखें। छत से गिरने वाला पानी भी सीधे अस्तबल या बाड़े के अंदर नहीं जाना चाहिए।
2. घोड़े के खुरों पर दें सबसे ज्यादा ध्यान
बारिश में घोड़े के खुर विशेष देखभाल मांगते हैं। लगातार गीली जमीन पर खड़े रहने से खुर जरूरत से ज्यादा मुलायम हो सकते हैं। इससे उनकी संरचना कमजोर पड़ सकती है और उनमें संक्रमण या दूसरी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। घोड़े के खुर रोज देखें और उनमें फंसी मिट्टी तथा गंदगी को साफ रखें। यह भी जांचें कि खुर में असामान्य बदबू, ज्यादा नरमी, दरार, सूजन या किसी तरह का घाव तो नहीं है।
अगर घोड़ा चलते समय अचानक लंगड़ाने लगे, पैर जमीन पर रखने में परेशानी हो या खुर में कोई असामान्य बदलाव दिखाई दे तो पशु चिकित्सक या योग्य फैरियर से संपर्क करना बेहतर है। नियमित ट्रिमिंग और जरूरत के मुताबिक सही शूइंग भी महत्वपूर्ण है। University of Minnesota Extension के अनुसार नियमित खुर देखभाल, संतुलित खुर, उचित पोषण और फैरियर तथा पशु चिकित्सक के साथ नियमित संपर्क खुर की समस्याओं को कम करने में मदद करता है।
3. बार-बार गीले और सूखे होने से भी खुरों को नुकसान
सिर्फ लगातार पानी में रहना ही समस्या नहीं है। बार-बार गीला होने और फिर तेजी से सूखने की प्रक्रिया भी खुरों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। नमी मिलने पर खुर की बाहरी संरचना फैलती है और सूखने पर सिकुड़ती है। यह प्रक्रिया बार-बार होने से छोटी दरारें पैदा हो सकती हैं और खुर कमजोर हो सकता है। विशेषज्ञ इसलिए घोड़े को लगातार बहुत गीले और बहुत सूखे वातावरण के बीच बार-बार ले जाने से बचने की सलाह देते हैं।
4. अस्तबल को सूखा और साफ रखना बेहद जरूरी
मानसून में साफ अस्तबल घोड़े की अच्छी सेहत की बुनियाद है। छत से पानी टपक रहा हो, फर्श लगातार गीला रहता हो या बिछावन नमी से भरा हो तो परेशानी बढ़ सकती है। अस्तबल में हवा का आना-जाना भी जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं कि घोड़े को तेज हवा या बारिश के सामने रखा जाए। कोशिश होनी चाहिए कि जगह हवादार रहे लेकिन बारिश का पानी सीधे अंदर न पहुंचे। गीला बिछावन नियमित रूप से हटाएं। गोबर और गंदगी को जमा न होने दें। साफ और सूखी जगह मिलने से घोड़े के खुरों को भी कीचड़ से बाहर निकलकर सूखने का मौका मिलता है।
5. बारिश में त्वचा की नियमित जांच करें
नमी केवल खुरों को ही प्रभावित नहीं करती। लगातार गीली त्वचा, मिट्टी और गंदगी कुछ घोड़ों में त्वचा संबंधी परेशानियों को बढ़ा सकती है। इसलिए रोजाना घोड़े के शरीर को ध्यान से देखें। खासकर पैरों के निचले हिस्से और उन स्थानों की जांच करें जहां लंबे समय तक नमी रह सकती है। अगर त्वचा पर असामान्य लालिमा, सूजन, बाल झड़ना, घाव या कोई दूसरा बदलाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें। खुद से अलग-अलग दवाएं लगाने की जगह पशु चिकित्सक से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।
6. बारिश में भी साफ पीने का पानी जरूरी
यह सोच गलत है कि बरसात के मौसम में घोड़े को पानी की जरूरत कम हो जाती है। उसे हर समय साफ और ताजा पानी उपलब्ध होना चाहिए। पानी के बर्तन और टैंक नियमित रूप से साफ करें। उनमें मिट्टी, काई या दूसरी गंदगी जमा न होने दें। बारिश का जमा हुआ पानी पीने के पानी का विकल्प नहीं है। घोड़े की पानी पीने की आदत पर भी नजर रखें। अगर वह सामान्य से बहुत कम पानी पी रहा है या उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आता है तो इसे गंभीरता से लें।
