भारत में स्वदेशी ड्रोन निर्माण और उन्नत मानव रहित हवाई प्रणालियों (Unmanned Aerial Systems – UAS) के विकास को नई गति देते हुए Dhaksha Unmanned Systems Private Limited ने तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के आयमिचेरी क्षेत्र में अपनी नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया है। कंपनी, जो Coromandel International Limited की सहायक कंपनी है, ने इस नई इकाई के माध्यम से कृषि, रक्षा और एंटरप्राइज क्षेत्रों के लिए अपनी ड्रोन निर्माण, अनुसंधान एवं विकास तथा परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन अरुण अलगप्पन, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, Coromandel International Limited ने किया। कंपनी के अनुसार, यह नई सुविधा बड़े और जटिल कार्यक्रमों के विकास एवं निष्पादन में मदद करेगी तथा महत्वपूर्ण तकनीकों के स्वदेशीकरण (Indigenisation) को भी गति देगी। इसके साथ ही कंपनी बदलती ग्राहक आवश्यकताओं के अनुरूप उन्नत ड्रोन समाधान विकसित और उपलब्ध कराने की अपनी क्षमता को मजबूत करेगी।
इस अवसर पर धाक्षा ने कृषि क्षेत्र के लिए दो नए ड्रोन मॉडल—DH Agrigator E10 Prime और DH Agrigator E10 Eco—भी लॉन्च किए। कंपनी का कहना है कि ये नए मॉडल भारत में ड्रोन आधारित कृषि सेवाओं के विस्तार और किसानों तक आधुनिक तकनीक की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कृषि, रक्षा और एंटरप्राइज क्षेत्र पर रहेगा फोकस
नई फैसिलिटी के माध्यम से धाक्षा का लक्ष्य अपने प्रमुख UAV verticals में उत्पादन और निष्पादन क्षमता का विस्तार करना है। इसमें कृषि के लिए ड्रोन आधारित समाधान, रक्षा क्षेत्र के लिए निगरानी एवं लॉजिस्टिक्स से जुड़े प्लेटफॉर्म और विभिन्न औद्योगिक एवं एंटरप्राइज उपयोग शामिल हैं।
भारत में ड्रोन तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल फसलों पर छिड़काव, खेतों की निगरानी, फसल की स्थिति का आकलन और विभिन्न प्रकार की Precision Agriculture सेवाओं के लिए किया जा रहा है। ऐसे में स्वदेशी तकनीक और स्थानीय स्तर पर विनिर्माण को मजबूत करना देश के ड्रोन इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धाक्षा की नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट कंपनी की अनुसंधान एवं विकास (R&D) और परिचालन क्षमताओं को एकीकृत करने में मदद करेगी। इससे उत्पाद विकास की प्रक्रिया में तेजी आने और विभिन्न तकनीकी साझेदारों के बीच बेहतर सहयोग की संभावना है।
DH Agrigator E10 Prime: नमो ड्रोन दीदी कार्यक्रम के अनुरूप समाधान
कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया गया DH Agrigator E10 Prime कृषि क्षेत्र के लिए विकसित कंपनी का नया ड्रोन मॉडल है। कंपनी के अनुसार, इस ड्रोन में स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित घटकों का उपयोग किया गया है।
E10 Prime को Namo Drone Didi programme के अनुरूप तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य भारत के बढ़ते घरेलू ड्रोन इकोसिस्टम को मजबूती देना है।
कृषि में ड्रोन तकनीक का विस्तार केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं है। सरकार और विभिन्न संस्थाएं ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण उद्यमियों और कृषि सेवा प्रदाताओं के माध्यम से ड्रोन सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही हैं। ऐसे में स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित ड्रोन मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि तकनीक के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कंपनी के अनुसार, DH Agrigator E10 Prime का विकास किसानों और फील्ड स्तर पर प्राप्त फीडबैक को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी कृषि ड्रोन को केवल एक तकनीकी उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि वास्तविक कृषि परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी समाधान के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए DH Agrigator E10 Eco
