भारत में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए खरपतवार प्रबंधन को आसान बनाने की दिशा में ADAMA Ltd. ने नया शाकनाशी Actagon® लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, यह गेहूं की फसल में बुवाई के बाद अंकुरण से पहले यानी प्री-इमर्जेंस अवस्था में इस्तेमाल किया जाने वाला शाकनाशी है। इसे खास तौर पर उन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जहां गेहूं की फसल में खरपतवार किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं।
Actagon® को तैयार मिश्रण यानी रेडी-मिक्स तरल फॉर्मूलेशन के रूप में पेश किया गया है। इसका मतलब है कि किसानों को खेत में अलग-अलग शाकनाशियों को मिलाकर टैंक मिश्रण तैयार करने की आवश्यकता नहीं होगी। कंपनी का कहना है कि इससे खेत में दवा के इस्तेमाल की प्रक्रिया आसान हो सकती है और फसल के पूरे मौसम में शाकनाशी के प्रयोगों की संख्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।
फालेरिस माइनर के नियंत्रण पर खास जोर
भारत के गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में फालेरिस माइनर एक प्रमुख खरपतवार है। इसे आम बोलचाल में गुल्ली-डंडा या मंडूसी जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह गेहूं के साथ तेजी से बढ़ता है और खेत में उपलब्ध पानी, पोषक तत्व, प्रकाश तथा अन्य संसाधनों के लिए फसल से प्रतिस्पर्धा करता है।
फालेरिस माइनर का प्रभाव खास तौर पर उन क्षेत्रों में अधिक चिंता का विषय है, जहां गेहूं की लगातार खेती की जाती है। इसके अलावा विभिन्न शाकनाशियों के बार-बार इस्तेमाल के कारण इस खरपतवार में कुछ रसायनों के प्रति प्रतिरोध विकसित होने की समस्या भी सामने आई है। इससे किसानों के लिए प्रभावी खरपतवार नियंत्रण चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ADAMA के अनुसार, Actagon® को इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसमें दो सक्रिय तत्व—पाइरोक्सासल्फोन और मेट्रिब्यूजिन—एक ही फॉर्मूलेशन में शामिल हैं। कंपनी के अनुसार, इन दोनों की संयुक्त क्रियाविधि फालेरिस माइनर के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण घास एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण में मदद करती है।
दो सक्रिय तत्वों का संयोजन
Actagon® में पाइरोक्सासल्फोन और मेट्रिब्यूजिन का संयोजन किया गया है। कंपनी के अनुसार, दोनों सक्रिय तत्व अलग-अलग क्रियाविधि के माध्यम से खरपतवार नियंत्रण में योगदान करते हैं। इस दोहरी क्रियाविधि का उद्देश्य खरपतवारों पर प्रभावी और लंबे समय तक नियंत्रण उपलब्ध कराना है।
खरपतवार प्रबंधन में अलग-अलग क्रियाविधि वाले शाकनाशियों का महत्व इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि एक ही प्रकार के रसायन के लगातार इस्तेमाल से खरपतवारों में प्रतिरोध विकसित होने का खतरा रहता है। Actagon® का दोहरी क्रियाविधि वाला संयोजन इस दृष्टि से प्रतिरोध प्रबंधन की रणनीति में उपयोगी विकल्प प्रदान कर सकता है।
हालांकि, किसी भी शाकनाशी के प्रभावी इस्तेमाल के लिए सही समय, अनुशंसित मात्रा और उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन जरूरी है। शाकनाशी का अनावश्यक या अनुशंसित मात्रा से अधिक इस्तेमाल फसल और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
खेत में टैंक मिक्सिंग की जरूरत कम होगी
किसानों के सामने शाकनाशी के इस्तेमाल के दौरान कई व्यावहारिक चुनौतियां होती हैं। अलग-अलग उत्पादों को खेत पर मिलाना, सही अनुपात बनाए रखना और समय पर छिड़काव करना इनमें प्रमुख हैं। Actagon® को रेडी-मिक्स तरल फॉर्मूलेशन के रूप में पेश किया गया है, जिससे खेत में अलग-अलग उत्पादों को मिलाने की जरूरत नहीं रहती।
कंपनी के अनुसार, इससे खेत में काम करने की प्रक्रिया सरल हो सकती है। किसान एक तैयार फॉर्मूलेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे दवा तैयार करने में लगने वाला अतिरिक्त समय और श्रम कम हो सकता है।
ADAMA का दावा है कि Actagon® एक ही प्री-इमर्जेंस प्रयोग के माध्यम से लंबे समय तक खरपतवार नियंत्रण देने में मदद कर सकता है। इससे पूरे मौसम में बार-बार शाकनाशी के इस्तेमाल की आवश्यकता कम होने की संभावना है।
पंजाब और हरियाणा में लॉन्च पर विशेष फोकस
Actagon® का लॉन्च भारत के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों पर केंद्रित रहेगा। इनमें खास तौर पर पंजाब और हरियाणा शामिल हैं। इन राज्यों में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और फालेरिस माइनर का दबाव भी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण समस्या है।
