भारत में पादप जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रख्यात वैज्ञानिक Prof. K.C. Bansal को जयपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Biotech Innovations 2026: From Discovery to Translation” के दौरान लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मेलन Department of Biotechnology और Department of Science and Technology के सहयोग से Suresh Gyan Vihar University में आयोजित हुआ, जिसका उद्घाटन Dr. Yogesh Kumar Chawla ने किया।
प्रो. बंसल का पूरा शोध कार्य वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसी बड़ी चुनौती पर केंद्रित रहा है, जहां उन्होंने फंक्शनल जीनोमिक्स, जेनेटिक इंजीनियरिंग और जीनोम एडिटिंग को एकीकृत कर कृषि विज्ञान में नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में गेहूं और चना जैसी प्रमुख फसलों में जलवायु सहनशील गुणों की पहचान की गई, जिससे सूखा, गर्मी, लवणता और रोगों के प्रति सहनशील नई किस्मों के विकास को गति मिली। उनके द्वारा विकसित ट्रेट-आधारित रेफरेंस सेट आज विभिन्न ब्रीडिंग प्रोग्राम्स के लिए आधार बन चुके हैं, जो एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के करोड़ों लोगों की खाद्य जरूरतों से सीधे जुड़े हैं।
इसके साथ ही, प्रो. बंसल ने स्ट्रेस टॉलरेंस जीन की खोज और क्लोनिंग में भी अहम भूमिका निभाई, जिसके आधार पर कई ट्रांसजेनिक फसलें विकसित की गईं। केरल स्थित रबर रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ उनके सहयोग से विकसित ऑस्मोटिन जीन युक्त ट्रांसजेनिक रबर फसल इसका प्रमुख उदाहरण है, जो फिलहाल फील्ड ट्रायल के चरण में है और भविष्य में कृषि उत्पादन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
प्रो. बंसल की विशेषता केवल शोध तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने संस्थागत ढांचे को मजबूत करने में भी अग्रणी भूमिका निभाई। Indian Council of Agricultural Research के नेशनल ट्रांसजेनिक क्रॉप नेटवर्क की स्थापना और नेतृत्व के जरिए उन्होंने देशभर के अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों को एक मंच पर जोड़ा। उनके लैब में विकसित जीन कंस्ट्रक्ट्स को ICAR, CSIR, DRDO और अन्य संस्थानों के साथ साझा किया गया, जिससे ट्रांसजेनिक फसलों के विकास में व्यापक सहयोग संभव हुआ और कृषि अनुसंधान को नई गति मिली।
वर्ष 2010 से 2016 तक National Bureau of Plant Genetic Resources के निदेशक के रूप में उन्होंने दुनिया के प्रमुख पौध आनुवंशिक संसाधन भंडार का नेतृत्व किया और संरक्षण व नवाचार के बीच संतुलन स्थापित किया। इसी दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि के लिए आनुवंशिक संसाधन आयोग में एशिया के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया, जहां उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत की वैज्ञानिक सोच और अनुभव को मजबूती से प्रस्तुत किया।
नीति निर्माण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने भारत में कृषि जैव प्रौद्योगिकी के लिए एक संतुलित और प्रगतिशील नियामक ढांचा विकसित करने में अहम भूमिका निभाई। जीनोम एडिटेड फसलों के लिए सरल और वैज्ञानिक आधारित नियमों की वकालत करते हुए उन्होंने अनुसंधान से लेकर व्यावसायिक उपयोग तक के रास्ते को आसान बनाने का प्रयास किया। वर्तमान में वे ICAR-NASF के अंतर्गत CRISPR आधारित फसल अनुसंधान नेटवर्क की तकनीकी सलाहकार समिति के अध्यक्ष के रूप में देश की शोध दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रो. के.सी. बंसल को मिला यह सम्मान उनके दशकों लंबे समर्पण और योगदान का प्रतीक है, जिसने प्रयोगशाला से खेत तक विज्ञान को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कार्य न केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक मजबूत आधार प्रदान करता है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि जब विज्ञान समाज के हित से जुड़ता है, तो वह देश और दुनिया दोनों के लिए परिवर्तनकारी साबित होता है।