धाक्षा ने अपने दूसरे नए कृषि ड्रोन मॉडल DH Agrigator E10 Eco को एक किफायती समाधान के रूप में पेश किया है। कंपनी का उद्देश्य इस मॉडल के माध्यम से ड्रोन आधारित कृषि सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाना है।
भारत में छोटे और सीमांत किसानों की संख्या बड़ी है। ऐसे में प्रत्येक किसान द्वारा व्यक्तिगत रूप से ड्रोन खरीदना हमेशा व्यावहारिक नहीं हो सकता। इसलिए Drone-as-a-Service और ग्रामीण उद्यमिता जैसे मॉडल महत्वपूर्ण बन सकते हैं।
E10 Eco को ऐसे ही संदर्भ में विकसित किया गया है, ताकि छोटे और सीमांत किसानों के साथ-साथ ग्रामीण उद्यमियों के लिए ड्रोन आधारित कृषि सेवाओं तक पहुंच बढ़ाई जा सके।
यदि ड्रोन तकनीक का उपयोग सेवा मॉडल के रूप में बड़े पैमाने पर बढ़ता है, तो किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार छिड़काव और अन्य सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे, जबकि स्थानीय युवा और ग्रामीण उद्यमी ड्रोन संचालन एवं कृषि सेवा के माध्यम से रोजगार और आय के नए अवसर विकसित कर सकते हैं।
कृषि में बढ़ रहा है ड्रोन तकनीक का महत्व
भारतीय कृषि में Agricultural Drones का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ड्रोन तकनीक का उपयोग फसलों पर सटीक छिड़काव, बड़े क्षेत्रों में तेजी से कृषि कार्य, खेतों की निगरानी और डेटा आधारित कृषि प्रबंधन के लिए किया जा सकता है।
हालांकि ड्रोन तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए कई चुनौतियां भी हैं। इनमें प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटरों की उपलब्धता, रखरखाव और सेवा सुविधाएं, स्थानीय स्तर पर स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता तथा किसानों तक किफायती सेवाओं की पहुंच शामिल है।
धाक्षा की नई फैसिलिटी के साथ कंपनी अपने sourcing और service ecosystem का भी विस्तार कर रही है। कंपनी अपनी सर्विस सेंटर नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे बढ़ते संचालन को बेहतर समर्थन मिल सके।
कृषि ड्रोन की सफलता केवल ड्रोन बेचने पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और समय पर सर्विस की भी जरूरत होती है। इसलिए मजबूत After-Sales Support और सेवा नेटवर्क किसानों और ड्रोन सेवा प्रदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
रक्षा क्षेत्र के लिए अलग प्रोडक्शन लाइन
नई फैसिलिटी कृषि क्षेत्र के साथ-साथ धाक्षा के बढ़ते रक्षा पोर्टफोलियो को भी समर्थन देगी। कंपनी के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में निगरानी (Surveillance) और लॉजिस्टिक्स जैसे अनुप्रयोगों के लिए ड्रोन समाधान विकसित किए जा रहे हैं।
नई इकाई में रक्षा अनुप्रयोगों के लिए एक समर्पित Production Line स्थापित की जाएगी। इससे कंपनी की बड़े कार्यक्रमों को निष्पादित करने की क्षमता मजबूत होगी और महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिक नियंत्रण विकसित करने के लिए स्वदेशीकरण प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा।
आधुनिक रक्षा क्षेत्र में Unmanned Aerial Vehicles (UAVs) का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। निगरानी, टोही, लॉजिस्टिक्स और अन्य विशिष्ट कार्यों में UAV आधारित प्रणालियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में घरेलू स्तर पर डिजाइन, निर्माण और तकनीकी विकास को बढ़ावा देना भारत की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
एकीकृत ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने पर जोर
धाक्षा की नई फैसिलिटी को केवल एक उत्पादन केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि ड्रोन मूल्य श्रृंखला (Drone Value Chain) के विभिन्न भागीदारों के सहयोग के लिए एक मंच के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।
कंपनी के अनुसार, यह सुविधा तकनीकी साझेदारों को अपनी पूरक क्षमताओं को एक साथ लाने का अवसर देगी। इसका उद्देश्य एक ही छत के नीचे अधिक एकीकृत Drone Manufacturing Ecosystem विकसित करना है।