7. चारे को बारिश और नमी से बचाना जरूरी
मानसून में चारा संभालकर रखना भी बड़ी चुनौती है। बारिश या ज्यादा नमी के संपर्क में आने से चारा खराब हो सकता है। सूखा चारा ऐसी जगह रखें जहां बारिश का पानी न पहुंचे और हवा का आवागमन हो। चारे को देने से पहले उसकी स्थिति जरूर जांचें। बदबूदार, फफूंद लगा या संदिग्ध चारा घोड़े को नहीं देना चाहिए। घोड़े के आहार में अचानक बड़े बदलाव भी न करें। यदि पोषण में बदलाव की जरूरत महसूस हो तो पशु चिकित्सक या इक्वाइन न्यूट्रिशन विशेषज्ञ की सलाह उपयोगी हो सकती है। संतुलित पोषण अच्छी खुर गुणवत्ता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
8. जमीन फिसलन भरी है तो एक्सरसाइज में सावधानी
बारिश के बाद मैदान काफी फिसलन भरा हो सकता है। गहरे कीचड़ और खराब सतह पर घोड़े को तेज दौड़ाना या कठिन अभ्यास कराना चोट का जोखिम बढ़ा सकता है। गीली और कीचड़ वाली जमीन पर घोड़े के पैर फिसल सकते हैं। गहरा कीचड़ उसकी सामान्य चाल को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों ने खराब और गहरी कीचड़ वाली सतह को चोट के जोखिम से जोड़ा है। इसलिए अभ्यास से पहले मैदान की स्थिति जांचना जरूरी है। जहां जमीन बहुत फिसलन भरी हो वहां प्रशिक्षण की तीव्रता कम करना सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
9. बारिश में कीड़े-मच्छरों से भी बचाव जरूरी
बरसात के दौरान रुका हुआ पानी कीड़ों और मच्छरों की संख्या बढ़ा सकता है। इसलिए अस्तबल के आसपास पानी जमा न होने देना सिर्फ सफाई का मामला नहीं है। नालियां साफ रखें, गोबर का नियमित निपटान करें और पानी के खुले बर्तनों को लंबे समय तक गंदा न रहने दें। कीचड़ और जैविक गंदगी वाले क्षेत्रों में कीड़ों की समस्या बढ़ सकती है। किसी भी कीटनाशक या दूसरे रासायनिक उत्पाद का इस्तेमाल पशु चिकित्सक की सलाह और उत्पाद के निर्देश के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
10. रोजाना कुछ मिनट का हेल्थ चेक बहुत काम आएगा
घोड़े की नियमित निगरानी मानसून में छोटी समस्या को जल्दी पहचानने में मदद करती है। हर दिन उसके व्यवहार, चाल, भूख, पानी पीने की आदत, त्वचा और खुरों को देखें। घोड़ा सामान्य रूप से चल रहा है या नहीं, खाना ठीक से खा रहा है या नहीं और उसका व्यवहार पहले जैसा है या नहीं, इन साधारण बातों से भी काफी जानकारी मिल सकती है। अचानक सुस्ती, खाना छोड़ना, लंगड़ाना, सूजन, घाव या असामान्य व्यवहार दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
11. फैरियर की नियमित विजिट न भूलें
कई लोग बरसात के दौरान घोड़े की सवारी कम होने पर खुरों की नियमित देखभाल भी कम कर देते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं है। खुर बढ़ते रहते हैं और उन्हें संतुलित रखने की जरूरत होती है। ट्रिमिंग या शूइंग कितने अंतराल पर होनी चाहिए, यह घोड़े, मौसम, गतिविधि और खुर की वृद्धि पर निर्भर करता है। University of Minnesota Extension सामान्य तौर पर गर्म मौसम में लगभग 6 से 8 सप्ताह के अंतराल पर ट्रिमिंग या शूइंग की जानकारी देता है, लेकिन हर घोड़े की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए अपने फैरियर से व्यक्तिगत शेड्यूल तय करना बेहतर है। (University of Minnesota Extension)
12. जलभराव रोकना लंबे समय का समाधान
