बुंदेलखंड देश के उन क्षेत्रों में शामिल रहा है जहां कम और अनियमित वर्षा, बार-बार सूखा, पानी की कमी और सिंचाई की सीमित सुविधाओं ने खेती को लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण बनाया है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए Bundelkhand Special Package शुरू किया था। इसका उद्देश्य केवल किसानों को तत्काल राहत देना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, सिंचाई, कृषि, बागवानी, पशुपालन, डेयरी और कृषि विपणन जैसी सुविधाओं को विकसित करके क्षेत्र को लंबे समय के लिए सूखे के प्रति अधिक सक्षम बनाना था।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में बुंदेलखंड के लिए ₹7,266 करोड़ का विशेष पैकेज मंजूर किया था। इसमें उत्तर प्रदेश के लिए ₹3,506 करोड़ और मध्य प्रदेश के लिए ₹3,760 करोड़ का प्रावधान बताया गया। बाद में इसे 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि 2012-17 में भी जारी रखने की मंजूरी दी गई।
यह समझना जरूरी है कि Bundelkhand Package कोई एक सामान्य Direct Benefit Transfer यानी DBT योजना नहीं थी, जिसमें हर पात्र किसान एक ही पोर्टल पर आवेदन करके निश्चित रकम प्राप्त करता हो। यह कई विभागों और विकास कार्यों को जोड़ने वाला एक Integrated Development Package था। इसलिए किसान को मिलने वाला लाभ संबंधित component, राज्य, जिले और विभाग द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम पर निर्भर करता है।
किन राज्यों में लागू किया गया बुंदेलखंड पैकेज?
Bundelkhand Special Package मुख्य रूप से दो राज्यों, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए स्वीकृत किया गया था। उत्तर प्रदेश में इसके अंतर्गत सात जिले शामिल किए गए थे:
झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट।
मध्य प्रदेश में छह जिले शामिल थे:
छतरपुर, दमोह, दतिया, पन्ना, सागर और टीकमगढ़।
इस प्रकार मूल पैकेज कुल 13 जिलों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार की Planning Department वेबसाइट भी बताती है कि राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र के सात जिलों के लिए वित्त वर्ष 2009-10 में विशेष सूखा राहत के रूप में बुंदेलखंड पैकेज स्वीकृत किया गया था।
बुंदेलखंड पैकेज क्यों शुरू किया गया?
बुंदेलखंड में खेती की सबसे बड़ी समस्याओं में पानी की उपलब्धता और वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता शामिल रही है। इसलिए package की strategy का बड़ा हिस्सा Water Resource Management पर केंद्रित किया गया।
इसके तहत Rainwater Harvesting, Watershed Development, irrigation projects, dug wells, farm ponds और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से पानी को रोकने तथा खेती के लिए उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। साथ ही किसानों की आमदनी केवल पारंपरिक फसल पर निर्भर न रहे, इसके लिए Crop Diversification, Horticulture, Animal Husbandry और Dairy Development को भी महत्व दिया गया।
बुंदेलखंड पैकेज के तहत कौन-कौन से कृषि कार्य शामिल थे?
इस package को केवल खेत में फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा गया। केंद्र सरकार की जानकारी के अनुसार इसके अंतर्गत Watershed Development, Surface Irrigation Projects, Dug Wells, Stop Dams, Afforestation, Storage and Market Yards, Goats and Bulls Distribution, Fodder Storage, Dairy Development, Drinking Water Supply, Crop Development, Horticulture Development और Marketing जैसे intervention शामिल किए गए।
1. Water Conservation और Watershed Development
बुंदेलखंड जैसे कम वर्षा वाले इलाके में बरसात के पानी को बचाना बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कारण Watershed Development package की प्रमुख गतिविधियों में शामिल था। इससे वर्षा के पानी को रोकने, मिट्टी में नमी बनाए रखने, भूजल recharge को बेहतर करने और खेती योग्य भूमि की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया।
2. Irrigation Development
सिंचाई के लिए नए कुएं, farm ponds, stop dams तथा विभिन्न surface irrigation projects पर काम किया गया।मूल package में दोनों राज्यों में 20,000-20,000 नए dug wells और लगभग 30,000 farm ponds बनाने जैसे लक्ष्य भी निर्धारित किए गए थे। इनका उद्देश्य किसान को केवल मानसून पर निर्भर रहने के बजाय फसल के महत्वपूर्ण चरणों में सिंचाई का विकल्प उपलब्ध कराना था।
3. Micro Irrigation