ड्रोन निर्माण में डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर, सेंसर, संचार प्रणाली, बैटरी, एयरफ्रेम, परीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और आफ्टर-मार्केट सर्विस जैसे कई क्षेत्र शामिल होते हैं। इसलिए एक मजबूत घरेलू ड्रोन इकोसिस्टम के लिए विभिन्न तकनीकी कंपनियों और संस्थानों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है।
नई सुविधा के माध्यम से धाक्षा का प्रयास इन क्षमताओं को बेहतर ढंग से एकीकृत करना है।
भारत के तकनीकी परिवर्तन में UAV की बड़ी भूमिका
कार्यक्रम के दौरान धाक्षा अनमैन्ड सिस्टम्स के निदेशक तथा Coromandel International Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ एस. शंकरसुब्रमणियन ने कहा कि भारत की अधिक उत्पादक, मजबूत और प्रौद्योगिकी-सक्षम अर्थव्यवस्था की दिशा में यात्रा उन्नत तकनीकों के प्रभावी उपयोग से प्रभावित होगी।
उन्होंने कहा कि धाक्षा कृषि, रक्षा और एंटरप्राइज अनुप्रयोगों में UAVs को इस परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखती है।
उनके अनुसार, नई फैसिलिटी कंपनी की अनुसंधान एवं विकास तथा परिचालन क्षमताओं को एकीकृत करेगी, जिससे बेहतर सहयोग और तेजी के साथ काम करने में मदद मिलेगी। यह तेजी से विकसित हो रहे UAV क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं में कंपनी के विश्वास और देश के लिए स्वदेशी ड्रोन समाधान विकसित करने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
फील्ड फीडबैक के आधार पर उत्पाद विकास
शंकरसुब्रमणियन ने कहा कि कृषि समुदाय में ड्रोन तकनीक के प्रति मजबूत रुचि देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी के उत्पाद विकास प्रयासों को अब तेजी से फील्ड स्तर पर मिलने वाले अनुभव और फीडबैक के आधार पर आकार दिया जा रहा है।
यह दृष्टिकोण कृषि तकनीक के लिए महत्वपूर्ण है। भारत की कृषि परिस्थितियां विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हैं। फसलें, खेतों का आकार, मौसम, भूगोल और किसानों की आर्थिक क्षमता में काफी अंतर होता है। इसलिए एक ही प्रकार का समाधान हर जगह उपयुक्त नहीं हो सकता।
ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित Indigenous Drone Solutions तकनीक को अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बना सकते हैं।
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और तकनीकी साझेदारी
धाक्षा ने रक्षा क्षेत्र में भी स्वदेशीकरण और तकनीकी साझेदारी को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।
कंपनी का कहना है कि वह महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिक नियंत्रण विकसित करने के लिए अपने स्वदेशीकरण प्रयासों को आगे बढ़ा रही है। साथ ही ड्रोन इकोसिस्टम के विभिन्न तकनीकी भागीदारों के साथ सहयोग पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारत के लिए स्वदेशी ड्रोन तकनीक का विकास Atmanirbhar Bharat की व्यापक अवधारणा से भी जुड़ा हुआ है। घरेलू स्तर पर डिजाइन, निर्माण और तकनीकी क्षमता विकसित होने से भविष्य में भारतीय कंपनियों को उन्नत समाधान विकसित करने के अवसर मिल सकते हैं।
2001 से ड्रोन तकनीक से जुड़ी है धाक्षा की यात्रा
Dhaksha Unmanned Systems की जड़ें Anna University-MIT के Centre for Aerospace Research (CASR) से जुड़ी हैं। कंपनी 2001 से ड्रोन तकनीक और सरकारी परियोजनाओं के क्षेत्र में कार्य कर रही है।
इसके बाद वर्ष 2019 में धाक्षा एक स्वतंत्र प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में स्थापित हुई। कंपनी के पास अनुसंधान एवं विकास, ड्रोन निर्माण और मार्केटिंग के लिए Anna University के साथ रणनीतिक तकनीकी साझेदारी है।
यह शैक्षणिक संस्थान और उद्योग के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें शोध और तकनीकी विकास को व्यावसायिक उत्पादों और समाधानों में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
डिजाइन से लेकर आफ्टर-मार्केट सपोर्ट तक समाधान
