֍:क्या हैं इन रोगों के लक्षण§ֆ:1. पीला सिगाटोका
2. काला सिगाटोका
3. पनामा विल्ट
§ֆ:§֍:रोगों से बचाव के उपाय§ֆ:1. सिगाटोका और पनामा विल्ट रोग से बचाव के लिए प्रतिरोधी किस्म के पौधे लगाएं. साथ ही खेत को खरपतवार से मुक्त रखें. खेत से अधिक पानी की निकासी कर लें और 1 किलो ट्राईकोडर्मा विरिडे को 25 किलो गोबर खाद के साथ प्रति एकड़ की दर से मिट्टी में मिला दें.
2. काला सिगाटोका रोग से बचाव के लिए रासायनिक फफूंदनाशक कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
3. पनामा रोग से बचाव के लिए कार्बेन्डाजिम डब्लू.पी. 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल बनाकर छिड़काव करें. केले की पत्तियां चिकनी होती हैं. ऐसे में घोल में स्टीकर मिला देना लाभदायक होता है.
§केले की खेती से किसान बेहतर मुनाफा कमाते हैं, लेकिन अक्टूबर-नवंबर के महीने में केले के फलों में रोग लगने का भी खतरा बढ़ जाता है. इस महीने में केले के फल में पीला सिगाटोका रोग, काला सिगाटोका और पनामा विल्ट रोग का प्रभाव देखा जा रहा है. जो फफूंद जनित रोग है, जिसकी पहचान और प्रबंधन करना किसानों के लिए बहुत जरूरी होता है. इन रोगों के लगने से किसानों को कई बार नुकसान का सामना करना पड़ता है, इन्हीं समस्याओं के निजात के लिए बिहार कृषि विभाग ने केले में लगने वाले रोग से बचाव के उपाय बताए हैं. इस उपाय को अपनाकर बिहार के किसान केले की फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं.

