भारतीय कृषि अनुसंधान और टिकाऊ खेती के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डॉ. एम. एल. जट को वर्ष 2026 के International Agronomy Award से सम्मानित किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. जट को यह सम्मान कृषि विज्ञान यानी Agronomy के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जा रहा है। यह पुरस्कार अमेरिका की प्रतिष्ठित American Society of Agronomy (ASA) की ओर से प्रदान किया जाता है। संस्था के आधिकारिक पुरस्कार विवरण में डॉ. जट का नाम 2026 के International Agronomy Award के प्राप्तकर्ता के रूप में दर्ज है। <Cite refs={[“turn200794search5″,”turn200794search6”]}/>
यह सम्मान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव, खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन को टिकाऊ बनाए रखने जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इन परिस्थितियों में कृषि अनुसंधान की भूमिका केवल फसल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। अब ऐसी खेती प्रणालियों की जरूरत है, जो किसानों की उत्पादकता और आय में सुधार करने के साथ मिट्टी, पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी कर सकें।
डॉ. जट को मिलने वाला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान कृषि अनुसंधान, Conservation Agriculture, Climate-Resilient Farming और Sustainable Intensification जैसे क्षेत्रों में उनके योगदान को वैश्विक स्तर पर रेखांकित करता है। पुरस्कार से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उनके अनुसंधान ने दक्षिण एशिया, अफ्रीका और छोटे किसानों पर निर्भर अन्य क्षेत्रों में कृषि अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों को प्रभावित किया है। <Cite refs={[“turn200794search5”]}/>
2 नवंबर को CANVAS 2026 में देंगे विशेष व्याख्यान
डॉ. एम. एल. जट 2 नवंबर 2026 को अमेरिका के पोर्टलैंड, ओरेगन में आयोजित होने वाली CANVAS Annual Meeting 2026 में विशेष व्याख्यान देंगे। उनके व्याख्यान का विषय कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के लिए भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करना है।
CANVAS 2026 का आयोजन 1 से 4 नवंबर तक ओरेगन कन्वेंशन सेंटर, पोर्टलैंड में किया जा रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कृषि विज्ञान, फसल विज्ञान, मृदा विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों तथा कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध कराता है। सम्मेलन में वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों, कृषि नवाचार और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। <Cite refs={[“turn200794search2″,”turn200794search7”]}/>
डॉ. जट का विशेष व्याख्यान इस बात पर केंद्रित होगा कि भारत और अमेरिका के बीच वैज्ञानिक सहयोग को किस प्रकार मजबूत किया जा सकता है, ताकि कृषि उत्पादन प्रणालियों को अधिक टिकाऊ, जलवायु-अनुकूल और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से सक्षम बनाया जा सके।
भारत और अमेरिका दोनों देशों में कृषि अनुसंधान की व्यापक भूमिका है। कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, जल उपयोग दक्षता और Climate-Smart Agriculture जैसे क्षेत्रों में ज्ञान का आदान-प्रदान किसानों तथा कृषि संस्थानों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, किसी भी तकनीक की सफलता स्थानीय जलवायु, मिट्टी, कृषि संसाधनों और किसानों की जरूरतों के अनुरूप उसके इस्तेमाल पर निर्भर करती है।
क्या है International Agronomy Award?
