बरेली स्थित रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बॉटनिकल गार्डन में कृषि शिक्षा को व्यावहारिक रूप देने की एक अनूठी पहल देखने को मिल रही है। यहां कृषि विभाग के स्नातक और परास्नातक के छात्र-छात्राएं मौसमी खेती के जरिए न केवल नई तकनीकों को सीख रहे हैं, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतार रहे हैं।
छात्रों ने मौसम के अनुसार विभिन्न फसलों की बुवाई शुरू कर दी है। क्यारी पद्धति, चोटी पद्धति, फ्लैट और ब्रॉडकास्टिंग जैसी अलग-अलग तकनीकों का उपयोग करते हुए बहुद्देशीय खेती की जा रही है। इस प्रयोगात्मक खेती में मक्का के साथ-साथ उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलें भी उगाई गई हैं। इसके अलावा लौकी, भिंडी और तोरई जैसी सब्जियों की खेती की तैयारी भी चल रही है।
छात्रों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती की वास्तविक परिस्थितियों को समझना और आधुनिक तकनीकों को अपनाना भी है। बीते सीजन में उगाई गई टमाटर और मिर्च जैसी फसलों के अच्छे परिणाम सामने आए हैं, जिनकी स्थानीय स्तर पर बिक्री भी की गई। इससे छात्रों को खेती के साथ-साथ विपणन का व्यावहारिक अनुभव भी मिला।
बॉटनिकल गार्डन में इन दिनों कई फल और मसाला पौधों पर भी बेहतर विकास देखने को मिल रहा है। पिस्ता के पेड़ों पर बौर आ चुका है, वहीं दालचीनी और तेजपत्ता जैसे मसालों के पौधों में भी वृद्धि दिखाई दे रही है। आम की फसल को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार की उम्मीद है।
यह पहल छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक और टिकाऊ कृषि की दिशा में तैयार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यावहारिक शिक्षा से युवा पीढ़ी खेती को एक लाभकारी और सम्मानजनक पेशे के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित होगी।
कुल मिलाकर, बरेली के बॉटनिकल गार्डन में चल रही यह मौसमी खेती की पहल शिक्षा और कृषि के बेहतर समन्वय का उदाहरण है, जो आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में नए नवाचारों और प्रशिक्षित युवाओं की नींव मजबूत करेगी।

