• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

रबी सीजन 2026 के लिए उर्वरक उपलब्धता पर सरकार का जोर, राज्यों के साथ बनेगी योजना

रबी सीजन 2026 की तैयारी तेज हो गई है। कमजोर मानसून और अल नीनो की चिंता के बीच सरकार राज्यों के साथ बीज, यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
September 19, 2026
in कृषि समाचार
0
रबी सीजन के लिए उर्वरक और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी
0
SHARES
9
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर और असमान स्थिति तथा अल नीनो की बढ़ती चिंता के बीच केंद्र सरकार ने आगामी रबी सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। कृषि मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर रबी फसलों की रणनीति तैयार करने के साथ-साथ किसानों के लिए समय पर बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां मानसून की कमी के कारण मिट्टी में नमी और जलाशयों में पानी का स्तर प्रभावित हुआ है। कृषि मंत्रालय की यह तैयारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब रबी फसलों की बुवाई शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। (The Economic Times)

कमजोर मानसून ने बढ़ाई रबी सीजन की चिंता

इस साल मानसून का वितरण कई क्षेत्रों में असमान रहा है। जून में बारिश में बड़ी कमी रही, जुलाई में कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन अगस्त और सितंबर में फिर कई इलाकों में बारिश सामान्य से कम रही। 19 सितंबर तक मौसम विभाग के अनुसार देश के कई हिस्से बारिश की कमी से प्रभावित रहे और दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी भी शुरू होने की स्थिति में पहुंच गई है। ऐसे में रबी सीजन फसलों के लिए मिट्टी में उपलब्ध नमी और सिंचाई के पानी की स्थिति सरकार की चिंता का प्रमुख कारण बन गई है। (The Indian Express)

रबी फसलों में गेहूं, चना, मसूर, सरसों, जौ और अन्य दलहन एवं तिलहन प्रमुख हैं। इन फसलों की बुवाई मुख्य रूप से मिट्टी में मौजूद नमी और सिंचाई सुविधाओं पर निर्भर करती है। यदि मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं होती है या जलाशयों में पानी कम रहता है तो किसानों को रबी की फसल के लिए सिंचाई पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।

इसी वजह से कृषि मंत्रालय राज्यों से क्षेत्रवार स्थिति का आकलन कर रहा है। जहां पानी की उपलब्धता कम है, वहां कम पानी वाली फसलों या वैकल्पिक फसल योजना पर विचार किया जा सकता है। (The Economic Times)

बीज और उर्वरक की उपलब्धता पर विशेष निगरानी

रबी सीजन में किसानों के सामने सबसे बड़ी जरूरत गुणवत्तापूर्ण बीज और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक की होती है। सरकार इस बार पहले से ही इन दोनों कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।

कृषि मंत्रालय हर फसल सीजन से पहले राज्यों के साथ मिलकर उर्वरक की मांग और उपलब्धता का आकलन करता है। इसके आधार पर उर्वरक विभाग राज्यों के लिए आपूर्ति योजना तैयार करता है। सरकार के अनुसार प्रमुख सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही की निगरानी एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से की जाती है। राज्यों के साथ नियमित समीक्षा के जरिए जहां आपूर्ति में कमी दिखाई देती है, वहां समय पर सुधारात्मक कदम उठाने की व्यवस्था है। (Press Information Bureau)

रबी सीजन के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गेहूं और सरसों जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई के समय यूरिया, डीएपी और एनपीके की मांग बढ़ जाती है। यदि किसी राज्य या जिले में मांग के अनुरूप खाद समय पर नहीं पहुंचती है तो किसानों को बुवाई के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

यूरिया की आपूर्ति पर सरकार की नजर

यूरिया रबी सीजन में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों में शामिल है। गेहूं जैसी प्रमुख फसल में इसकी मांग विशेष रूप से अधिक रहती है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि किसानों को नियंत्रित कीमत पर यूरिया उपलब्ध कराने के साथ-साथ देशभर में इसकी आपूर्ति को संतुलित रखा जाए।

