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Home कृषि समाचार

रबी MSP 2027-28 की नई दरें जारी: गेहूं ₹2,610, मसूर ₹7,390 और कुसुम ₹7,215; जानें किस फसल पर कितना बढ़ा दाम

New Rabi MSP rates for 2027-28 released: Wheat ₹2,610, lentils ₹7,390 and safflower ₹7,215;

Emran Khan by Emran Khan
October 1, 2026
in कृषि समाचार
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रबी MSP 2027-28 की नई दरें जारी: गेहूं ₹2,610, मसूर ₹7,390 और कुसुम ₹7,215; जानें किस फसल पर कितना बढ़ा दाम
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केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए छह अनिवार्य रबी फसलों के Minimum Support Price (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति यानी CCEA की बैठक में यह फैसला लिया गया। सरकार के अनुसार MSP में यह वृद्धि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने और crop diversification को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।

इस बार MSP में सबसे बड़ी absolute increase कुसुम की फसल के लिए की गई है। कुसुम की MSP में ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के बाद इसका समर्थन मूल्य ₹7,215 प्रति क्विंटल हो गया है। इसके बाद रेपसीड एवं सरसों की MSP में ₹413 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिससे नई MSP ₹6,613 प्रति क्विंटल हो गई है।

मसूर की MSP ₹390 बढ़कर ₹7,390 प्रति क्विंटल, जौ की MSP ₹136 बढ़कर ₹2,286 प्रति क्विंटल और चने की MSP ₹83 बढ़कर ₹5,958 प्रति क्विंटल हो गई है। गेहूं की MSP में ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है और अब इसका समर्थन मूल्य ₹2,610 प्रति क्विंटल होगा।

रबी 2027-28 के लिए MSP का पूरा रेट कार्ड

सरकार की घोषणा के मुताबिक छह प्रमुख रबी फसलों के लिए MSP 2027-28 इस प्रकार रहेगी:

फसल MSP 2027-28 उत्पादन लागत लागत पर मार्जिन MSP 2026-27 बढ़ोतरी
गेहूं ₹2,610 ₹1,264 106% ₹2,585 ₹25
जौ ₹2,286 ₹1,447 58% ₹2,150 ₹136
चना ₹5,958 ₹3,751 59% ₹5,875 ₹83
मसूर ₹7,390 ₹3,854 92% ₹7,000 ₹390
रेपसीड एवं सरसों ₹6,613 ₹3,367 96% ₹6,200 ₹413
कुसुम ₹7,215 ₹4,810 50% ₹6,540 ₹675

PIB के अनुसार उत्पादन लागत की गणना में hired human labour, machine labour, leased land का rent, seed, fertilizer, manure, irrigation charges, farm implements पर depreciation, working capital interest, diesel/electricity और family labour की imputed value जैसी लागतें शामिल हैं।

कुसुम को सबसे बड़ा MSP बूस्ट, नई दर ₹7,215

इस बार रबी MSP में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी Safflower यानी कुसुम के लिए की गई है। इसकी MSP ₹6,540 से बढ़ाकर ₹7,215 प्रति क्विंटल कर दी गई है। यानी किसानों को ₹675 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त MSP support मिलेगा।

कुसुम की MSP में यह बढ़ोतरी percentage terms में भी छह फसलों में सबसे अधिक है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इसकी उत्पादन लागत ₹4,810 प्रति क्विंटल है और नई MSP इस लागत पर 50 प्रतिशत margin दर्शाती है।

कुसुम की खेती विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हो सकती है जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है। Oilseed crop होने के कारण इसे देश में edible oil production बढ़ाने की व्यापक रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

सरसों पर ₹413 की बढ़ोतरी, MSP पहुंची ₹6,613

रबी सीजन में किसानों के लिए प्रमुख oilseed crop रेपसीड और mustard है। सरकार ने इसकी MSP में ₹413 प्रति क्विंटल की वृद्धि की है।

2026-27 में ₹6,200 प्रति क्विंटल रही MSP अब बढ़कर ₹6,613 प्रति क्विंटल हो गई है। इसकी उत्पादन लागत ₹3,367 प्रति क्विंटल बताई गई है और MSP पर expected margin 96 प्रतिशत है।

सरकार पिछले कुछ वर्षों में cereals के अलावा pulses और oilseeds की खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर देती रही है। MSP में comparatively higher increase को इसी crop diversification strategy का हिस्सा माना जा सकता है।

मसूर की MSP ₹7,390, लागत पर 92% मार्जिन

रबी सीजन की प्रमुख pulse crop मसूर के लिए भी MSP में बड़ी वृद्धि की गई है। मसूर की MSP ₹7,000 से बढ़ाकर ₹7,390 प्रति क्विंटल कर दी गई है।

