ग्रामीण भारत में डिजिटल शासन को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Ministry of Panchayati Raj के प्रयासों से जहां eGramSwaraj प्लेटफॉर्म के माध्यम से 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऑनलाइन भुगतान दर्ज किए गए हैं, वहीं एआई आधारित ‘सभासार’ टूल को 23 भारतीय भाषाओं में विस्तारित कर दिया गया है। यह पहल ग्रामीण स्तर पर पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को नई मजबूती दे रही है।
ई-ग्रामस्वराज: डिजिटल भुगतान में बड़ी छलांग
ई-ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म ने पंचायत स्तर पर वित्तीय प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। यह प्लेटफॉर्म Public Financial Management System (PFMS) से जुड़ा हुआ है, जिससे सभी भुगतान सीधे और पारदर्शी तरीके से किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं को रियल-टाइम में भुगतान हो रहा है, जिससे नकद लेनदेन और कागजी प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम हुई है।
वित्त वर्ष 2025-26 में ही पंचायती राज संस्थाओं ने इस प्लेटफॉर्म के जरिए 53,342 करोड़ रुपये का ऑनलाइन ट्रांसफर किया है। देशभर की 2.59 लाख से अधिक पंचायत संस्थाएं इस प्रणाली से जुड़ चुकी हैं, जिनमें से 2.50 लाख से ज्यादा संस्थाओं ने सक्रिय रूप से ऑनलाइन भुगतान किए हैं। इसके अलावा, 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास योजनाएं भी इसी प्लेटफॉर्म पर अपलोड की हैं।
इस प्लेटफॉर्म पर 1.60 करोड़ से अधिक विक्रेताओं का पंजीकरण होना इसकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है। इससे न केवल भुगतान प्रक्रिया तेज हुई है, बल्कि भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों की संभावना भी काफी हद तक कम हुई है।
‘सभासार’ से बढ़ी भाषाई समावेशिता
डिजिटल शासन को और अधिक समावेशी बनाने के लिए मंत्रालय ने एआई आधारित ‘सभासार’ टूल को 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया है। यह टूल ग्राम सभाओं की बैठकों को वॉयस-टू-टेक्स्ट तकनीक के जरिए रिकॉर्ड कर स्वतः सारांश तैयार करता है।
पहले यह सुविधा सीमित भाषाओं तक थी, लेकिन अब इसमें असमिया, बोडो, डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मणिपुरी, नेपाली, संथाली और सिंधी जैसी भाषाएं भी शामिल कर ली गई हैं। इससे विभिन्न राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय भाषा में बैठक की कार्यवाही दर्ज करना आसान हो गया है।
‘सभासार’ न केवल बैठक के मिनट्स तैयार करता है, बल्कि इसमें उपस्थिति, प्रस्ताव और कार्य बिंदुओं को भी स्वचालित रूप से रिकॉर्ड किया जाता है। इससे ग्राम सभा की कार्यवाही अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनती है, साथ ही आम नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ती है।
29 जनवरी 2026 तक देशभर की 1.11 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें इस टूल का उपयोग कर चुकी हैं, जो इसकी उपयोगिता और लोकप्रियता को दर्शाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
इस डिजिटल पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। ‘सभासार’ को The Indian Express Group के टेक्नोलॉजी सभा एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस श्रेणी में विजेता घोषित किया गया। इसके अलावा The Economic Times के गॉवटेक अवॉर्ड्स 2026 में इसे “एआई फॉर सोशल इम्पैक्ट” श्रेणी में सिल्वर अवॉर्ड भी मिला।
ग्रामीण शासन में पारदर्शिता और सशक्तिकरण
इन पहलों के जरिए सरकार का लक्ष्य डिजिटल रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर पंचायत प्रणाली विकसित करना है। ई-ग्रामस्वराज और सभासार जैसे प्लेटफॉर्म ग्रामीण प्रशासन को आधुनिक बनाने के साथ-साथ आम लोगों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने का काम कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह पहल ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति को नई गति दे रही है। इससे न केवल वित्तीय प्रबंधन अधिक पारदर्शी और प्रभावी हुआ है, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी भी मजबूत हुई है, जो देश के समग्र विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