हाल के महीनों में वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हालांकि अगस्त में भारत के लिए आयातित यूरिया की लागत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा कीमतों के कारण भविष्य की कीमतों में बदलाव की संभावना बनी रहती है।

ऐसे में रबी सीजन से पहले आयात की योजना, घरेलू उत्पादन और राज्यों की वास्तविक मांग के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा। कम कीमत के दौरान यदि पर्याप्त मात्रा में आयात किया जाता है तो इससे आगे चलकर आपूर्ति प्रबंधन में मदद मिल सकती है।

डीएपी और एनपीके की उपलब्धता भी अहम

रबी फसलों के लिए केवल यूरिया ही पर्याप्त नहीं है। फसल की शुरुआती वृद्धि और जड़ों के विकास के लिए फॉस्फोरस तथा पोटाश भी महत्वपूर्ण पोषक तत्व हैं। इसलिए डीएपी और एनपीके उर्वरकों की उपलब्धता पर भी सरकार को लगातार नजर रखनी होगी।

भारत डीएपी और कई अन्य फॉस्फेट एवं पोटाश उर्वरकों के लिए आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमत, समुद्री परिवहन लागत और प्रमुख उत्पादक देशों की निर्यात नीति का असर भारत की उपलब्धता और लागत पर पड़ता है।

ऐसे में रबी सीजन से पहले इन उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा में खरीद और राज्यों तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केंद्र पहले भी राज्यों को उर्वरक की उपलब्धता की नियमित निगरानी करने और वितरण व्यवस्था में किसी भी कमी को तत्काल दूर करने के निर्देश देता रहा है। (Press Information Bureau)

राज्यों के साथ बनेगी फसल योजना

रबी सीजन की रणनीति में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को विशेष महत्व दिया जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में मौसम, मिट्टी, पानी और सिंचाई की स्थिति अलग है। इसलिए पूरे देश के लिए एक जैसी फसल योजना के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर रणनीति बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

जिन जिलों में मिट्टी में नमी पर्याप्त है और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां गेहूं जैसी फसलों की सामान्य बुवाई संभव हो सकती है। वहीं पानी की कमी वाले क्षेत्रों में कम अवधि और कम पानी की जरूरत वाली फसलों को बढ़ावा देने पर विचार किया जा सकता है।

कृषि मंत्रालय की तैयारी का उद्देश्य केवल उत्पादन बनाए रखना नहीं, बल्कि किसानों को मौसम से जुड़े जोखिमों से बचाना और खाद्यान्न आपूर्ति को स्थिर रखना भी है। (The Economic Times)

बीज की उपलब्धता भी होगी महत्वपूर्ण

उर्वरक के साथ गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता रबी उत्पादन की बुनियाद है। कृषि विभाग प्रत्येक फसल सीजन से पहले राज्यों के साथ बीज की जरूरत और उपलब्धता का आकलन करता है। सरकार ने पहले भी रबी और खरीफ सीजन से पहले कृषि आदानों की जरूरत का आकलन करने के लिए राज्यों के साथ बैठकें की हैं। (Press Information Bureau)

रबी में गेहूं, चना, मसूर, मटर, सरसों और अन्य फसलों के प्रमाणित बीज किसानों तक समय पर पहुंचना जरूरी है। यदि बुवाई के समय किसान को मनचाही किस्म का बीज उपलब्ध नहीं होता है तो इसका असर पूरी फसल की उत्पादकता पर पड़ सकता है।

इसलिए सरकार की तैयारी में बीज भंडार, वितरण व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर मांग का आकलन महत्वपूर्ण रहेगा।

जल प्रबंधन पर भी जोर

कमजोर मानसून की स्थिति में रबी उत्पादन को बनाए रखने के लिए जल प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बन सकता है। कृषि मंत्रालय राज्यों के साथ जलाशयों, भूजल और सिंचाई की स्थिति की निगरानी कर रहा है। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में सामान्य रबी फसल संभव है और किन क्षेत्रों में वैकल्पिक रणनीति की आवश्यकता पड़ सकती है।