धाक्षा विभिन्न क्षेत्रों के लिए End-to-End UAS/UAV Solutions उपलब्ध कराती है। कंपनी की क्षमताओं में—
- Research and Development
- Drone Design
- Manufacturing and Integration
- Testing and Quality Assurance
- Training and Certification
- Turnkey Solutions
- After-Market Operational Support
जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
कंपनी ने कृषि और अन्य विशिष्ट उपयोगों के लिए ड्रोन प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं और उसके पास कई ड्रोन प्लेटफॉर्म के लिए DGCA Type Certifications भी हैं।
ड्रोन उद्योग में प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण की भूमिका महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से कृषि और व्यावसायिक उपयोग में ड्रोन के सुरक्षित और नियमानुसार संचालन के लिए तकनीकी मानकों का पालन आवश्यक होता है।
Coromandel International के निवेश से मिली विस्तार की ताकत
जुलाई 2023 में Coromandel International Limited ने Dhaksha में एक बड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था। इस कदम से कंपनी को अपनी तकनीकी और विनिर्माण क्षमताओं के विस्तार के लिए रणनीतिक सहयोग मिला।
Coromandel की कृषि क्षेत्र में मौजूदगी और धाक्षा की ड्रोन तकनीक का संयोजन कृषि क्षेत्र में नई तकनीकी संभावनाएं पैदा कर सकता है। विशेष रूप से कृषि में ड्रोन आधारित सेवाओं, फसल प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार में यह साझेदारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी इस विस्तार यात्रा का अगला महत्वपूर्ण चरण है। इससे कंपनी को बड़े और अधिक जटिल कार्यक्रमों के लिए अपनी क्षमताओं का विस्तार करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
धाक्षा की कांचीपुरम स्थित नई सुविधा ऐसे समय में शुरू हुई है, जब भारत स्वदेशी विनिर्माण और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
कृषि, रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में ड्रोन के बढ़ते उपयोग को देखते हुए घरेलू स्तर पर मजबूत UAV Manufacturing क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण हो सकता है। नई फैसिलिटी के माध्यम से धाक्षा न केवल अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहती है, बल्कि महत्वपूर्ण तकनीकों के स्वदेशीकरण, अनुसंधान एवं विकास और व्यापक ड्रोन इकोसिस्टम निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
कंपनी के नेतृत्व के अनुसार, यह विस्तार भारत को उभरते UAV क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने और Atmanirbhar Bharat के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तमिलनाडु के कांचीपुरम में Dhaksha Unmanned Systems की नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन भारत के स्वदेशी ड्रोन उद्योग के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकास है। कृषि के लिए DH Agrigator E10 Prime और DH Agrigator E10 Eco जैसे नए ड्रोन मॉडल किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और ड्रोन सेवा प्रदाताओं के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं।
वहीं, रक्षा क्षेत्र के लिए समर्पित उत्पादन लाइन और तकनीकी स्वदेशीकरण पर जोर कंपनी की व्यापक रणनीति को दर्शाता है। अनुसंधान, डिजाइन, विनिर्माण, परीक्षण, प्रशिक्षण और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट को एकीकृत करने की दिशा में नई फैसिलिटी भारत में एक मजबूत और व्यापक Drone Ecosystem के विकास में योगदान दे सकती है।
कृषि में Precision Farming, ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सेवाओं का विस्तार, रक्षा क्षेत्र में निगरानी और लॉजिस्टिक्स तथा एंटरप्राइज स्तर पर नए अनुप्रयोगों के साथ भारत में UAV तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में Dhaksha की यह नई सुविधा स्वदेशी तकनीक, उत्पाद विकास और आधुनिक ड्रोन विनिर्माण को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा सकती है।