गेहूं की शुरुआती अवस्था में खरपतवारों का प्रभाव फसल की स्थापना और आगे के विकास को प्रभावित कर सकता है। इसलिए बुवाई के बाद शुरुआती चरण में प्रभावी खरपतवार नियंत्रण गेहूं की खेती की पूरी उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ADAMA के अनुसार, Actagon® को किसानों की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए बाजार में उतारा गया है। कंपनी का उद्देश्य किसानों को ऐसा समाधान उपलब्ध कराना है, जिससे खरपतवार प्रबंधन को कम जटिल तरीके से किया जा सके।
प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में हुए परीक्षण
कंपनी के अनुसार, Actagon® का भारत के प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में खेत परीक्षण किया गया। इन परीक्षणों में फालेरिस माइनर के अधिक दबाव वाली परिस्थितियों में इसके अवशिष्ट खरपतवार नियंत्रण का मूल्यांकन किया गया।
ADAMA के मुताबिक, परीक्षणों में Actagon® से मजबूत और लंबे समय तक खरपतवार नियंत्रण के परिणाम मिले। कंपनी ने यह भी बताया कि एक बार प्री-इमर्जेंस प्रयोग के बाद फसल के प्रदर्शन में सुधार के संकेत मिले।
हालांकि, खेतों में शाकनाशी की प्रभावशीलता कई कारकों पर निर्भर करती है। इनमें खरपतवारों की संख्या, खरपतवार की अवस्था, मिट्टी का प्रकार, नमी, मौसम, फसल की स्थिति और इस्तेमाल का सही समय शामिल हैं। इसलिए किसानों को स्थानीय परिस्थितियों और पंजीकृत उपयोग निर्देशों के अनुसार ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
प्रतिरोध प्रबंधन में नई उम्मीद
फालेरिस माइनर में शाकनाशी प्रतिरोध की समस्या गेहूं किसानों के लिए लगातार गंभीर होती जा रही है। एक ही रसायन या एक ही क्रियाविधि वाले उत्पादों पर अत्यधिक निर्भरता से प्रतिरोध का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में विभिन्न क्रियाविधियों का वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल खरपतवार प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बन सकता है।
Actagon® में पाइरोक्सासल्फोन और मेट्रिब्यूजिन का संयोजन इसी दिशा में एक विकल्प उपलब्ध कराता है। कंपनी के अनुसार, इसका दोहरी क्रियाविधि वाला फॉर्मूलेशन फालेरिस माइनर तथा अन्य घास और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण में मदद करता है।
सितंबर 2026 में लॉन्च की उम्मीद
कंपनी के अनुसार, Actagon® भारत में पंजीकृत है और इसका लॉन्च सितंबर 2026 में किया जाना तय किया गया है। शुरुआत में इसका फोकस प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों पर रहेगा।
ADAMA के ग्लोबल हर्बिसाइड्स प्रमुख Germain Boulay के अनुसार, भारत में फालेरिस माइनर में प्रतिरोध बढ़ने के कारण गेहूं किसानों के लिए खरपतवार प्रबंधन लगातार मुश्किल हो रहा है। कंपनी के मुताबिक, Actagon® के माध्यम से सरल और भरोसेमंद प्री-इमर्जेंस समाधान उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है, जिससे खरपतवार नियंत्रण बेहतर करने के साथ-साथ खेत में कामकाज की जटिलता कम करने में मदद मिल सके।
गेहूं किसानों के लिए क्या मायने रखता है Actagon®
Actagon® का लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब गेहूं की खेती में खरपतवार प्रबंधन और शाकनाशी प्रतिरोध दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। रेडी-मिक्स तरल फॉर्मूलेशन किसानों के लिए इस्तेमाल को आसान बना सकता है, जबकि पाइरोक्सासल्फोन और मेट्रिब्यूजिन का संयोजन विभिन्न खरपतवारों के नियंत्रण के लिए एक व्यापक विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास है।
खास तौर पर पंजाब और हरियाणा जैसे गेहूं उत्पादक राज्यों में फालेरिस माइनर के दबाव को देखते हुए यह उत्पाद किसानों के लिए रुचि का विषय बन सकता है। हालांकि किसी भी शाकनाशी की सफलता उसके सही और वैज्ञानिक इस्तेमाल पर निर्भर करती है।
खरपतवारों का समय पर प्रबंधन गेहूं की फसल की शुरुआती वृद्धि, पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग और संभावित उत्पादन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में नई क्रियाविधि और तैयार मिश्रण वाले उत्पाद किसानों को खरपतवार नियंत्रण की रणनीति में अतिरिक्त विकल्प दे सकते हैं। Actagon® का भारतीय बाजार में प्रवेश इसी बदलती जरूरत को पूरा करने की दिशा में ADAMA का एक नया कदम है।