केंद्र ने पहले भी अल नीनो की संभावित स्थिति को देखते हुए संवेदनशील जिलों के लिए आकस्मिक कृषि योजनाओं और जल संरक्षण पर जोर दिया था। (Press Information Bureau)

खाद की कालाबाजारी रोकना भी चुनौती

रबी सीजन में उर्वरकों की मांग बढ़ने के साथ कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आ सकती हैं। इसलिए केवल खाद उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी सब्सिडी वाला उर्वरक वास्तविक किसानों तक निर्धारित कीमत पर पहुंचे।

सरकार पहले से ही उर्वरक की आवाजाही और बिक्री की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल कर रही है। राज्यों को वितरण स्तर पर निगरानी मजबूत करने और किसी भी संभावित कमी या अनियमितता की जानकारी तुरंत देने की व्यवस्था है। (Press Information Bureau)

किसानों के लिए क्या मायने रखता है?

रबी सीजन की इस तैयारी का सीधा लाभ किसानों को तभी मिलेगा, जब बीज और खाद बुवाई से पहले उनके स्थानीय बाजार और सहकारी केंद्रों तक पहुंच जाए। किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि वे अपनी फसल और क्षेत्र के अनुसार बीज तथा उर्वरक की जरूरत पहले से तय करें।

साथ ही, बारिश और सिंचाई की स्थानीय स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग तथा कृषि विज्ञान केंद्रों की सलाह के आधार पर फसल का चयन करना अधिक उपयोगी हो सकता है।

आगे की रणनीति होगी महत्वपूर्ण

कमजोर मानसून और अल नीनो से जुड़ी चिंताओं के बीच आगामी रबी सीजन देश की कृषि व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। कृषि मंत्रालय द्वारा राज्यों के साथ फसल योजना, बीज और उर्वरक उपलब्धता तथा जल प्रबंधन पर जोर देना इसी तैयारी का हिस्सा है। (The Economic Times)

सरकार के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक ओर किसानों को समय पर पर्याप्त कृषि आदान उपलब्ध कराने हैं, वहीं दूसरी ओर मौसम की अनिश्चितता के बीच उत्पादन और खाद्य आपूर्ति को स्थिर रखना है। इसके लिए उर्वरक की अग्रिम योजना, आयात और घरेलू उत्पादन की निगरानी, राज्यों के बीच समन्वय तथा स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था मजबूत रखना जरूरी होगा।

यदि रबी बुवाई शुरू होने से पहले बीज और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर ली जाती है और पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक फसल रणनीति प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो कमजोर मानसून से पैदा होने वाले जोखिम को काफी हद तक प्रबंधित किया जा सकता है। आने वाले दिनों में राज्यों के साथ होने वाली रबी योजना और उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा इसलिए किसानों और कृषि बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

 

Tags: उर्वरकउर्वरक उपलब्धताकिसानकृषि मंत्रालयकृषि समाचारखादडीएपीबीजयूरियारबी 2026रबी फसलरबी सीजन
Previous Post

यूरिया की आयात लागत 57% घटी, 406 डॉलर प्रति टन पहुंची कीमत

Next Post

Groundnut Farming: मूंगफली की बंपर पैदावार चाहिए? बुवाई से कटाई तक इन बातों का रखें ध्यान

Next Post
Groundnut Farming

Groundnut Farming: मूंगफली की बंपर पैदावार चाहिए? बुवाई से कटाई तक इन बातों का रखें ध्यान

Recent Posts

  • जलवायु परिवर्तन के युग में बीजों की महत्ता
  • स्वराज सुपरस्टार: आपका स्वराज, आपकी कहानी
  • Groundnut Farming: मूंगफली की बंपर पैदावार चाहिए? बुवाई से कटाई तक इन बातों का रखें ध्यान
  • रबी सीजन 2026 के लिए उर्वरक उपलब्धता पर सरकार का जोर, राज्यों के साथ बनेगी योजना
  • यूरिया की आयात लागत 57% घटी, 406 डॉलर प्रति टन पहुंची कीमत

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.