कृषि component में Micro-Irrigation को भी जगह दी गई थी। उपलब्ध सरकारी package document में contingency cropping, seed multiplication/seed banks, micro-irrigation तथा warehousing और marketing infrastructure जैसे कृषि components का उल्लेख मिलता है। (UP Planning Department) Micro Irrigation का उद्देश्य कम पानी में अधिक क्षेत्र तक सिंचाई पहुंचाने और Water Use Efficiency बढ़ाने में मदद करना है।
4. Crop Development और Crop Diversification
बार-बार सूखा पड़ने वाले क्षेत्र में केवल एक प्रकार की खेती पर निर्भरता किसान के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए package में कृषि तकनीक के विस्तार और crop diversification पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य बेहतर कृषि तकनीक, उपयुक्त फसल प्रणाली और क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार खेती को बढ़ावा देकर Farm Productivity में सुधार करना था। (
5. Horticulture Development
बुंदेलखंड में कम पानी में संभव बागवानी को किसानों की अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनाने की सोच भी package का हिस्सा थी। विशेष रूप से drought-resistant Arid Horticulture को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई गई, ताकि किसान की आय केवल अनाज उत्पादन तक सीमित न रहे।
6. Animal Husbandry
पशुपालन बुंदेलखंड के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण Alternative Income Source बन सकता है। इसी वजह से package में पशुपालन से संबंधित गतिविधियां शामिल की गईं।सरकारी जानकारी में goats और bulls के वितरण तथा fodder storage जैसी गतिविधियों का भी उल्लेख है। (Press Information Bureau) खेती से आय कम होने की स्थिति में पशुपालन किसानों को अतिरिक्त livelihood support देने में मदद कर सकता है।
7. Dairy Development
Dairy Development भी package का महत्वपूर्ण हिस्सा था। मध्य प्रदेश में dairy cooperative societies, milk collection और bulk milk cooling जैसी व्यवस्थाओं पर भी काम किया गया। उपलब्ध सरकारी अध्ययन में आगे dairy processing और cooperative network को मजबूत करने की सिफारिश भी की गई। (NITI Aayog Library) इससे किसानों को Regular Cash Flow का अतिरिक्त स्रोत मिलने की संभावना बढ़ती है।
8. Storage और Agricultural Marketing
फसल पैदा करना ही पर्याप्त नहीं है। किसान को उपज रखने और सही बाजार तक पहुंचाने की सुविधा भी चाहिए।
इसी कारण package में Warehousing, Market Yard और Agricultural Marketing Infrastructure पर भी निवेश किया गया। केंद्र सरकार ने बाद में बुंदेलखंड में package के तहत बने warehousing और marketing infrastructure के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया था। (Press Information Bureau)
किसानों को बुंदेलखंड पैकेज से क्या फायदे हुए?
इस package का सबसे बड़ा संभावित फायदा पानी और सिंचाई से जुड़ी सुविधाओं का विकास था। Water harvesting, irrigation और watershed projects से किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया गया। दूसरा महत्वपूर्ण फायदा Income Diversification था। किसान को खेती के साथ horticulture, dairy और animal husbandry से जोड़कर आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार करने की कोशिश की गई।
NITI Aayog की वार्षिक रिपोर्ट में दिए गए impact assessment के अनुसार package से irrigation canals के अंतिम हिस्सों तक पानी पहुंचाने, लाभार्थियों और किसानों की आय तथा रोजगार में सुधार और पलायन कम करने में सकारात्मक प्रभाव पाया गया। अध्ययन में छोटे और सीमांत किसानों द्वारा रबी उत्पादन बढ़ने के कारण औसतन करीब ₹32,000 प्रति हेक्टेयर अतिरिक्त return की जानकारी भी दी गई थी। यह ऐतिहासिक impact assessment का निष्कर्ष है, वर्तमान में मिलने वाली निश्चित सहायता राशि नहीं। (NITI Aayog Library)
क्या किसान को सीधे पैसा मिलता है?
यहां किसानों को एक महत्वपूर्ण अंतर समझना चाहिए। Bundelkhand Package को PM-KISAN जैसी सीधे बैंक खाते में निश्चित रकम देने वाली योजना न समझें। इसके तहत अधिकांश लाभ infrastructure development, irrigation, water conservation, horticulture, livestock, dairy और marketing से जुड़े अलग-अलग projects या departmental schemes के माध्यम से उपलब्ध कराए गए।
इसलिए किसी किसान के लिए लाभ का स्वरूप इस बात पर निर्भर करेगा कि उसके जिले में वर्तमान में package से जुड़ा कौन-सा component या उससे विकसित/संबंधित departmental programme उपलब्ध है।
किसान आवेदन कैसे करें?
