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Home पशुपालन

मुर्गियों में होने वाली प्रमुख बीमारियां: लक्षण, कारण, बचाव और उपचार की पूरी जानकारी

Major chicken diseases: complete information on symptoms, causes, prevention and treatment

Emran Khan by Emran Khan
August 25, 2026
in पशुपालन
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बीमारी की पहचान में किसान न करें ये गलतियां

बीमारी की पहचान में किसान न करें ये गलतियां

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मुर्गी पालन (Poultry Farming) ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। कम जगह और सीमित निवेश में शुरू किया जा सकने वाला यह व्यवसाय अंडा और मांस उत्पादन के साथ रोजगार का भी अच्छा माध्यम है। लेकिन मुर्गियों में होने वाली विभिन्न Poultry Diseases इस व्यवसाय के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। बीमारी के कारण मुर्गियों की वृद्धि रुक सकती है, अंडा उत्पादन घट सकता है, मृत्यु दर बढ़ सकती है और किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मुर्गियों में बीमारियां Viral, Bacterial, Parasitic, Fungal तथा पोषण संबंधी कारणों से हो सकती हैं। कुछ रोग बहुत तेजी से पूरे झुंड में फैलते हैं, जबकि कुछ बीमारियां धीरे-धीरे मुर्गियों की उत्पादन क्षमता को प्रभावित करती हैं। इसलिए बीमारी की शुरुआती पहचान, साफ-सफाई, संतुलित आहार, उचित टीकाकरण और Farm Biosecurity बेहद जरूरी है।

इस लेख में मुर्गियों में होने वाली प्रमुख बीमारियों, उनके लक्षण, कारण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

 

1. रानीखेत रोग (Newcastle Disease)

Newcastle Disease (ND) मुर्गियों में होने वाली गंभीर वायरल बीमारियों में से एक है। यह बीमारी विशेष रूप से छोटे और बड़े दोनों प्रकार के मुर्गियों में समस्या पैदा कर सकती है और संक्रमण तेजी से पूरे झुंड में फैल सकता है।

प्रमुख लक्षण

रोग के लक्षण वायरस के प्रकार और मुर्गी की उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। सामान्य लक्षणों में—

  • सुस्ती और कमजोरी
  • भूख कम होना
  • सांस लेने में परेशानी
  • खांसी और छींक
  • नाक से स्राव
  • हरे रंग की पतली बीट
  • गर्दन का मुड़ना
  • चलने में परेशानी
  • अंडा उत्पादन में अचानक कमी
  • गंभीर स्थिति में मृत्यु

कुछ मुर्गियों में Nervous Symptoms दिखाई दे सकते हैं, जैसे गर्दन का टेढ़ा होना या शरीर का संतुलन बिगड़ना।

बचाव

Newcastle Disease से बचाव में Vaccination सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। फार्म पर बाहरी पक्षियों और अनावश्यक लोगों की आवाजाही नियंत्रित करनी चाहिए। बीमार पक्षियों को तुरंत अलग करना चाहिए।

इस बीमारी में विशेष एंटीवायरल उपचार आमतौर पर उपलब्ध नहीं होता। उपचार मुख्य रूप से Supportive Care और द्वितीयक संक्रमणों को नियंत्रित करने पर केंद्रित होता है। दवाओं का इस्तेमाल पशु चिकित्सक की सलाह से ही करें।

 

2. बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza)

Avian Influenza, जिसे सामान्य भाषा में Bird Flu कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण वायरल बीमारी है। इसके कुछ प्रकार पक्षियों में गंभीर बीमारी और उच्च मृत्यु दर का कारण बन सकते हैं।

यह बीमारी जंगली पक्षियों और संक्रमित घरेलू पक्षियों के संपर्क के माध्यम से फैल सकती है। संक्रमित पक्षियों के मल, स्राव, दूषित उपकरण, जूते और वाहन भी संक्रमण के स्रोत बन सकते हैं।

लक्षण

  • अचानक मृत्यु
  • भूख कम होना
  • सुस्ती
  • अंडा उत्पादन में तेजी से कमी
  • सांस लेने में परेशानी
  • खांसी और छींक
  • चेहरे या सिर पर सूजन
  • कलगी और झुमकों का नीला या गहरा पड़ना
  • दस्त
  • तंत्रिका संबंधी लक्षण