इसमें ₹390 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मसूर की उत्पादन लागत ₹3,854 प्रति क्विंटल है और नई MSP पर expected margin 92 प्रतिशत है।

Pulses की domestic availability बढ़ाना कृषि नीति का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रहा है। ऐसे में मसूर और चना जैसी crops को बेहतर MSP support देने से किसानों के crop choice पर असर पड़ सकता है।

गेहूं की MSP ₹2,610, लेकिन लागत पर सबसे ज्यादा 106% मार्जिन

गेहूं की MSP में इस बार ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। 2026-27 में ₹2,585 प्रति क्विंटल रही MSP अब ₹2,610 हो गई है।

हालांकि छह रबी फसलों में गेहूं की absolute MSP increase सबसे कम है, लेकिन उत्पादन लागत के मुकाबले margin के मामले में गेहूं सबसे ऊपर है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार गेहूं की production cost ₹1,264 प्रति क्विंटल है और ₹2,610 की MSP पर expected margin 106 प्रतिशत है।

इसके बाद रेपसीड एवं सरसों में 96 प्रतिशत और मसूर में 92 प्रतिशत margin है।

चना और जौ की MSP भी बढ़ी

चना किसानों के लिए भी सरकार ने MSP में बढ़ोतरी की है। चने की MSP ₹5,875 से बढ़कर ₹5,958 प्रति क्विंटल हो गई है। इसमें ₹83 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है।

चना की production cost ₹3,751 प्रति क्विंटल बताई गई है और MSP पर margin 59 प्रतिशत है।

इसी तरह जौ की MSP ₹2,150 से बढ़ाकर ₹2,286 प्रति क्विंटल कर दी गई है। इसमें ₹136 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। जौ की उत्पादन लागत ₹1,447 प्रति क्विंटल और MSP पर expected margin 58 प्रतिशत है।

MSP को उत्पादन लागत के 1.5 गुना से जोड़ने की नीति

रबी फसलों की MSP में यह वृद्धि Union Budget 2018-19 में घोषित उस नीति के अनुरूप है, जिसमें MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर निर्धारित करने की बात कही गई थी।

सरकार के अनुसार रबी 2027-28 में गेहूं पर लागत से 106 प्रतिशत, रेपसीड एवं सरसों पर 96 प्रतिशत, मसूर पर 92 प्रतिशत, चना पर 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत और कुसुम पर 50 प्रतिशत का expected margin है।

इसका अर्थ यह है कि MSP calculation में केवल बाजार मूल्य को नहीं बल्कि production economics को भी ध्यान में रखा गया है।

गेहूं की खरीद 3,715 लाख मीट्रिक टन तक पहुंची

MSP के साथ सरकार ने पिछले वर्षों की procurement स्थिति के आंकड़े भी जारी किए हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की procurement 3,715 लाख मीट्रिक टन तक पहुंची, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,254 लाख मीट्रिक टन थी।

इस तरह सरकारी procurement system के माध्यम से बड़ी मात्रा में गेहूं की खरीद की गई है। Procurement का महत्व इसलिए भी है क्योंकि केवल MSP घोषित होना और किसानों से उस MSP पर वास्तविक खरीद होना दो अलग-अलग बातें हैं।

किसानों को MSP का वास्तविक लाभ दिलाने के लिए procurement network, market access, payment system और खरीद infrastructure महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

छह रबी फसलों की खरीद भी बढ़ी

PIB के अनुसार 2014-15 से 2025-26 के दौरान छह प्रमुख रबी फसलों की कुल procurement 3,921 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई।

इसके मुकाबले 2004-05 से 2013-14 की अवधि में छह रबी फसलों की procurement 2,302 लाख मीट्रिक टन थी।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि wheat के अलावा अन्य रबी crops की procurement को भी पिछले वर्षों में बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

गेहूं किसानों को MSP के रूप में ₹7.31 लाख करोड़ का भुगतान

सरकार के अनुसार 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं उत्पादक किसानों को MSP procurement के तहत कुल ₹7.31 लाख करोड़ का भुगतान किया गया।

इसके मुकाबले 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि ₹2.56 लाख करोड़ थी।

छह प्रमुख रबी फसलों को मिलाकर देखें तो 2014-15 से 2025-26 के दौरान किसानों को MSP के रूप में ₹8.36 लाख करोड़ का भुगतान किया गया। इससे पहले 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि ₹2.65 लाख करोड़ थी।