अगर हर बारिश में अस्तबल और पैडॉक कीचड़ में बदल जाता है तो केवल रोज सफाई करना पर्याप्त नहीं होगा। मूल समस्या ड्रेनेज की हो सकती है।
पानी किस दिशा से आता है, छत का पानी कहां गिरता है और किन जगहों पर सबसे ज्यादा जमा होता है, इसकी पहचान करें। जरूरत के मुताबिक नालियां, पानी मोड़ने की व्यवस्था और मजबूत ड्रेनेज वाली सतह तैयार की जा सकती है।
गेट, फीडर और पानी की जगह जैसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले क्षेत्रों में बेहतर ड्रेनेज वाली मजबूत सतह लंबे समय में कीचड़ को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। (The Horse)
13. बारिश के बाद पूरे शरीर की जांच करें
अगर घोड़ा बारिश में भीग गया है तो उसे सुरक्षित और सूखी जगह मिलने देना जरूरी है। शरीर पर जमी ज्यादा मिट्टी और गंदगी साफ करें और पैरों तथा खुरों की जांच करें। खासकर यह देखें कि कहीं चोट, कट, सूजन या खुर में कोई बाहरी चीज तो नहीं फंसी है। यदि खुर या पैर में घाव नजर आता है तो उसे अनदेखा न करें। खुर के घाव जमीन के बहुत करीब होने के कारण गंदगी के संपर्क में आसानी से आ सकते हैं और कुछ मामलों में पशु चिकित्सकीय जांच की जरूरत पड़ सकती है।
14. हर घोड़े की जरूरत एक जैसी नहीं होती
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि घोड़ों की देखभाल के लिए एक ही नियम सभी पर लागू नहीं किया जा सकता। घोड़े की उम्र, नस्ल, काम का स्तर, स्वास्थ्य, खुरों की स्थिति और स्थानीय मौसम के अनुसार जरूरत बदल सकती है। जिस घोड़े के खुर पहले से कमजोर हैं, उसे बरसात में अतिरिक्त निगरानी की जरूरत पड़ सकती है। इसी तरह बूढ़े घोड़े, बीमारी से ठीक हो रहे घोड़े या पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या वाले घोड़े के लिए पशु चिकित्सक की व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर है।
बरसात में इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
बारिश के मौसम में घोड़े में अचानक लंगड़ापन, खुर से असामान्य दुर्गंध, खुर या पैर में सूजन, घाव, त्वचा में बड़ा बदलाव, भूख में कमी, ज्यादा सुस्ती या व्यवहार में अचानक परिवर्तन दिखाई दे तो पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समस्या को शुरुआती स्तर पर पहचानना अक्सर उसे गंभीर होने से रोकने में मदद करता है।
मानसून में घोड़े की देखभाल का आसान फॉर्मूला
बरसात में घोड़े की अच्छी देखभाल का सबसे आसान तरीका है: साफ अस्तबल, सूखी जगह, बेहतर ड्रेनेज, साफ पानी, सुरक्षित चारा, नियमित खुर जांच और रोजाना स्वास्थ्य निगरानी। बारिश को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही व्यवस्था से उसके कारण पैदा होने वाली कई परेशानियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
सबसे ज्यादा ध्यान खुरों और जमीन की स्थिति पर देना चाहिए। लंबे समय तक कीचड़ और नमी में रहने से खुर मुलायम हो सकते हैं और संक्रमण जैसी समस्याओं के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। दूसरी तरफ बार-बार गीले और सूखे होने का चक्र भी खुरों को कमजोर कर सकता है।
इसलिए मानसून आने से पहले ही अस्तबल की छत, नालियां, पानी की निकासी, चारे के भंडारण और पैडॉक की स्थिति जांच लेना समझदारी है। नियमित फैरियर और पशु चिकित्सक की मदद के साथ छोटी-छोटी सावधानियां घोड़े को पूरे बरसाती मौसम में स्वस्थ और आरामदायक रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