यदि झुंड में अचानक बड़ी संख्या में मुर्गियां बीमार पड़ने या मरने लगें तो इसे सामान्य बीमारी समझकर घरेलू उपचार नहीं करना चाहिए।

बचाव

Biosecurity इस बीमारी के नियंत्रण में बेहद महत्वपूर्ण है। जंगली पक्षियों को फार्म से दूर रखें, फार्म में आने-जाने वाले लोगों और वाहनों को नियंत्रित करें तथा संदिग्ध बीमारी की स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सा विभाग को सूचित करें।

3. गंबोरो रोग (Infectious Bursal Disease – IBD)

Infectious Bursal Disease (IBD) को सामान्य रूप से Gumboro Disease कहा जाता है। यह विशेष रूप से कम उम्र की मुर्गियों में महत्वपूर्ण बीमारी है।

यह रोग मुर्गियों की Immune System को प्रभावित करता है। इसके कारण मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है और वे दूसरी बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं।

लक्षण

  • अचानक सुस्ती
  • पंख फूले हुए रहना
  • भूख कम होना
  • पानी अधिक पीना
  • सफेद या पानी जैसी बीट
  • पंख नीचे लटकना
  • तेजी से वजन कम होना
  • मृत्यु दर बढ़ना

बचाव

IBD के नियंत्रण में उचित Vaccination Programme और अच्छी Farm Biosecurity महत्वपूर्ण है।

फार्म की सफाई, उचित Disinfection और आयु के अनुसार सही टीकाकरण कार्यक्रम अपनाना जरूरी है।

4. मुर्गियों में मारेक्स रोग (Marek’s Disease)

Marek’s Disease एक वायरल बीमारी है जो मुर्गियों के तंत्रिका तंत्र और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकती है। यह बीमारी विशेष रूप से कम उम्र की मुर्गियों में महत्वपूर्ण है।

प्रमुख लक्षण

  • पैरों में कमजोरी
  • चलने में परेशानी
  • एक या दोनों पैरों का फैल जाना
  • पंखों में कमजोरी
  • वजन घटना
  • पक्षी का धीरे-धीरे कमजोर होना
  • आंखों के रंग या आकार में बदलाव

कई मामलों में बीमारी के कारण मुर्गियां चलने-फिरने में असमर्थ हो सकती हैं।

बचाव

Marek’s Disease Vaccination इसका सबसे महत्वपूर्ण रोकथाम उपाय है। सामान्यतः चूजों के शुरुआती जीवन में टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार वैक्सीन दी जाती है।

फार्म की स्वच्छता और जैव-सुरक्षा भी जरूरी है।

5. संक्रामक ब्रोंकाइटिस (Infectious Bronchitis – IB)

Infectious Bronchitis (IB) एक वायरल श्वसन रोग है। यह विशेष रूप से मुर्गियों के Respiratory System को प्रभावित करता है।

लक्षण

  • खांसी
  • छींक
  • सांस लेने में आवाज
  • नाक से पानी आना
  • सुस्ती
  • चारा कम खाना
  • अंडा उत्पादन में कमी

लेयर मुर्गियों में बीमारी के कारण अंडों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। अंडों का खोल पतला या विकृत हो सकता है।

बचाव

उचित Vaccination, वेंटिलेशन और फार्म की स्वच्छता इस बीमारी से बचाव में महत्वपूर्ण हैं।

फार्म में अमोनिया और धूल की मात्रा कम रखना भी जरूरी है।

6. कॉक्सीडियोसिस (Coccidiosis)

Coccidiosis मुर्गियों में होने वाली प्रमुख परजीवी बीमारी है। यह Eimeria नामक परजीवी के कारण होती है और मुख्य रूप से आंतों को प्रभावित करती है।

गंदे और अधिक नमी वाले फर्श पर इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।

प्रमुख लक्षण

  • खून वाली बीट
  • दस्त
  • वजन घटना
  • भूख कम होना
  • पंख फूले रहना
  • कमजोरी
  • मुर्गियों की वृद्धि रुकना
  • गंभीर स्थिति में मृत्यु

बचाव

फार्म का फर्श साफ और सूखा रखना चाहिए। पानी और चारे की व्यवस्था इस तरह होनी चाहिए कि वे बीट से दूषित न हों।

Coccidiostat या अन्य दवाओं का उपयोग पशु चिकित्सक की सलाह से किया जाना चाहिए।

 