International Agronomy Award, अमेरिकन सोसाइटी ऑफ एग्रोनॉमी की ओर से दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित सम्मान है। इसका उद्देश्य अमेरिका के बाहर कृषि विज्ञान के विकास और उन्नति में उत्कृष्ट योगदान देने वाले Agronomists को पहचान प्रदान करना है।
इस पुरस्कार के अंतर्गत कृषि अनुसंधान, शिक्षण, विस्तार सेवाओं, प्रशासन और कृषि विज्ञान एवं व्यवहार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने वाले अन्य योगदानों को मान्यता दी जाती है। इसका उद्देश्य उन वैज्ञानिकों के काम को सम्मानित करना है, जिनके प्रयास कृषि प्रणालियों को बेहतर बनाने और विभिन्न क्षेत्रों की कृषि चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. एम. एल. जट को इस पुरस्कार के लिए चुना जाना भारतीय कृषि अनुसंधान समुदाय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह इस बात को भी रेखांकित करता है कि भारत में विकसित कृषि अनुसंधान और टिकाऊ खेती से जुड़े अनुभव अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक विमर्श में उपयोगी योगदान दे सकते हैं।
कृषि विज्ञान में वैज्ञानिकों का योगदान कई स्तरों पर सामने आता है। एक ओर वे फसल उत्पादन की चुनौतियों को समझने के लिए शोध करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनका काम खेती की पद्धतियों, संसाधनों के उपयोग और कृषि प्रणालियों के दीर्घकालिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में सहायक होता है। जब इन अनुसंधान परिणामों को किसानों, कृषि विस्तार संस्थानों और नीति-निर्माताओं तक पहुंचाया जाता है, तो उनका व्यावहारिक महत्व और बढ़ जाता है।
टिकाऊ कृषि और Conservation Agriculture में योगदान
डॉ. जट के आधिकारिक पुरस्कार विवरण में Conservation Agriculture आधारित Sustainable Intensification और Climate-Resilient Farming Systems को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। उनके अनुसंधान में Agronomy, Precision Nutrient Management, Water Management और Landscape Restoration जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। <Cite refs={[“turn200794search5”]}/>
इन विषयों का महत्व वर्तमान कृषि व्यवस्था में लगातार बढ़ रहा है। बढ़ती आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन जरूरी है, लेकिन इसके साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, जल संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करना और खेती की जलवायु संबंधी जोखिमों के प्रति संवेदनशीलता कम करना भी आवश्यक है।
1. Conservation Agriculture की बढ़ती उपयोगिता
Conservation Agriculture ऐसी खेती प्रणालियों से जुड़ा दृष्टिकोण है, जिनमें मिट्टी की अनावश्यक जुताई को कम करना, मिट्टी को फसल अवशेषों से ढककर रखना और फसल विविधीकरण जैसे सिद्धांत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन तरीकों का उद्देश्य मिट्टी की संरचना और स्वास्थ्य को बनाए रखने, कटाव कम करने तथा खेती के संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद करना है।
हालांकि, इन तकनीकों को अपनाने का तरीका हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं हो सकता। मिट्टी का प्रकार, फसल चक्र, खरपतवार प्रबंधन, मशीनों की उपलब्धता और किसानों की आर्थिक स्थिति जैसे कारक इनके परिणामों को प्रभावित करते हैं। इसलिए वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तकनीकी सलाह देना भी महत्वपूर्ण है।
डॉ. जट के शोध कार्य को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है, जहां कृषि उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को एक-दूसरे के पूरक के रूप में समझने पर जोर दिया जाता है।
2. Climate-Resilient Farming की जरूरत
जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में मौसम की अनिश्चितता, तापमान में बदलाव, वर्षा के असमान वितरण और सूखे या अत्यधिक वर्षा जैसी परिस्थितियों का जोखिम बढ़ रहा है। इन चुनौतियों का असर फसल की वृद्धि, उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है।
Climate-Resilient Farming का उद्देश्य ऐसी कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देना है, जो बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच उत्पादन बनाए रखने और जोखिमों को कम करने में मदद करें। इसमें स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसल और किस्मों का चयन, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, पानी का बेहतर उपयोग और उपयुक्त फसल प्रबंधन तकनीकें महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
डॉ. जट के आधिकारिक पुरस्कार विवरण में जलवायु-सहिष्णु खेती प्रणालियों को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। यह क्षेत्र भविष्य की खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। <Cite refs={[“turn200794search5”]}/>
Precision Nutrient Management से संसाधनों के बेहतर उपयोग तक