MSP में बड़ा फोकस Pulses और Oilseeds पर

इस बार की MSP घोषणा का एक महत्वपूर्ण पहलू crop diversification है। गेहूं जैसी प्रमुख cereal crop के मुकाबले कुसुम, रेपसीड-मस्टर्ड और मसूर में absolute increase अधिक है।

सरकार ने भी अपने बयान में कहा है कि हाल के वर्षों में cereals के अलावा pulses और oilseeds की खेती को बढ़ावा देने के लिए इन फसलों को higher MSP support दिया जा रहा है।

कृषि अर्थव्यवस्था में crop diversification का उद्देश्य किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने से बचाने के साथ-साथ देश की जरूरत के अनुसार production pattern में बदलाव लाना भी है।

विशेषकर pulses और oilseeds के मामले में domestic production बढ़ाने से import dependence को कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है।

किसानों के लिए MSP का वास्तविक महत्व क्या है?

किसानों के लिए MSP केवल एक सरकारी rate नहीं है। यह उनके crop planning और market expectations को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण price signal भी है।

जब किसी फसल की MSP बढ़ती है तो किसान उस फसल की expected profitability को अन्य crops के साथ compare कर सकते हैं। हालांकि अंतिम crop choice केवल MSP पर निर्भर नहीं करती। इसमें soil condition, irrigation availability, local market, input cost, yield potential और weather risk जैसे factors भी महत्वपूर्ण होते हैं।

इसी वजह से MSP policy के साथ irrigation, quality seeds, mechanisation, storage, processing और market connectivity को मजबूत करना भी कृषि आय बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।

रबी सीजन में बदल सकती है किसानों की Crop Planning

रबी 2027-28 की MSP घोषणा ऐसे समय हुई है जब किसानों के सामने अगले season के लिए crop planning का सवाल है। गेहूं, चना, मसूर, सरसों, जौ और कुसुम में अलग-अलग MSP increase किसानों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से विकल्पों का मूल्यांकन करने का संकेत दे सकती है।

जहां गेहूं की MSP ₹2,610 प्रति क्विंटल हुई है, वहीं मसूर और कुसुम जैसी फसलों की MSP क्रमशः ₹7,390 और ₹7,215 प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है।

हालांकि MSP की absolute राशि को अकेले देखकर फसल की profitability तय नहीं की जा सकती। प्रति एकड़ yield, cultivation cost और local market conditions भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

कृषि बाजार में MSP का असर आगे कैसे दिखेगा?

रबी MSP 2027-28 की नई दरों का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव mandi prices, procurement, food processing, storage और agricultural supply chain पर भी पड़ सकता है।

Oilseeds की MSP में हुई वृद्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे farmers के crop economics में बदलाव आ सकता है। इसी तरह pulses में बेहतर support price किसानों को इन फसलों का acreage बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

दूसरी ओर wheat की MSP में सीमित वृद्धि को procurement requirements, existing stocks और broader foodgrain management के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। हालिया रिपोर्टों में wheat stocks और procurement levels को इस year’s MSP decision के संदर्भ में चर्चा का विषय बनाया गया है।

क्या है रबी MSP 2027-28 का बड़ा संदेश?

रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए MSP का नया structure तीन बड़े policy signals देता है—farmer price support, crop diversification और production economics।

कुसुम की MSP में ₹675 की सबसे बड़ी absolute वृद्धि हुई है। रेपसीड एवं सरसों में ₹413 और मसूर में ₹390 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। वहीं गेहूं, चना और जौ की MSP में क्रमशः ₹25, ₹83 और ₹136 की बढ़ोतरी हुई है।

सरकार के अनुसार इन revised MSPs का उद्देश्य किसानों को उनकी उत्पादन लागत के ऊपर लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और pulses तथा oilseeds जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना है।

आने वाले रबी सीजन में इसका वास्तविक प्रभाव किसानों के acreage decisions, production, procurement और market prices में दिखाई देगा। साथ ही राज्यों में स्थानीय कृषि परिस्थितियों, पानी की उपलब्धता और बाजार demand के अनुसार किसान इन फसलों का चयन करेंगे।

रबी 2027-28 के लिए नई MSP दरें अब स्पष्ट हैं—गेहूं ₹2,610, जौ ₹2,286, चना ₹5,958, मसूर ₹7,390, रेपसीड एवं सरसों ₹6,613 और कुसुम ₹7,215 प्रति क्विंटल। इस तरह सरकार ने रबी की सभी छह mandated crops के लिए revised price support framework लागू किया है।

 

Tags: AgricultureFarmingICARIndian FarmingMSP
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