7. फाउल पॉक्स (Fowl Pox)

Fowl Pox एक वायरल बीमारी है। इसमें मुर्गियों की त्वचा और मुंह के अंदर घाव या गांठें दिखाई दे सकती हैं।

यह बीमारी आमतौर पर दो रूपों में दिखाई दे सकती है—

  • Dry Form
  • Wet Form

Dry Form में

मुर्गियों की कलगी, झुमके, आंखों के आसपास या शरीर के अन्य खुले हिस्सों पर छोटे-छोटे दाने और पपड़ी बन सकती है।

Wet Form में

मुंह और गले के अंदर घाव या परतें बन सकती हैं, जिससे मुर्गी को सांस लेने या खाना निगलने में परेशानी हो सकती है।

बचाव

Fowl Pox Vaccination बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण है। मच्छरों और अन्य कीटों को नियंत्रित करना भी उपयोगी है क्योंकि वे संक्रमण फैलाने में भूमिका निभा सकते हैं।

 

8. साल्मोनेलोसिस (Salmonellosis)

Salmonellosis बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। मुर्गियों में इसके विभिन्न रूप देखे जा सकते हैं।

विशेष रूप से चूजों में संक्रमण गंभीर हो सकता है।

लक्षण

  • दस्त
  • कमजोरी
  • भूख कम होना
  • पंख फूले रहना
  • वृद्धि में कमी
  • सांस संबंधी समस्या
  • मृत्यु दर में वृद्धि

कुछ Salmonella संक्रमण Food Safety के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अंडा और मांस उत्पादन करने वाले फार्मों में स्वच्छता अत्यंत जरूरी है।

 

9. माइकोप्लाज्मोसिस (Mycoplasmosis)

मुर्गियों में Mycoplasma संक्रमण श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे कई बार Chronic Respiratory Disease (CRD) से जोड़ा जाता है।

लक्षण

  • छींक
  • खांसी
  • सांस लेने में आवाज
  • नाक से स्राव
  • आंखों में पानी
  • वृद्धि में कमी
  • अंडा उत्पादन में कमी

ठंड, खराब वेंटिलेशन और अधिक भीड़भाड़ से समस्या बढ़ सकती है।

बचाव

  • उचित ventilation
  • कम overcrowding
  • साफ पानी
  • अच्छी biosecurity
  • संक्रमित पक्षियों की पहचान

उपचार के लिए पशु चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए क्योंकि सही दवा का चयन रोग की स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

 

10. एवियन कोलिबैसिलोसिस (Colibacillosis)

Colibacillosis मुख्य रूप से E. coli बैक्टीरिया से संबंधित बीमारी है। यह अकेले या अन्य संक्रमणों के साथ समस्या पैदा कर सकती है।

लक्षण

  • कमजोरी
  • भूख कम होना
  • सांस लेने में परेशानी
  • दस्त
  • वृद्धि में कमी
  • मृत्यु दर बढ़ना

गंदा पानी, खराब फार्म स्वच्छता और खराब वेंटिलेशन संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

इसलिए साफ पानी और Hygiene Management बेहद महत्वपूर्ण है।

 

11. मुर्गियों में कृमि रोग (Worm Infestation)

मुर्गियों में विभिन्न प्रकार के Internal Parasites पाए जा सकते हैं। इनमें roundworms और tapeworms प्रमुख हैं।

लक्षण

  • वजन कम होना
  • कमजोरी
  • भूख में बदलाव
  • अंडा उत्पादन में कमी
  • दस्त
  • पंख खराब होना
  • वृद्धि रुकना

खुले वातावरण में घूमने वाली मुर्गियों में परजीवी संक्रमण का खतरा कुछ परिस्थितियों में बढ़ सकता है।

Deworming Programme पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार अपनाना चाहिए।

 

12. बाहरी परजीवी: जूं और माइट्स

मुर्गियों में Lice, Mites और Ticks जैसे बाहरी परजीवी भी बड़ी समस्या पैदा कर सकते हैं।

इनके कारण—

  • मुर्गियों को खुजली
  • बेचैनी
  • पंख टूटना
  • खून की कमी
  • कमजोरी
  • अंडा उत्पादन में कमी

जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

मुर्गीघर, घोंसले और बैठने की जगहों की नियमित सफाई आवश्यक है।

 