कृषि उत्पादन में उर्वरकों और पोषक तत्वों का सही प्रबंधन एक महत्वपूर्ण विषय है। फसलों को उनकी जरूरत के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध कराना, मिट्टी की स्थिति को समझना और अनावश्यक उपयोग से बचना उत्पादन लागत तथा पर्यावरणीय प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
Precision Nutrient Management का उद्देश्य फसल, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर पोषक तत्वों के उपयोग को अधिक सटीक बनाना है। इसके लिए मृदा परीक्षण, फसल की जरूरतों का आकलन, उपयुक्त मात्रा और सही समय पर पोषक तत्वों का प्रयोग जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
भारत में छोटे और सीमांत किसानों के लिए उर्वरक लागत खेती के कुल खर्च का अहम हिस्सा हो सकती है। ऐसे में वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन किसानों को संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका लाभ तभी बेहतर तरीके से प्राप्त किया जा सकता है, जब किसानों को विश्वसनीय मृदा जांच, समय पर सलाह और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल तकनीकी सहायता उपलब्ध हो।
डॉ. जट के अनुसंधान क्षेत्रों में Precision Nutrient Management का उल्लेख इस बात को दर्शाता है कि आधुनिक Agronomy में फसल उत्पादन को केवल अधिक इनपुट के साथ जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि इनपुट की दक्षता और कृषि प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता को भी महत्व दिया जाता है। <Cite refs={[“turn200794search5”]}/>
जल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
खेती में पानी की उपलब्धता और उसका उचित इस्तेमाल कृषि उत्पादकता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा, वर्षा की मात्रा, भूजल की स्थिति और फसलों की जरूरतों में अंतर होता है। इसलिए जल प्रबंधन के लिए क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियां आवश्यक हैं।
Water Management पर आधारित कृषि अनुसंधान का उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और फसलों की जरूरत के अनुसार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के तरीके विकसित करना है। सिंचाई का उचित समय, जल उपयोग दक्षता और मिट्टी में नमी के संरक्षण जैसे विषय इसमें महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि किसानों की दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता से भी संबंधित है। मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, जल संसाधनों पर दबाव और खेती की बढ़ती लागत कृषि की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। इसीलिए आधुनिक कृषि अनुसंधान में उत्पादन, संसाधन दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता को एक साथ देखने की जरूरत बढ़ रही है।
डॉ. जट के आधिकारिक पुरस्कार विवरण में जल प्रबंधन और Landscape Restoration को उनके शोध के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। <Cite refs={[“turn200794search5”]}/>
छोटे किसानों की कृषि प्रणालियों के लिए अंतरराष्ट्रीय महत्व
डॉ. जट के कार्य का एक महत्वपूर्ण पहलू छोटे किसानों पर निर्भर कृषि क्षेत्रों में शोध और विकास कार्यक्रमों पर उसका प्रभाव है। आधिकारिक पुरस्कार विवरण के अनुसार, उनके काम ने दक्षिण एशिया, अफ्रीका और अन्य छोटे किसान-प्रधान क्षेत्रों में कृषि अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों को प्रभावित किया है। <Cite refs={[“turn200794search5”]}/>
छोटे किसानों के सामने अक्सर कई चुनौतियां एक साथ मौजूद होती हैं। सीमित भूमि, पूंजी की कमी, मौसम का जोखिम, कृषि इनपुट की लागत और बाजार तक पहुंच जैसे कारक उनके उत्पादन और आय को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए ऐसी तकनीकों की जरूरत होती है, जो केवल वैज्ञानिक रूप से प्रभावी ही न हों, बल्कि आर्थिक रूप से व्यावहारिक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल भी हों।
कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, विस्तार सेवाओं और किसानों के बीच सहयोग जरूरी है। किसी तकनीक की सफलता का मूल्यांकन इस आधार पर भी होना चाहिए कि किसान उसे अपनाने में सक्षम हैं या नहीं और उससे उनके उत्पादन संसाधनों तथा आजीविका पर क्या प्रभाव पड़ता है।
इस दृष्टि से टिकाऊ कृषि प्रणालियों पर शोध का महत्व व्यापक है। यदि वैज्ञानिक अनुसंधान को स्थानीय ज्ञान और किसानों के अनुभव के साथ जोड़ा जाए, तो विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक समाधान विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
भारत-अमेरिका कृषि सहयोग को मिल सकता है नया आयाम
डॉ. जट के CANVAS 2026 में प्रस्तावित व्याख्यान का विषय भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास से जोड़ता है। यह विषय अंतरराष्ट्रीय कृषि सहयोग की बदलती जरूरतों को समझने का अवसर प्रदान करता है।