मूल Bundelkhand Package के लिए पूरे क्षेत्र में लागू कोई एक समान Single Online Application Portal उपलब्ध सरकारी विवरणों में नहीं बताया गया है। Package के अलग-अलग components विभिन्न विभागों द्वारा लागू किए गए थे। इसलिए किसान को आवेदन से पहले अपने जिले में वर्तमान स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।
Step 1: अपने जिले के कृषि विभाग / जिला कृषि अधिकारी / उद्यान विभाग / पशुपालन विभाग / सिंचाई या जल संसाधन विभाग से संपर्क करें।
Step 2: यह पूछें कि Bundelkhand Package से जुड़ा संबंधित component या उसके अंतर्गत विकसित कोई वर्तमान scheme जिले में आवेदन के लिए उपलब्ध है या नहीं।
Step 3: यदि लाभ horticulture से जुड़ा है तो जिला उद्यान विभाग, livestock से जुड़ा है तो पशुपालन विभाग और irrigation/water conservation से जुड़ा है तो संबंधित कृषि, लघु सिंचाई, जल संसाधन या अन्य कार्यान्वयन विभाग से पात्रता पता करें।
Step 4: संबंधित विभाग द्वारा मांगे गए दस्तावेज जमा करके आवेदन करें। अलग-अलग scheme/component में documents अलग हो सकते हैं, इसलिए बिना आधिकारिक सूचना के कोई निश्चित document list मानना उचित नहीं होगा।
आम तौर पर कृषि योजनाओं में पहचान, बैंक, भूमि/कृषक विवरण और मोबाइल जैसी जानकारियां मांगी जा सकती हैं, लेकिन किसान को Exact Eligibility और Required Documents संबंधित विभाग से सत्यापित करने चाहिए।
क्या बुंदेलखंड पैकेज अभी भी चालू है?
इस प्रश्न में सावधानी जरूरी है। मूल Special Package वर्ष 2009-10 से शुरू हुआ था और बाद में इसे 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि तक जारी रखने की मंजूरी मिली थी। सरकार की 2021 की जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में package के तहत विभिन्न interventions किए गए और 2009-10 से 2018-19 के दौरान धनराशि जारी की गई थी।
इसलिए इसे 2026 में सभी components के लिए एक नई, पूरे क्षेत्र में खुली fresh application scheme मान लेना सही नहीं होगा।
हालांकि, उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले की सरकारी वेबसाइट पर Bundelkhand Vikas Package का पेज जुलाई 2026 तक उपलब्ध और अपडेटेड है, जिसमें पुराने departmental works तथा documents सूचीबद्ध हैं। इससे package से संबंधित प्रशासनिक records उपलब्ध होने की पुष्टि होती है, लेकिन केवल webpage उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि हर पुराना benefit वर्तमान में नए आवेदन के लिए खुला है। (Lalitpur)
किसान को आवेदन से पहले अपने जिले के संबंधित विभाग से Current Application Status जरूर जांचना चाहिए।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण रहा यह package?
बुंदेलखंड में छोटे किसान के लिए पानी की कमी का अर्थ केवल कम उत्पादन नहीं है। यदि खरीफ की फसल कमजोर होती है और रबी के लिए सिंचाई उपलब्ध नहीं होती तो पूरे साल की कृषि आय प्रभावित हो सकती है। ऐसे में watershed, farm pond, irrigation, horticulture और livestock जैसे interventions मिलकर किसान की Climate Resilience बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
पानी उपलब्ध होने से अतिरिक्त फसल लेने की संभावना बढ़ती है। Horticulture से high-value production की संभावना बनती है। Dairy और animal husbandry से नियमित अतिरिक्त आमदनी का रास्ता खुल सकता है। Storage और marketing infrastructure से किसान को फसल बेचने के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं।
यही कारण है कि Bundelkhand Package को केवल Drought Relief Package के रूप में नहीं, बल्कि Agriculture + Water Management + Rural Livelihood Development के integrated model के रूप में देखना अधिक सही है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
यदि आप उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा या चित्रकूट अथवा मध्य प्रदेश के मूल package में शामिल बुंदेलखंड जिलों के किसान हैं, तो केवल “Bundelkhand Package Form” खोजकर किसी अनजान वेबसाइट पर दस्तावेज अपलोड या शुल्क जमा न करें।
सबसे पहले जिला कृषि या संबंधित विभाग से पता करें कि आपके गांव में कौन-सा Active Component / Scheme उपलब्ध है। उसके बाद ही आधिकारिक प्रक्रिया से आवेदन करें।
निष्कर्ष: पानी से लेकर बाजार तक किसानों को मजबूत करने की कोशिश
Bundelkhand Special Package का मूल उद्देश्य सूखा प्रभावित बुंदेलखंड को केवल तत्काल राहत देना नहीं था। इसके माध्यम से जल संरक्षण, irrigation infrastructure, watershed development, agriculture development, horticulture, animal husbandry, dairy, storage और agricultural marketing को एक साथ मजबूत करने का प्रयास किया गया। ₹7,266 करोड़ के मूल package में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र को शामिल किया गया।
किसानों के नजरिए से इसका सबसे महत्वपूर्ण संदेश है Water Security, Farm Productivity और Income Diversification। बेहतर सिंचाई से खेती का जोखिम घट सकता है, horticulture और livestock से आय के नए रास्ते बन सकते हैं तथा storage और marketing facilities से कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
लेकिन वर्तमान समय में लाभ लेने वाले किसान को यह जरूर समझना चाहिए कि Bundelkhand Package कोई एक universal online subsidy application नहीं है। इसके components अलग-अलग departments और projects के माध्यम से लागू किए गए हैं। इसलिए Eligibility, Current Availability, Subsidy/Assistance और Application Process की ताजा जानकारी अपने जिले के संबंधित सरकारी विभाग से लेना सबसे सही तरीका है।