13. मुर्गियों में पोषण संबंधी बीमारियां

हर बीमारी वायरस या बैक्टीरिया से नहीं होती। Nutritional Deficiency भी मुर्गियों के स्वास्थ्य और उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।

यदि आहार में Calcium, Phosphorus, Vitamin D, Vitamin A, Vitamin E या अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाए तो मुर्गियों में विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

कैल्शियम और विटामिन D की कमी

लेयर मुर्गियों में Calcium और Vitamin D की कमी से अंडों के खोल कमजोर हो सकते हैं।

लक्षण

  • पतले खोल वाले अंडे
  • अंडा उत्पादन में कमी
  • कमजोर हड्डियां
  • चलने में परेशानी

इसलिए लेयर मुर्गियों के लिए संतुलित Layer Feed देना जरूरी है।

 

मुर्गियों को बीमारी से बचाने के 10 जरूरी उपाय

मुर्गियों में बीमारी को रोकना इलाज करने से ज्यादा बेहतर और आर्थिक रूप से लाभदायक है। इसके लिए किसान निम्न उपाय अपना सकते हैं—

1. नियमित टीकाकरण

अपने क्षेत्र और मुर्गियों की नस्ल/उम्र के अनुसार Vaccination Schedule पशु चिकित्सक से तैयार करवाएं।

2. फार्म की सफाई

मुर्गीघर को नियमित रूप से साफ करें और गंदगी जमा न होने दें।

3. साफ पानी

मुर्गियों को हमेशा स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराएं।

4. संतुलित आहार

उम्र और उत्पादन के अनुसार Balanced Poultry Feed दें।

5. उचित वेंटिलेशन

मुर्गीघर में पर्याप्त हवा का आवागमन होना चाहिए।

6. भीड़भाड़ से बचें

Overcrowding से तनाव और बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।

7. बीमार मुर्गी को अलग करें

बीमारी के लक्षण दिखते ही संक्रमित पक्षी को स्वस्थ झुंड से अलग करें।

8. नए पक्षियों को सीधे झुंड में न मिलाएं

नए पक्षियों के लिए Quarantine की व्यवस्था करें।

9. बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित करें

फार्म पर अनावश्यक लोगों और वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करें।

10. समय पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें

मुर्गियों में अचानक मृत्यु, सांस संबंधी समस्या, दस्त या अंडा उत्पादन में अचानक गिरावट दिखाई दे तो तुरंत Veterinary Doctor से सलाह लें।

 

बीमारी की पहचान में किसान न करें ये गलतियां

मुर्गियों के बीमार होने पर कई बार किसान बिना बीमारी की सही पहचान किए दवाएं देना शुरू कर देते हैं। यह तरीका नुकसानदायक हो सकता है।

Antibiotics का इस्तेमाल वायरल बीमारियों के इलाज के लिए अपने आप नहीं करना चाहिए। गलत या अनावश्यक antibiotic इस्तेमाल से Antimicrobial Resistance (AMR) की समस्या बढ़ सकती है।

इसी तरह मानव उपयोग की दवाएं मुर्गियों को बिना पशु चिकित्सक की सलाह के देना भी उचित नहीं है।

बीमारी का सही कारण पता लगाने के लिए कई मामलों में Laboratory Diagnosis की आवश्यकता होती है।

मुर्गी पालन में सफलता केवल अच्छी नस्ल और बेहतर चारे पर निर्भर नहीं करती, बल्कि Poultry Health Management भी उतना ही महत्वपूर्ण है। रानीखेत रोग, बर्ड फ्लू, गंबोरो, मारेक्स, संक्रामक ब्रोंकाइटिस, कॉक्सीडियोसिस, फाउल पॉक्स, साल्मोनेलोसिस, माइकोप्लाज्मोसिस और विभिन्न परजीवी संक्रमण मुर्गियों की उत्पादकता और किसान की आय को प्रभावित कर सकते हैं।

इन बीमारियों से बचाव के लिए Vaccination, Biosecurity, Hygiene, Balanced Nutrition, Clean Water, Proper Ventilation और Early Disease Detection को मुर्गी पालन का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर किसान स्वयं दवा देने के बजाय पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) से संपर्क करें। समय पर बीमारी की पहचान और सही उपचार से मृत्यु दर को कम करने तथा पूरे झुंड को सुरक्षित रखने में काफी मदद मिल सकती है।

Tags: AgricultureFarmingIndian Agriculture
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