भारत और अमेरिका में कृषि अनुसंधान से जुड़े संस्थान फसल उत्पादन, मृदा एवं जल संसाधन, जलवायु परिवर्तन, कृषि तकनीक और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों जैसे अनेक क्षेत्रों में काम करते हैं। वैज्ञानिक संवाद और शोध सहयोग के माध्यम से विभिन्न कृषि परिस्थितियों में विकसित अनुभवों को साझा किया जा सकता है।
हालांकि, किसी देश में विकसित तकनीक को दूसरे देश में लागू करने से पहले उसकी स्थानीय उपयोगिता का आकलन करना आवश्यक है। भारत के छोटे किसानों, विविध कृषि-जलवायु क्षेत्रों और अलग-अलग फसल प्रणालियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही किसी तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाने की रणनीति तैयार की जानी चाहिए।
भारत-अमेरिका सहयोग के संदर्भ में अनुसंधान संस्थानों के बीच संवाद, वैज्ञानिक ज्ञान का आदान-प्रदान, शोधकर्ताओं के लिए अवसर और कृषि चुनौतियों पर संयुक्त चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। डॉ. जट का व्याख्यान इन्हीं व्यापक विषयों पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान आकर्षित करेगा।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध जानकारी में व्याख्यान के विषय का उल्लेख है, लेकिन किसी नई द्विपक्षीय परियोजना, समझौते या वित्तीय घोषणा का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस कार्यक्रम को कृषि सहयोग पर विचार-विमर्श और वैज्ञानिक संवाद के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
CANVAS 2026: कृषि विज्ञान का अंतरराष्ट्रीय मंच
CANVAS 2026 का आयोजन अमेरिकन सोसाइटी ऑफ एग्रोनॉमी, Crop Science Society of America और Soil Science Society of America से जुड़ी वैज्ञानिक गतिविधियों के व्यापक मंच के रूप में किया जा रहा है। सम्मेलन 1 से 4 नवंबर 2026 तक पोर्टलैंड के ओरेगन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा। इसमें कृषि, फसल, मृदा और पर्यावरण विज्ञान से संबंधित शोध, तकनीकी सत्र, कार्यशालाएं और वैज्ञानिक संवाद शामिल हैं। <Cite refs={[“turn200794search2″,”turn200794search7”]}/>
ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में वैज्ञानिकों को अपने शोध निष्कर्ष साझा करने, दूसरे शोधकर्ताओं के काम से सीखने और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है। कृषि अनुसंधान में यह संवाद महत्वपूर्ण है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं।
भारत जैसे कृषि-प्रधान देश के लिए वैश्विक वैज्ञानिक मंचों पर भारतीय शोध और अनुभवों की उपस्थिति महत्वपूर्ण है। इससे विभिन्न कृषि प्रणालियों की चुनौतियों, तकनीकी विकल्पों और टिकाऊ उत्पादन से जुड़े विचारों पर व्यापक चर्चा संभव होती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मान?
डॉ. एम. एल. जट को International Agronomy Award के लिए चुना जाना कृषि विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय योगदान को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने का अवसर है। यह सम्मान उन अनुसंधान विषयों को भी रेखांकित करता है, जिनकी जरूरत भविष्य की कृषि प्रणालियों में लगातार बढ़ रही है—जैसे संसाधन संरक्षण, जलवायु-सहिष्णु खेती, पोषक तत्वों का कुशल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि उत्पादन।
कृषि क्षेत्र के सामने चुनौती केवल अधिक अनाज या खाद्य पदार्थ पैदा करने की नहीं है। किसानों की आजीविका, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जलवायु जोखिमों का प्रबंधन और खाद्य प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में Agronomy का क्षेत्र उत्पादन और संसाधन प्रबंधन के बीच संतुलन स्थापित करने में अहम भूमिका निभाता है।
डॉ. जट का सम्मान इस व्यापक उद्देश्य को सामने लाता है कि कृषि अनुसंधान को वैज्ञानिक उत्कृष्टता के साथ-साथ वास्तविक कृषि चुनौतियों के समाधान से भी जुड़ा होना चाहिए।
डॉ. एम. एल. जट को मिलने वाला 2026 का International Agronomy Award भारतीय कृषि अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अमेरिकन सोसाइटी ऑफ एग्रोनॉमी का यह सम्मान कृषि विज्ञान में उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है। 2 नवंबर को CANVAS 2026 में उनका प्रस्तावित व्याख्यान कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा, सतत विकास और भारत-अमेरिका वैज्ञानिक सहयोग पर चर्चा को आगे बढ़ाने का अवसर बनेगा।
Conservation Agriculture, Climate-Resilient Farming, Precision Nutrient Management और Water Management जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान की बढ़ती जरूरत के बीच यह सम्मान टिकाऊ कृषि की दिशा में वैज्ञानिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित करता है। भारतीय कृषि के भविष्य के लिए ऐसे शोध को किसानों की जरूरतों, स्थानीय परिस्थितियों और व्यावहारिक खेती पद्धतियों से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा।

